'निर्भया केस जैसा हाल...'पेपर लीक पर नए कानून से भड़के NEET आरोपियों के वकील
NEET UG पेपर लीक मामले में आरोपियों दिनेश बिवाल और विकास बिवाल के वकील एपी सिंह ने भारत सरकार के एक फैसले का जिक्र करते हुए मामले की तुलना निर्भया केस से करी दी.

NEET-UG पेपर लीक मामले में आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल के वकील AP सिंह ने केंद्र सरकार द्वारा पेपर लीक पर नए कानून लाए जाने के खिला प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा लागू नई व्यवस्था, प्रक्रिया और कानूनों के तहत नए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं. हालांकि यह कानून जल्दबाजी में और दबाव में बनाया गया था, लेकिन यह सच है कि जब भी विरोध-प्रदर्शन, जनता के दबाव, जंतर-मंतर पर धरने या संसद में हंगामे के बाद कोई कानून बनता है, तो जल्दबाजी होना स्वाभाविक है. ऐसी जल्दबाजी अक्सर न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को प्रभावित करती है.
सिंह ने कहा कि दिनेश बिवाल और विकास बिवाल पूरी तरह निर्दोष हैं. अगली सुनवाई 3 अगस्त को होनी है. हम अभी शुरुआती चरण में हैं - ठीक वैसे ही जैसे निर्भया मामले में फास्ट-ट्रैक कोर्ट की कार्यवाही शुरू हुई थी. हमने उस मामले में जल्दबाजी के नतीजे देखे हैं. हमारा पक्ष साफ है: कोई रिकवरी नहीं हुई है और कोई सबूत नहीं है.
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NTA ने 47 लोगों को सस्पेंड किया- एपी सिंह
उन्होंने कहा कि हम पुलिस कस्टडी रिमांड की कार्यवाही में शामिल हुए. कोई मनी ट्रेल (पैसे का लेन-देन), कॉल डिटेल, फोटो या वीडियोग्राफी नहीं है. उनके खिलाफ किसी भी तरह का कोई सबूत नहीं है. NTA ने 47 लोगों को सस्पेंड किया. बाद में, पेपर लीक करने और उसे पहुंचाने में शामिल अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया; अधिकारियों के पास उनसे जुड़े सभी सबूत और जानकारी है.
वकील ने कहा कि असली दोषी वे हैं. जैसे ही CBI ने जांच अपने हाथ में ली, उन्होंने बस इन तीनों को उठाया और जेल में डाल दिया. 'सभी के लिए न्याय' और 'जमानत नियम है, जेल अपवाद है' के सिद्धांतों को नजरअंदाज किया गया है. अगर कोई जमानत की सभी शर्तें पूरी करता है, तो उसे जमानत मिलनी चाहिए.






















