गिरफ्तार कर लो या जाने दो! सफदरजंग अस्पताल पर सोनम वांगचुक का गंभीर आरोप; सुरक्षाकर्मी से बहस
Delhi News In Hindi: सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल में सिक्योरिटी गार्ड से बहस का वीडियो जारी किया. कोर्ट आदेश से पहले रिकॉर्डेड क्लिप में उन्होंने गिरफ्तारी या रिहाई की मांग की.

लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार देर रात यूट्यूब पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें वे सफदरजंग अस्पताल से बाहर जाने को लेकर सुरक्षाकर्मी से बहस करते दिख रहे हैं. वीडियो में वांगचुक कहते सुनाई दे रहे हैं कि या तो उन्हें गिरफ्तार किया जाए या अस्पताल से जाने दिया जाए.
वहीं सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह वीडियो 21 जुलाई को उच्च न्यायालय का लिखित आदेश मिलने से पहले रिकॉर्ड किया गया था. उस समय वांगचुक मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर अस्पताल से जाने पर जोर दे रहे थे. अस्पताल के अनुसार, वीडियो अस्पताल के भीतर उस क्षेत्र में बनाया गया जहां रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं थी.
कोर्ट के आदेश के बाद शिफ्ट
दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर 21 जुलाई को वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल ले जाया गया. दिल्ली पुलिस ने 18 जुलाई को उन्हें जंतर-मंतर से जबरन सफदरजंग अस्पताल भर्ती कराया था. वांगचुक 28 जून से NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आमरण अनशन पर थे.
अनशन समाप्त, मिले आश्वासन
गुरुवार देर रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो और केंद्रीय मंत्रियों जे.पी. नड्डा व जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया. उन्होंने परीक्षा प्रणाली में सुधार और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा पर सरकार व सांसदों से मिले आश्वासन के बाद यह फैसला लिया.
वीडियो में क्या बोले वांगचुक?
वीडियो में वांगचुक कहते हैं, “आप मुझे परेशान कर रहे हैं… अगर तनाव के कारण मेरी मौत हो गई तो इसकी जिम्मेदारी आपकी होगी.” उन्होंने आगे कहा, “अगर गिरफ्तार करना है तो कर लीजिए, लेकिन मैं यहां से जा रहा हूं.”
अस्पताल का आधिकारिक बयान
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि उच्च न्यायालय का लिखित आदेश मिलते ही शाम 6:40 बजे वांगचुक को मेदांता अस्पताल की टीम को सौंप दिया गया था. प्रशासन ने वीडियो के समय और संदर्भ को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया.
जंतर-मंतर पर हिंसा करने पहुंचे थे 2,500 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग, FRS से हुई पहचान






















