Gen-Z की सोच को समझना होगा... दिल्ली BJP नेताओं का संदेश
Delhi News: राजीव बब्बर ने कहा कि Gen-Z ने पेपर लीक के पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी. सरकार पहले ही संवेदनशील थी लेकिन युवाओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया गया.

पेपर लीक विवाद के बाद सामने आए Gen-Z आंदोलन को लेकर दिल्ली बीजेपी के नेताओं ने नई पीढ़ी की सोच, उनकी अपेक्षाओं और सरकार के रवैये पर विस्तार से अपनी बात रखी. पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव बब्बर और मीडिया प्रमुख प्रवीण शंकर कपूर का कहना है कि आज का युवा अपनी बात खुलकर रखना चाहता है. सरकार ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए कई बड़े फैसले लिए, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि आंदोलन लोकतांत्रिक दायरे में रहे और युवा राजनीतिक एवं आपराधिक तत्वों से सतर्क रहें.
दिल्ली बीजेपी के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव बब्बर ने कहा कि Gen-Z ने पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार से अधिक सख्त कार्रवाई की मांग की थी. उनका कहना है कि सरकार पहले से ही इस मामले को लेकर संवेदनशील थी, लेकिन युवाओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया गया और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार शुरू किए गए.
उन्होंने कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए विशेष कानून बनाया गया, जिसमें 3 से 10 साल तक की सजा और 1 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा अगले दो वर्षों में परीक्षा प्रणाली को डिजिटल बनाने, परीक्षा केंद्रों और ट्रांसपोर्टेशन की निगरानी के लिए स्पेशल टास्क फोर्स लगाने, फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने और नंदन जी की अध्यक्षता में परीक्षा प्रणाली की समीक्षा के लिए समिति गठित करने जैसे कदम उठाए गए हैं.
आज का युवा सिर्फ विरोध नहीं करता, समाधान भी चाहता है
राजीव बब्बर ने कहा कि पेपर लीक के बाद महज 27 दिनों के भीतर दोबारा परीक्षा कराई गई और करीब 11.5 लाख छात्र सफल हुए. उनके मुताबिक, यह दिखाता है कि सरकार ने पूरे मामले को संवेदनशीलता के साथ संभाला. उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी अनुभव में भले कम हो, लेकिन यदि उसकी मांग उचित हो तो उसे स्वीकार करना चाहिए. यही लोकतंत्र की ताकत है और सरकार ने उसी भावना के साथ युवाओं की बात सुनी.
जोश जरूरी है, लेकिन अनुभव और सतर्कता भी उतनी ही जरूरी
राजीव बब्बर ने कहा कि आंदोलन में बड़ी संख्या में ईमानदारी से अपनी बात रखने वाले छात्र शामिल थे. हालांकि उनका आरोप है कि बाद में कुछ गैर-गंभीर, आपराधिक और राजनीतिक तत्व भी आंदोलन में शामिल हो गए, जिन्होंने उसकी दिशा बदलने की कोशिश की.
उन्होंने कहा कि कई छात्रों ने यह सोचकर विपक्ष को मंच दिया कि उनकी आवाज मजबूत होगी, लेकिन युवाओं को यह भी समझना होगा कि किसी भी आंदोलन को अपने मूल उद्देश्य से भटकने नहीं देना चाहिए.
लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं
बब्बर ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, चाहे वह सरकार के पक्ष में हो या विरोध में. लेकिन यदि किसी प्रदर्शन में आपराधिक तत्व शामिल होने की आशंका हो तो सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है.
उन्होंने कहा कि संसद जैसी संवेदनशील जगहों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. ऐसे में सरकार ने प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने का अवसर भी दिया और सुरक्षा व्यवस्था भी बनाए रखी. उनके अनुसार, दोनों फैसले परिस्थितियों के अनुरूप सही थे.
हिंसा करने वालों पर कार्रवाई तय, छात्रों से संवाद जारी रहेगा
राजीव बब्बर ने कहा कि यदि किसी ने आंदोलन की आड़ में तोड़फोड़ की, पुलिसकर्मियों पर हमला किया या हिंसा फैलाई है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होना तय है. ऐसे लोगों ने न तो छात्रों का हित किया और न ही देश का. उन्होंने यह भी कहा कि यदि कुछ छात्र अब भी असंतुष्ट हैं तो उन्हें सरकार से सीधे संवाद करना चाहिए, क्योंकि सरकार अपने वादों को लागू कर रही है.
प्रधानमंत्री और Gen-Z के बीच संवाद का नया मॉडल
राजीव बब्बर का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार नई पीढ़ी से संवाद कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री की रील को 392 मिलियन व्यू मिलना इस बात का संकेत है कि Gen-Z उनसे जुड़ाव महसूस करती है. उनके अनुसार, प्रधानमंत्री युवाओं की भावनाओं को समझते हैं और हर पीढ़ी के बीच संवाद का अंतर कम करने का प्रयास कर रहे हैं.
Gen-Z का मतलब सिर्फ नई पीढ़ी नहीं, नई सोच भी है : प्रवीण शंकर कपूर
दिल्ली बीजेपी के मीडिया प्रमुख एवं वरिष्ठ प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि Gen-Z केवल एक नाम नहीं, बल्कि देश की युवा सोच का प्रतिनिधित्व करती है. उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा युवाओं को नेतृत्व में आगे बढ़ाया है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 45 वर्षीय नितिन नवीन को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. दिल्ली की मुख्यमंत्री स्वयं पूर्व DUSU अध्यक्ष रही हैं, जबकि मंत्रिमंडल में भी पूर्व छात्र नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा भाजपा ने युवा मोर्चा की आयु सीमा 40 वर्ष से घटाकर 35 वर्ष कर दी है, ताकि अधिक युवाओं को नेतृत्व का अवसर मिले.
नई पीढ़ी से संवाद का तरीका बदल चुका है
प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि इस आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज की पीढ़ी से संवाद करने की शैली बदलनी होगी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इंस्टाग्राम के माध्यम से युवाओं से संवाद किया और कुछ ही घंटों में पूरे मामले का समाधान सामने आया. उनके अनुसार, भाजपा युवाओं की अपेक्षाओं और बदलती सोच को समझती है तथा भविष्य में भी संवाद की इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी.
आंदोलन युवाओं का था, लेकिन बाद में दूसरे तत्व भी जुड़े
कपूर ने कहा कि आंदोलन की शुरुआत युवाओं ने की थी, हालांकि बाद में कुछ राजनीतिक और आपराधिक तत्व भी इसमें शामिल हो गए. उन्होंने दावा किया कि दिल्ली पुलिस की फेस रिकग्निशन प्रणाली के जरिए 2,500 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है.
उन्होंने कहा कि संसद की ओर इतनी बड़ी भीड़ का बढ़ना उचित नहीं था. यदि प्रतिनिधिमंडल के जरिए सरकार से बातचीत होती तो समाधान का रास्ता अधिक आसान हो सकता था. उनके अनुसार, सरकार ने अंततः युवाओं की मांगों पर निर्णय लेकर सकारात्मक संदेश दिया.
परिवारों को भी समझनी होगी Gen-Z की मानसिकता
प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि पिछले 27-28 दिनों की घटनाओं ने परिवारों और समाज के सामने भी नई चुनौती रखी है. उनका कहना है कि अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना होगा, उनकी सोच को समझना होगा और उनकी अभिव्यक्ति की शैली पर भी सकारात्मक मार्गदर्शन देना होगा.
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी पहले से अधिक जागरूक है, लेकिन जागरूकता के साथ जिम्मेदारी और शालीनता भी उतनी ही आवश्यक है. समाज को Gen-Z की ऊर्जा और उनकी अपेक्षाओं को समझते हुए सही दिशा देने की जरूरत है.
























