दिल्ली के पूर्व CM अरविंद केजरीवाल को कोर्ट से बड़ी राहत, एक्साइज पॉलिसी से जुड़ा मामला
Arvind Kejriwal News: ईडी ने आरोप लगाया था कि अरविंद केजरीवाल ने नंवबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच चार समन की अनदेखी की.

दिल्ली रॉउज एवन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय के समन की कथित अवहेलना से जुड़े मामलों में बरी कर दिया है. यह मामला शराब नीति से जुड़ा हुआ था. राउज एवेन्यू कोर्ट के एडिशनल ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने यह फैसला सुनाया. जांच एजेसी ईडी ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ यह कहते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था कि उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच में शामिल होने के लिए भेजे गए समनों का जानबूझकर पालन नहीं किया.
क्या था पूरा मामला?
ED का आरोप था कि केजरीवाल ने नवंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच जारी चार समनों की अनदेखी की. ये समन 2 नवंबर 2023, 21 दिसंबर 2023, 3 जनवरी 2024 और 18 जनवरी 2024 को जारी किए गए थे. केजरीवाल ने इन सभी समनों को अवैध बताते हुए जांच में शामिल होने से इनकार किया था. इसी आधार पर ED ने उनके खिलाफ दो आपराधिक शिकायतें दर्ज कराई थीं.
इस मामले में गिरफ्तारी और जमानत का घटनाक्रम
21 मार्च 2024 को प्रवर्तन निदेशालय ने अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया था. इसके बाद 20 जून 2024 को राउज एवेन्यू कोर्ट के वेकेशन जज नियाय बिंदु ने उन्हें जमानत दे दी थी. हालांकि ED की चुनौती पर दिल्ली हाईकोर्ट ने इस जमानत आदेश पर रोक लगा दी थी. जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी और उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को बड़े बेंच के पास भेज दिया था.
जांच एजेसी ED का इस मामले में आरोप क्या थे?
जांच एजेसी ED का दावा था कि दिल्ली की नई आबकारी नीति को एक साजिश के तहत लागू किया गया, जिससे कुछ निजी कंपनियों को थोक शराब कारोबार में 12 प्रतिशत का मुनाफा पहुंचाया गया. जांच एजेंसी के मुताबिक यह शर्त मंत्रियों के समूह की बैठकों के मिनट्स में दर्ज नहीं थी. ED ने यह भी आरोप लगाया कि इस कथित साजिश का तालमेल विजय नायर और अन्य लोगों ने साउथ ग्रुप के साथ मिलकर किया. जांच एजेंसी का कहना था कि विजय नायर, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की ओर से काम कर रहे थे.
























