Delhi News: तरुण हत्याकांड में नाबालिग बताकर आरोपी ने की थी बचने की कोशिश, अब MCD रिकॉर्ड से खुला राज
Delhi News In Hindi: दिल्ली के तरुण बुतोलिया हत्याकांड में आरोपी की उम्र को लेकर नया खुलासा हुआ है. पीड़िता पक्ष ने दावा किया है कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों से खुद को नाबालिग बताया था.

दिल्ली के बहुचर्चित तरुण बुतोलिया हत्याकांड में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने केस की दिशा बदलने की संभावना पैदा कर दी है. अब तक नाबालिग मानकर कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे एक आरोपी की उम्र को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. पीड़ित पक्ष का आरोप है कि आरोपी ने गलत दस्तावेजों के जरिए खुद को नाबालिग दिखाया, जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड उसे बालिग साबित कर रहे हैं. मामले में अदालत के सामने नए दस्तावेज पेश किए गए हैं, जिन पर अगली सुनवाई में महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है.
मामले में शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपी ने अपनी वास्तविक उम्र छिपाने के लिए स्कूल का ऐसा प्रमाणपत्र पेश किया था, जिसमें जन्मतिथि कथित तौर पर गलत दर्ज थी. इसी आधार पर उसे नाबालिग मानने की दलील दी गई थी। अब इस दावे को चुनौती देते हुए दूसरे दस्तावेज सामने लाए गए हैं.
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नगर निगम के रिकॉर्ड से सामने आई जन्मतिथि
पीड़ित पक्ष के वकील सुमित चौहान ने अदालत में नगर निगम द्वारा जारी सत्यापित जन्म प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया है. इस दस्तावेज में आरोपी की जन्मतिथि 7 अक्टूबर 2007 दर्ज बताई गई है. शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि इस रिकॉर्ड के आधार पर आरोपी कानूनी रूप से बालिग की श्रेणी में आता है और उसे जुवेनाइल मानने का कोई आधार नहीं बचता.
सूत्रों के अनुसार पुलिस ने प्रस्तुत जन्म प्रमाणपत्र की जांच की और संबंधित रिकॉर्ड को सही पाया. जांच के बाद उम्र से जुड़े दावे को मजबूती मिली है. यही वजह है कि अब आरोपी की कानूनी स्थिति को लेकर अदालत में नई बहस शुरू हो गई है.
सेशंस कोर्ट पहुंचा मामला, तिहाड़ भेजने की मांग
उम्र संबंधी दस्तावेजों के आधार पर शिकायतकर्ता पक्ष ने सेशंस कोर्ट में आवेदन दाखिल किया है. याचिका में आरोपी को बालिग घोषित करने और उसे जुवेनाइल होम से तिहाड़ जेल स्थानांतरित करने की मांग की गई है. यदि अदालत इस मांग को स्वीकार कर लेती है तो आरोपी के खिलाफ वयस्क अपराधी के तौर पर मुकदमा चलाया जा सकता है.
सुनवाई के दौरान अदालत के रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि आरोपी के नाना बाबू खान को उसकी कस्टडी सौंपने के लिए उपयुक्त नहीं माना गया. रिकॉर्ड के अनुसार आपराधिक मामलों से जुड़े होने के कारण उन्हें कानूनी अभिभावक के रूप में स्वीकार नहीं किया गया. इस तथ्य ने मामले में एक और नया पहलू जोड़ दिया है.
पहले भी जांच प्रक्रिया पर उठ चुके हैं गंभीर सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब तरुण हत्याकांड की जांच चर्चा में आई हो. इससे पहले भी जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली अदालत के निशाने पर आ चुकी है. गलत पहचान के आधार पर एक व्यक्ति को आरोपी मानकर हिरासत में लेने के मामले में अदालत ने पुलिस को फटकार लगाई थी.
सीसीटीवी फुटेज ने बदल दी थी जांच की तस्वीर
जांच के शुरुआती चरण में इमरान नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था. बाद में सामने आए सीसीटीवी फुटेज से स्पष्ट हुआ कि वारदात में शामिल व्यक्ति कोई और था. इसके बावजूद एक निर्दोष को लंबे समय तक हिरासत में रखा गया. मामले की सुनवाई कर रही अदालत ने उसकी तत्काल रिहाई के आदेश दिए थे और संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए थे.
आज होने वाली सुनवाई पर टिकीं सबकी निगाहें
अब पूरे मामले की निगाहें अगली आज 6 जून पर होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं. अदालत दस्तावेजों की वैधता, आरोपी की वास्तविक उम्र और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी. यदि उम्र संबंधी दावा सही साबित होता है तो यह घटनाक्रम तरुण हत्याकांड की सुनवाई और आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई पर बड़ा असर डाल सकता है.
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