Chhattisgarh: सीआरपीएफ जवान के बच्चे को डॉक्टर ने दी नई जिंदगी, 72 घंटे के निगरानी के बाद बची जान
Chhattisgarh News: बस्तर के डिमरापाल जिला अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने एक ढाई साल के मासूम को नई जिंदगी दी है. बच्चों के दिमाग में बुखार चढ़ जाने की वजह से उसकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी.

Bastar News: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित स्वर्गीय महेंद्र कर्मा जिला अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने एक ढाई साल के मासूम को नई जिंदगी दी है. लगातार 72 घंटों की निगरानी के बाद आखिरकार डॉक्टरों ने मासूम की जिंदगी बचा ली. दरअसल बच्चे की दिमाग में बुखार चढ़ जाने की वजह से उसे काफी झटके आ रहे थे. शुरुआत में करणपुर सीआरपीएफ कैंप में बच्चे का इलाज शुरू किया गया, लेकिन राहत नहीं मिली जिसके बाद परिजनों ने बच्चों को डिमरापाल जिला अस्पताल लाया और यहां शिशु विशेषज्ञ अनुरूप साहू और जूनियर डॉक्टर के साथ स्टाफ नर्स की संयुक्त टीम के द्वारा बेहतर इलाज के बाद अब मासूम पूरी तरह से स्वस्थ हो चुका है. सीआरपीएफ जवान का परिवार अस्पताल स्टाफ का धन्यवाद किया है. डॉक्टरों के मुताबिक दिमाग में बुखार चढ़ जाने के बाद मरीज की स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है लेकिन ऐसे गंभीर मामले में भी डॉक्टरों ने हार नहीं मानी और 3 दिन तक लगातार मरीज का ध्यान रखा. इसी का नतीजा रहा कि वेंटिलेटर में रहने के बाद भी बच्चे के दिमाग से बुखार उतर चुका है और अब आने वाले 2 से 3 दिन में उसे डिस्चार्ज भी कर दिया जाएगा.
डॉक्टरों के 72 घंटे के निगरानी से बची बच्चे की जान
डीमरापाल अस्पताल अधीक्षक व शिशु रोग विशेषज्ञ अनुरूप साहू ने बताया कि जगदलपुर के सीआरपीएफ कैंप करणपुर में रहने वाले जवान रविंद्र पपॉल के ढाई साल के बेटे शौर्य को कुछ दिन पहले तेज बुखार होने के चलते उसे कैंप के ही अस्पताल में भर्ती कराया गया था. यहां इंजेक्शन लगाने के बाद भी बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ और तबीयत बिगड़ती चली गई. लगातार झटके आने के चलते उसे डीमरापाल जिला अस्पताल में लाकर भर्ती किया गया. बच्चे को भर्ती करने के बाद पता लगा कि उसके दिमाग में बुखार चढ़ गया है, जिसकी वजह से बच्चे की हालत तेजी से बिगड़ रही थी. बच्चे की हालत को देखते हुए उसे वेंटिलेटर में 24 घंटे के लिए रखा गया, इस बीच बेहोशी के साथ ही उसकी सांस भी रुक रही थी, फेफड़े ने भी काम करना बंद कर दिया था, लेकिन डॉक्टरों की टीम के द्वारा लगातार जांच के साथ ही उसे मॉनिटरिंग करने के चलते तीन दिन बाद अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ हो गया है.
अस्पताल अधीक्षक अनूरुप साहू ने बताया कि बच्चों को नई जिंदगी देने में एचओडी डॉ. डीआर मंडावी, डॉ. पुष्पराज, डॉ. मधुराधा, डॉ. बबिता, डॉक्टर पालाराम मीणा, डॉ अंबिका, डॉ. हर्ष बलदेव, और अन्य स्टाफ नर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही, उन्होंने बताया कि अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ हो गया है और आने वाले एक-दो दिन में उसे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा. वहीं सीआरपीएफ के जवान ने बेहद ही गंभीर हालत से जूझ रहे उनके ढाई साल के बेटे को पूरी तरह से स्वस्थ करने से डॉक्टरों की टीम का धन्यवाद किया है.
Source: IOCL






















