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समस्तीपुर: घर लौटे प्रवासियों के लिए मोती की खेती बना सुनहरा अवसर, राजकुमार देंगे प्रशिक्षण

राजकुमार बताते हैं कि एक मोती के उत्पादन से लेकर बाजार तक पहुंचने में करीब 40 रुपए का खर्च आता है. वही मोती स्थानीय बाजार में 300 से लेकर 400 रुपए तक में बेची जाती है.

समस्तीपुर: कोरोना काल में सब कुछ छोड़ कर घर लौटे प्रवासी मजदूरों के लिए मोती की खेती एक सुनहरे अवसर के रूप में सामने आई है. जिला के दलसिंहसराय वार्ड संख्या दो निवासी राजकुमार शर्मा ने 2017 में जब अकाउंटेंट की नौकरी छोड़ मोती की खेती शुरू की थी तो लोग उनका मजाक उड़ाते थे. लेकिन कुछ नया करने की सोच लेकर उसने भुवनेश्वर और जयपुर में इसका प्रशिक्षण प्राप्त किया. आज वो एक बड़े से पानी के टैंक में सीप डालकर मोती की खेती करते हैं. साथ ही इसका प्रशिक्षण भी दे रहे हैं.

बाहरी बाजारों में होती है बिक्री

कोरोना काल में अब वह प्रवासियों को प्रशिक्षित करना शुरू करेंगे. मिली जानकारी अनुसार 12 प्रवासियों ने प्रशिक्षण के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है ताकि वह अपने गांव में ही रहकर स्वरोजगार कर सकें. बता दें कि मोतियों की बिक्री स्थानीय बाजार सहित बाहर के बाजार में भी होती है.

कई लोगों ने कराया है रेजिस्ट्रेशन

इस संबंध में राजकुमार बताते हैं कि उन्होंने अपने दोस्त प्रणव कुमार के साथ मिलकर बुलाकीपुर गांव में पर्ल फाउंडेशन नामक से प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की है, जहां  जिला के साथ-साथ मुजफ्फरपुर, बेगुसराय, पटना सहित दूसरे प्रदेशों से आए प्रवासी मजदूरों ने मोती की खेती के प्रशिक्षण को लेकर रजिस्ट्रेशन कराया है.

स्वरोजगार उपलब्ध कराने को हैं तत्तपर

कोरोना काल में अन्य प्रदेशों से लौटे लोगों को प्रशिक्षण देकर घर पर ही लाखों रुपये की आमदनी कराने को लेकर पर्ल फाउंडेशन के संस्थापक बताते हैं कि कोरोना ने लोगों की जिंदगी पूरी तरह बदल कर रख दी है. सबसे से ज्यादा परेशानी प्रवासी मजदूरों को हुई है. ऐसे में प्रवासियों को मोती की खेती का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार उपलब्ध कराने को लेकर हम तप्तर हैं. लॉकडाउन के दौरान मिली कृषि में छूट को लेकर लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है. वहीं कई प्रवासियों ने रजिस्ट्रेशन भी कराया है.

कम लागत में है ज्यादा मुनाफा

राजकुमार बताते है कि एक मोती के उत्पादन से लेकर बाजार तक पहुंचने में करीब 40 रुपए का खर्च आता है. वही मोती स्थानीय बाजार में 300 से लेकर 400 रुपए तक में बेची जाती है. मोती की खेती में करीब 12 से 18 माह का समय लगता है. उन्होंने बताया कि मोती के तीन किस्मों की खेती वह करते हैं, इसमें केवीटी, गोनट और मेंटलटीसू मोती की खेती शामिल है.

उन्होंने बताया कि एक सीप लगभग 10 से 15 रुपए की आती है. बाजार में 1 से 20 मिमी सीप के मोती का दाम करीब 300  से लेकर 400 रुपये होता है. आजकल डिजायनर मोतियों को खासा पसन्द किया जा रहा है. जिनकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. सीप से मोती निकाल लेने के बाद सीप को भी बाजार में बेंचा जा सकता है. सीप से कई सजावटी सामान तैयार किये जाते है. जैसे कि सिलिंग झूमर, आर्कषक झालर, गुलदस्ते आदि.

जानें मोती की खेती का तरीका

राजकुमार और प्रणव बताते हैं कि मोती की खेती के लिए तैयार इन्फ्रास्ट्रक्चर सीमेंटेड पानी टैंक सहित लगभग 40 हजार रुपए तक का खर्च आता है. मोती की खेती के लिए सीप जिसे ओयस्टर भी कहा जाता है, उसमें न्यूक्लियस डाला जाता है. इस सीप को जाल के बैग पर लगाते हैं और डंडे के सहारे खड़ा कर देते हैं. इसके बाद इसे पानी के टैंक या तालाब में 3-4 फुट गहरे पानी में लगभग 12 से 18 महीने तक छोड़ा जाता है, जिसके बाद डिजाइनर मोती के साथ गोल मोती बनकर तैयार हो जाती है.

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