नीतीश कुमार के दिल्ली जाने से पहले ही JDU में फूट! सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता पर संकट
Nitish Kumar JDU Conflict: जदयू ने बांका सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए लोकसभा स्पीकर को उनकी सदस्यता खत्म करने का नोटिस सौंपा. पार्टी ने उन पर विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया है.

बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) के अंदर मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं. सूत्रों के मुताबिक, जदयू संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामात ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नोटिस सौंपा है. इस नोटिस में बांका से जदयू सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता समाप्त (डिसक्वालिफाई) करने की मांग की गई है. पार्टी का आरोप है कि गिरधारी यादव लगातार पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर बयानबाजी और गतिविधियां कर रहे थे.
पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप
गिरधारी यादव पर लंबे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया जा रहा था. उन्होंने कई ऐसे मुद्दों पर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए, जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा. खासकर SIR जैसे मुद्दे पर उनकी बयानबाजी को पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया. इसके अलावा, वे कई बार बिहार सरकार की नीतियों पर भी खुलकर आलोचना कर चुके हैं.
पहले भी दे चुके हैं असहमति के संकेत
गिरधारी यादव का पार्टी से टकराव कोई नया मामला नहीं है. वे पहले भी कई मौकों पर जदयू के आधिकारिक रुख से अलग राय रखते दिखे हैं. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा रही है कि वे धीरे-धीरे पार्टी से दूरी बना रहे थे, जिसका असर अब साफ तौर पर दिखने लगा है.
गिरधारी यादव की प्रतिक्रिया
सदस्यता पर आई संकट के बाद सांसद गिरधारी यादव की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा, "जब से हम नीतीश कुमार के साथ हैं, पार्टी विरोधी काम नहीं किया है. जब स्पीकर का समन आएगा, तो हम जवाब देंगे."
बेटे के आरजेडी में जाने से बढ़ी सियासी हलचल
मामले को और ज्यादा तूल तब मिला जब गिरधारी यादव के बेटे चाणक्य यादव बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजद में शामिल हो गए थे. उन्होंने बेलहर सीट से चुनाव भी लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इस घटनाक्रम के बाद से ही गिरधारी यादव की पार्टी के प्रति निष्ठा पर सवाल उठने लगे थे.
अब सबकी नजर लोकसभा स्पीकर के फैसले पर टिकी है. अगर नोटिस पर कार्रवाई होती है, तो यह जदयू के भीतर एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जाएगा. वहीं, विपक्षी दल भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इससे बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा हो सकती है.
Source: IOCL



























