भूदेव चौधरी और उनकी पत्नी को कांग्रेस ने किया सम्मानित, राहुल गांधी के मंच पर नहीं मिली थी 'एंट्री'
Bihar Politics: जगलाल चौधरी की जयंती पर पटना में बुधवार को कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. इसमें राहुल गांधी पहुंचे थे. इस कार्यक्रम में जगलाल चौधरी के बेटे भूदेव चौधरी को एंट्री नहीं मिली थी.

Bihar Politics: बिहार में कांग्रेस एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कोई चुनावी रणनीति नहीं बल्कि सम्मान से जुड़ा एक विवाद है. बीते बुधवार (05 फरवरी) को पटना में जगलाल चौधरी की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में उनके पुत्र भूदेव चौधरी को मंच पर जगह नहीं मिली तो विवाद शुरू हो गया था जिसे अब शांत करने की कोशिश की गई है. कांग्रेस ने गुरुवार (06 फरवरी) को भूदेव चौधरी और उनकी पत्नी को सम्मानित किया है.
डैमेज कंट्रोल या सम्मान की भरपाई?
दरअसल, बीते बुधवार को राहुल गांधी के पटना आगमन के दौरान हुए इस घटनाक्रम ने कांग्रेस के लिए असहज वाली स्थिति पैदा कर दी थी. भूदेव चौधरी की नाराजगी और उनकी मीडिया के सामने भावुक प्रतिक्रिया के बाद मामला तूल पकड़ने लगा. हालांकि, कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया आई. बिहार कांग्रेस के प्रभारी मोहन प्रकाश और अन्य नेताओं ने भूदेव चौधरी को सम्मानित कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया. इससे सवाल उठ रहा है कि ये डैमेज कंट्रोल है या सम्मान की भरपाई की कोशिश की गई है?
भूदेव चौधरी भी अब नरम नजर आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि आयोजन कांग्रेस पार्टी की नहीं बल्कि एक अन्य संगठन की ओर से किया गया था. इसमें किसी के अपमान का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने राहुल गांधी के आगमन को एक सकारात्मक पहल बताया और कांग्रेस को धन्यवाद भी दिया.
इसी साल चुनाव… इसलिए कांग्रेस नहीं चाहती कोई विवाद
बता दें कि 2025 का चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद अहम है. बिहार में महागठबंधन के सहयोगी दलों के बीच संतुलन साधना और अपने संगठन को मजबूत करना पार्टी की प्राथमिकता है. ऐसे में कांग्रेस किसी भी प्रकार का विवाद नहीं चाहती. भूदेव चौधरी के सम्मान कार्यक्रम को भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है. पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह अपने दिग्गज नेताओं के परिवारों को उचित सम्मान देती है और यदि कोई गलती होती भी है तो उसे सुधारने के लिए तत्पर रहती है.
अब देखना यह होगा कि क्या यह सम्मान भविष्य में कांग्रेस और चौधरी परिवार के रिश्तों को और मजबूत करेगा? या यह केवल चुनावी रणनीति के तहत उठाया गया एक कदम साबित होगा. फिलहाल कांग्रेस ने अपनी गलती सुधार ली है, लेकिन बिहार की राजनीति में सम्मान और उपेक्षा के ऐसे मसले अक्सर चर्चा में बने रहते हैं.
Source: IOCL






















