Bihar Elections: चिराग पासवान को बड़ा झटका, पिता रामविलास के क्षेत्र में चाचा पारस ने लगाई सेंध, 38 नेता RLJP में शामिल
Pashupati Paras: पशुपति पारस ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि चुनाव आते-आते चिराग पासवान की पार्टी के आधे से ज्यादा नेता हमारी पार्टी में शामिल होंगे. कई बड़े नेता हैं, जो हमारे संपर्क में हैं.

चुनावी साल में चाचा पशुपति पारस ने भतीजे चिराग पासवान को बड़ा झटका दे दिया है. राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी ने मंगलवार को अपने कुनबे को मजबूत किया है. इसके साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने चिराग की पार्टी लोजपा (रामविलास) में बड़ी सेंधमारी कर दी है.
शिवराज यादव आरएलजेपी में शामिल
दरअसल रामविलास पासवान के गृह जिला खगड़िया से लोजपा (रामविलास) के जिला अध्यक्ष रहे शिवराज यादव ने राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है. शिवराज यादव के अलावा जिले के कई पदों पर पदस्थापित कुल 37 अन्य पदाधिकारियों ने पशुपति पारस में अपनी आस्था दिखाई है. प्रखंड से लेकर जिला तक बड़ी संख्या में लोजपा (रामविलास) को छोड़ने वाले नेताओं ने राष्ट्रीय लोक जन शक्ति पार्टी का दामन थाम लिया है.
सभी नेताओं को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पशुपति पारस ने पटना के पार्टी कार्यालय में सदस्यता दिलाई. राष्ट्रीय लोकजन शक्ति पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं ने लगभग एक हफ्ते पहले चिराग पासवान की पार्टी से नाता तोड़ कर इस्तीफा दिया था. जिनन प्रदेश पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया था, उनमें शिवराज यादव के अलावा रतन पासवान जो कि प्रदेश महासचिव थे, खगरिया के प्रखंड अध्यक्ष रोशन पासवान, खगड़िया जिला के मानसिक प्रखंड के अध्यक्ष आकाश पासवान और चौथम प्रखंड के अध्यक्ष मंटू पासवान शामिल हैं.
इस मौके पर जहां चिराग के पूर्व जिला अध्यक्ष शिवराज यादव ने कहा कि चिराग पासवान की पार्टी में सिस्टम नाम की कोई चीज नहीं है. कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जाता है. वहीं पशुपति पारस ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि आज खगड़िया जिले से 200 से ज्यादा कार्यकर्ता हमारी पार्टी में शामिल हुए हैं और चुनाव आते-आते चिराग पासवान की पार्टी के आधे से ज्यादा नेता हमारी पार्टी में शामिल होंगे. कई बड़े नेता हैं, जो हमारे संपर्क में हैं.
अलौली से पहली बार चुनाव जीते थे रामविलास
बता दें कि खगड़िया जिला रामविलास पासवान का पैतृक जिला है. इसी जिले में अलौली विधानसभा क्षेत्र है, जहां पर दोनों चाचा भतीजा दावा कर रहे हैं. पहली बार रामविलास पासवान इसी सीट से चुनाव जीते थे. उसके बाद लगातार पशुपति पारस इस क्षेत्र से चुनाव जीतते रहे हैं. इस बार दोनों चाचा-भतीजा आर-पार के मूड में हैं. दोनों ही पार्टी अपने प्रत्याशी उतारने का दवा कर रहे हैं.
इसी को लेकर कुछ दिनों पहले पारिवारिक विवाद का मामला भी सामने आया था. अब चिराग की पार्टी के कई बड़े नेताओं ने पशुपति पारस का दामन थाम लिया है तो अब ऐसा माना जा सकता है कि पशुपति पारस अपने गृह जिले में मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं.
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