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Ice Melting In Space: अंतरिक्ष में बर्फ को पिघलने में कितना लगेगा समय, जानें पृथ्वी से कितनी जल्दी होगा यह?

Ice Melting In Space: पृथ्वी पर बर्फ थोड़ी सी गर्मी में भी पिघलने लगती है. लेकिन अंतरिक्ष में यह प्रक्रिया काफी अलग होती है. आइए जानते हैं कैसे.

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  • अंतरिक्ष में वायुमंडलीय दबाव की कमी से बर्फ सीधे गैस बनती है।
  • सीधी धूप में बर्फ तेजी से भाप बनकर गायब हो जाती है।
  • गहरे अंतरिक्ष की ठंड में बर्फ लाखों साल तक जमी रह सकती है।
  • अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में बर्फ सामान्य से कई गुना धीरे पिघलती है।

Ice Melting In Space: अंतरिक्ष में बर्फ का व्यवहार पृथ्वी पर हमारे देखे गए व्यवहार से काफी अलग होता है. पृथ्वी पर बर्फ धीरे-धीरे पिघल कर तरल पानी में बदल जाती है और फिर भाप बनकर उड़ जाती है. हालांकि बाहरी अंतरिक्ष में वायुमंडलीय दबाव की गैर मौजूदगी की वजह से यह प्रक्रिया काफी ज्यादा अलग हो जाती है. अंतरिक्ष में बर्फ आमतौर पर पिघल कर पानी नहीं बनती इसके बजाय यह सीधे ठोस से गैस में बदल जाती है. इस प्रक्रिया को सब्लीमेशन कहा जाता है.

अंतरिक्ष में बर्फ का पिघलना 

अंतरिक्ष में बर्फ के अलग तरह से व्यवहार करने के पीछे की मुख्य वजह वायुमंडलीय दबाव की कमी है. पृथ्वी पर हवा का दबाव पानी को तरल रूप में रहने देता है. इस वजह से बर्फ भाप बनने से पहले पिघलती है. लेकिन अंतरिक्ष के वैक्यूम में लगभग कोई भी दबाव नहीं होता. इसी वजह से बर्फ तरल रूप में नहीं रह पाती. जब सूरज की रोशनी बर्फ को गर्म करती है तो उसके अणु सीधे भाप बनकर उड़ जाते हैं. ठोस से गैस में बदलने की इस धीमी प्रक्रिया को ही सब्लीमेशन कहा जाता है.

सीधी धूप में बर्फ तेजी से गायब हो सकती है 

यदि बर्फ का कोई छोटा सा टुकड़ा पृथ्वी की कक्षा में रखा जाए और उस पर सीधी धूप पड़े तो वह कुछ ही घंटे में पूरी तरह से गायब हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि सूरज की रेडिएशन सीधे बर्फ के अणुओं को गर्म करती है. तापमान को नियंत्रित करने या फिर इस प्रक्रिया को धीमा करने के लिए कोई वायुमंडल ना होने की वजह से सूरज की रोशनी से मिलने वाली ऊर्जा बर्फ को तेजी से सब्लीमेशन की प्रक्रिया के जरिए भाप में बदल देती है. 

लाखों सालों तक बनी रह सकती है बर्फ 

अंधेरे में इसका ठीक उल्टा प्रभाव देखने को मिलता है. गहरे अंतरिक्ष में या फिर किसी ग्रह की छाया में तापमान गिरकर लगभग - 270 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. यह परम शून्य के काफी करीब होता है. इतनी ज्यादा ठंड में बर्फ को लगभग कोई ऊर्जा नहीं मिल पाती. अब क्योंकि वहां गर्मी को एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाने के लिए हवा भी मौजूद नहीं होती इस वजह से बर्फ लाखों या अरबों सालों तक जमी रह सकती है.

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के अंदर बर्फ का पिघलना 

दिलचस्प बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के अंदर किए गए प्रयोग एक और अनोखा व्यवहार दिखाते हैं. स्टेशन में हवा का दबाव तो होता है लेकिन गुरुत्वाकर्षण काफी कम होता है. इस वजह से बर्फ पृथ्वी की तुलना में 5 से 10 गुना ज्यादा धीरे पिघल सकती है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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