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क्या उपेंद्र कुशवाहा के हटने से JDU कमजोर हो जाएगी? इस समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री को दी बड़ी चेतावनी, पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट

Upendra Kushwaha vs JDU: कयास लगाए जा रहे कि जेडीयू उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी से आउट कर देगी. कुशवाहा समाज के लोगों ने साफ कह दिया है कि उनके बिना नीतीश कुमार की पार्टी नहीं चलने वाली है.

पटना: मुख्यमंत्री की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU Bihar) में इन दिनों घमासान मचा हुआ है. पार्टी के संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) बगावती तेवर में दिख रहे हैं. कुशवाहा पार्टी में अपनी हिस्सेदारी की मांग कर रहे. उन्होंने इतना तक कह दिया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) जिस तरह से 1994 लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav)से हिस्सेदारी लिए थे वही हिस्सेदारी मुझे चाहिए. ऐसे वो पार्टी छोड़कर नहीं जाना चाहते हैं. अब सवाल है कि क्या उनके जाने से जेडीयू कमजोर हो सकती है? एबीपी की टीम ने कुशवाहा समाज के लोगों से बातचीत की और जाना कि वो नीतीश कुमार को क्या कहना चाहते हैं.

‘साल 2020 ट्रेलर था अब पिक्चर दिखने वाली है’

उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ मंत्री अशोक चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा सहित कई नेताओं के बयान आए हैं. उनका कहना हुआ कि ज्यादा दिक्कत है तो वे छोड़कर चले जाएं, लेकिन क्या उपेंद्र कुशवाहा के पार्टी छोड़कर चले जाने से पार्टी में सब कुछ ठीक रहेगा? क्या पार्टी को मजबूती मिलेगी या पार्टी कमजोर हो जाएगी? इसके लिए एबीपी न्यूज ने ग्राउंड रिपोर्ट कर कुशवाहा समाज के बहुल क्षेत्र पटना साहिब विधानसभा का जायजा लिया. कुशवाहा समाज के लोगों से जाना कि क्या उपेंद्र कुशवाहा जो हिस्सेदारी की बात कर रहे हैं वह कितना जायज है.
क्या उपेंद्र कुशवाहा के हटने से JDU कमजोर हो जाएगी? इस समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री को दी बड़ी चेतावनी, पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट

कुशवाहा समाज के लोगों ने कहा कि साल 2020 के चुनाव में कुशवाहा समाज के गुस्से का शिकार मुख्यमंत्री हो चुके हैं. कुशवाहा के कारण ही उन्हें मात्र 43 सीटें मिली हैं. साल 2020 तो ट्रेलर था, अगर नीतीश कुमार कुशवाहा को इसी तरह इग्नोर करके चलते रहे तो आगामी 2024 के लोकसभा और 2025 विधानसभा में पूरी फिल्म दिखाई जाएगी. कुशवाहा समाज का एक भी वोट जेडीयू के खाते में नहीं जाएगा.

लव कुश समीकरण नीतीश की थी ताकत

पटना साहिब के रहने वाले राकेश कुशवाहा ने बताया कि जेडीयू पार्टी में लव कुश समीकरण चल रहा था. कुशवाहा, कोइरी, कुर्मी, धानुक जातियां एकजुट हुई थी और यही नीतीश कुमार की ताकत थी. यही कारण है कि लालू प्रसाद से अलग होने के कुछ ही महीने बाद 1995 के चुनाव में उन्हें पहली बार में ही सात सीटें मिली थी, लेकिन अब नीतीश कुमार कुशवाहा समाज को इग्नोर करके चल रहे हैं. इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा. साल 2020 के चुनाव में उन्हें 10 से 15 प्रतिशत कुशवाहा लोगों ने वोट दिया था. इस बार उनको कुशवाहा का वोट पूरी तरह नहीं मिलेगा.
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उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार के बाद पार्टी के पहले हकदार

कुशवाहा समाज से आने वाले सत्येंद्र मेहता ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा और नीतीश कुमार ने एक साथ मिलकर पार्टी को खड़ा किय़ा था. जेडीयू में नीतीश कुमार के बाद उपेंद्र कुशवाहा पहले हकदार हैं, लेकिन हैरत की बात है कि नीतीश कुमार अब लास्ट समय में दूसरी पार्टी के नेता तेजस्वी यादव को संभालने की बात कर रहे हैं. क्या उनकी पार्टी में उनके बाद कोई नहीं है? उनके बाद क्या उपेंद्र कुशवाहा मुख्यमंत्री नहीं बन सकते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री स्वार्थी हो गए हैं. उपेंद्र कुशवाहा को जलील कर रहे हैं जिसे कुशवाहा समाज बर्दाश्त नहीं करेगा. इसका खामियाजा उन्हें 2024 के लोकसभा में और 2025 के विधानसभा में भी भुगतना पड़ सकता है. वह समझते हैं कि कुशवाहा समाज को बेइज्जत कर के कुशवाहा समाज का वोट ले लेंगे तो यह उनकी भूल है.

आसान नहीं होगा कुशवाहा को छोड़कर नीतीश की पार्टी चलाना

उपेंद्र कुशवाहा किस हिस्सेदारी की बात कर रहे हैं. साल 1994 में नीतीश कुमार लालू प्रसाद से अलग हुए थे और जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मिलकर अलग समता पार्टी बनाई थी. पार्टी बनाने के पहले उन्होंने कुर्मी चेतना रैली किया था जिसमें कुर्मी, कोइरी, धानुक और कुशवाहा समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. नीतीश कुमार को बड़ी ताकत मिली थी. यही कारण है कि लालू प्रसाद यादव से अलग होने के छह महीने बाद ही 1995 के विधानसभा चुनाव में उन्हें सात सीटें मिली थी.
क्या उपेंद्र कुशवाहा के हटने से JDU कमजोर हो जाएगी? इस समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री को दी बड़ी चेतावनी, पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट

तकरार का क्या होगा रिजल्ट

उपेंद्र कुशवाहा भी उसी वक्त से नीतीश कुमार के साथ थे. हालांकि बीच में उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार का साथ छोड़ दिया था. बाद में फिर वापस नीतीश कुमार के साथ जुड़े थे. साल 1995 से लगातार नीतीश का कद बढ़ता गया और हर विधानसभा चुनाव में उनके विधायकों की संख्या बढ़ती गई. साल 2005 से लगातार नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं और उनकी ताकत कुशवाहा समाज की है. नीतीश कुमार उसे अपना एक वोट बैंक मानते हैं, लेकिन जिस प्रकार से अभी उपेंद्र कुशवाहा को लेकर जेडीयू में तकरार हो रही है उससे कुशवाहा समाज नाराज दिख रहे हैं.

साल 2020 के चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा जेडीयू से अलग थे और इसका खामियाजा नीतीश कुमार को भुगतना पड़ा था. कई जगह पर कुशवाहा के 10-15% ही वोट मिल पाए थे. अगर यही हाल रहा तो नीतीश कुमार को आगामी चुनाव में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. कुल बिना कुशवाहा समाज के साथ के नीतीश की पार्टी नहीं चल सकती है. ये इस समाज के ही लोगों का कहना है.

यह भी पढ़ें- Bihar: छपरा मामले पर चिराग का फूटा गुस्सा, CM नीतीश पर बोला हमला, कहा- समाधान यात्रा में अपराध पर क्या हल करेंगे?

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