Patna News: मैथ्स टीचर केसी सिन्हा ने बताई 'शिक्षक' की असली परिभाषा, खान सर Vs रोशन आनंद विवाद पर क्या कहा?
Math Teacher KC Sinha Special Story: बिहार के वरिष्ठ गणित के शिक्षक केसी सिन्हा ने एबीपी न्यूज से बातचीत में शिक्षक की असली परिभाषा बताई, साथ ही शिक्षा जगत की सामयिकी घटनाओं पर टिप्पणी की.

बिहार में कोचिंग संस्थान का प्रचलन आज नया नहीं है. भले अभी के समय में कोचिंग के हालात बिगड़ चुके हैं. शिक्षक आमने-सामने हो लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब बिहार के शिक्षक पूजे जाते थे. कई नाम चीन और प्रसिद्ध शिक्षक थे, जिनका पूरे देश में नाम था. उनमें से एक है के सी सिन्हा जो गणित के प्रसिद्ध और नाम चिन शिक्षक रहे थे. वह पटना विश्वविद्यालय के प्रिंसिपल और बाद में कुलपति भी बने लेकिन अपने समय में वह कोचिंग संस्थान भी चलाते थे. एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत में के सी सिन्हा ने बताया कि कैसे उस समय के लोग शिक्षकों का आदर करते थे और कोटा लोग क्यों जाने लगे.
के सी सिन्हा ने बताया कि पहले शिक्षकों का प्रचार प्रसार माउथ पब्लिसिटी होती थी जो छात्र पढ़ के जाते थे और सफल होते थे वही प्रचार प्रसार करते थे. अब तो शिक्षकों को बताना पड़ता है कि हम भी शिक्षक हैं और फेसबुक यूट्यूब पर वह अपना चेहरा दिखाते हैं.
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'कोटा ने बिहार को कॉपी और आगे हो गया'
उन्होंने बताया कि कोटा का जन्म तो 2003 में हुआ था. बिहार में लॉ एंड ऑर्डर की समस्या आई थी जिसकी वजह से बिहार छोड़कर लोग कोटा जाने लगे. कहा जाए तो कोटा ने बिहार का कॉपी किया और वह आगे उभर गए और बिहार पीछे रह गया. 2002 के पहले बिहार में शिक्षा की व्यवस्था बहुत अच्छी थी. बच्चे पटना में ही रहकर पढ़ाई करते थे और अच्छे नंबर लाते थे. उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 में आईआईटी में रैंक 1 से 50 तक में 9 बच्चे सिर्फ बिहार के थे.
उन्होंने बताया कि हम जब 1973 में एम.एस.सी में थे तो उस वक्त से बच्चों को पढ़ा रहे हैं. बाद में पटना यूनिवर्सिटी में हम आ गए. उसके बाद भी सुबह-शाम अलग से बच्चों को शिक्षा देते थे. इसे कोचिंग नहीं कहा जा सकता है, बच्चे पढ़ने के लिए आते थे. पटना कोचिंग का शुरुआत 1977 के बाद हुआ था. हमने पहले क्लास से लेकर P.G तक के गणित 70 किताब हमारे निकले हैं. इसमें से सभी तरह के गणित की पढ़ाई के बारे में जिक्र है.
दूसरे राज्यों के बिहार आकर करते थे पढ़ाई
उन्होंने कहा कि पहले के जितने भी आईएएस, आईपीएस लोग हैं, वह बिहार में ही रहकर पढ़ाई किए थे. उस वक्त हम पढ़ते थे और कई नाम चीन शिक्षक अलग-अलग विषय के थे, जिनसे पढ़ने के लिए बिहार के बाहर के छात्र भी आते थे. 1990 के बाद से बिहार में कोचिंग हब बनने लगा था और मुसल्लहपुर, रामना रोड और कई इलाकों में कोचिंग संस्थान खुलने लगे. 10 सालों तक पटना मका कोचिंग संस्थान बहुत अच्छा चला लेकिन उसके बाद कुछ गड़बड़ी होने लगी. लॉ एंड आर्डर भी बिगड़ने लगे कई शिक्षकों के साथ भी अप्रिय घटना होने लगी, इसके बाद छात्र यहां से भागने लगे और कोटा का रुख किया.
उन्होंने कहा कि कोटा में व्यवस्था भी बिहार से अच्छी थी, रहने के लिए भी और कोटा बिहार से अच्छा था. बिहार में पढ़ाई अच्छी थी, कुछ मामलों में पीछे रह गया जिसके कारण छात्र बिहार से निकलने लगे. कई शिक्षक भी जो बिहार में चर्चित थे वह कोटा चले गए.
'कोटा में भी हमारी किताबों से होती थी पढ़ाई'
उन्होंने बताया कि कोटा में भी हमारी किताब से पढ़ाई होती रही है.पहले दिन में कोई भी छात्र कोचिंग या ट्यूशन में नहीं जाते थे. दिन में स्कूल कॉलेज चलते थे और अच्छी पढ़ाई होती थी. सुबह और शाम में ही छात्र कोचिंग संस्थानों में जाते थे. अब तो सब कुछ अलग है.
के सी सिन्हा ने कहा कि शिक्षक को शिक्षक ही रहना चाहिए. उन्हें सब्जेक्ट का ज्ञान देना चाहिए, जो चैलेंज आएगा, उसके बारे में जानकारी देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अभी का दौर प्रचार प्रसार का अधिक हो गया है. हालांकि, अभी के टीचरों की यह सब लाचारी है. क्योंकि पहले माउथ पब्लिसिटी से छात्र आते थे, अब ऐसी बात नहीं है.
पहले के शिक्षक काफी नॉलेज वाले होते थे- केसी सिन्हा
उन्होंने कहा कि हम लोग के समय में शिक्षक बहुत सम्मानित होते थे. छात्र जब मिलते थे तो शिक्षक के लिए छाता लेकर जाते थे, शिक्षक को धूप न लगे यह छात्र लोग ख्याल रखते थे. पहले के शिक्षक काफी नॉलेज वाले होते थे. जब छात्र उनसे कोई सवाल पूछते थे तोवह वह मुंह से नहीं बल्कि सीधे ब्लैक बोर्ड पर जाते थे और पूरे डिटेल के साथ उन्हें बताते थे. हम खुद यह काम करते थे.उस समय की शिक्षा का दौर बिहार में कुछ अलग था.
उन्होंने कहा कि प्रत्येक सब्जेक्ट की पढ़ाई पहले होती थी और वहीं पढ़ाई छात्रों को ज्यादा बेहतर करती थी. 2008-9 तक बिहार के अधिकांश कोचिंग संस्थानों में सब्जेक्ट वाइज पढ़ाई होती रही. लेकिन धीरे-धीरे यह खत्म हो गया है. जब सब्जेक्ट पर बच्चों को ध्यान नहीं दिया जाएगा तो अच्छे कंपटीशन में छात्र कैसे निकालेंगे. कोरोना काल के बाद तो शिक्षा का स्तर पूरी तरह गिर गया, सिर्फ यूट्यूब और फेसबुक पर प्रचार प्रसार होने लगे हैं.
खान सर Vs रोशन आनंद विवाद पर प्रतिक्रिया
खान सर और रोशन आनंद के बीच विवाद को लेकर के सी सिन्हा ने कहा कि जो हो गया उसे वापस नहीं किया सकता है लेकिन अभी भी समय है, मिल बैठ करके बच्चों के प्रति ध्यान देना चाहिए और सरकार को भी इस दिशा में काम करना होगा. आपसी विवाद में बच्चों को आगे नहीं लाएं, उनके भविष्य की बात है.
उन्होंने कहा कि हमारे पढ़ाये दो दर्जन से ज्यादा आईएएस अफसर है तो कई बड़े ओहदे पर हैं.हमारे छात्र हैं देश के अधिकांश राज्यों में है.अभी जो उत्तर प्रदेश के डीजीपी है वह हमारे छात्र हैं. हमने बच्चों को सेवा भाव से शिक्षा दिया. हम कुलपति भी रहे तो पटना यूनिवर्सिटी में बच्चों को शिक्षा देने में कोई कमी नहीं की.
के सी सिन्हा ने आगे कहा कि यहां से पढ़ाई किए बच्चे पूरे देश में नाम रोशन कर रहे हैं. वह आज भी हो सकता है. फिर से पहले वाले बिहार के शिक्षा की स्थिति बिहार में हो सकती है, लेकिन इसके लिए सब लोग को आगे आना होगा. इनमें शिक्षकों के साथ-साथ सरकार को भी पहल करनी पड़ेगी. सरकार को सही व्यवस्था शिक्षा को लेकर देना होगा. कानून व्यवस्था सही करनी पड़ेगी.
उसके साथ-साथ छ शिक्षकों को भी आगे आना होगा छात्रों और अभिभावकों में विश्वास जगाना होगा तब लोग कोटा की ओर रुख नहीं करेंगे बल्कि बिहार में ही पढ़ाई करेंगे. अगर सभी लोग एकजुट होकर यह पहल करें तो आगामी तीन से चार सालों में बिहार एक बार फिर पहले की तरह शिक्षा हब बन सकता है.
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