Bihar Ward Councillor Protest: चुनाव से पहले वार्ड पार्षदों ने बढ़ाई NDA की टेंशन, सड़क पर उतरे, क्या है मांग?
Bihar News: वार्ड पार्षदों का कहना है कि क्षेत्र के विकास कार्य के चयन का अधिकार सिर्फ वार्ड पार्षदों को सुनिश्चित किया जाए, जिस तरह विधायक और सांसद को है. मानदेय बढ़ाने की भी मांग सरकार से की है.

मेयर की तानाशाही के खिलाफ और फिर से मेयर को चुने जाने की प्रक्रिया लागू करने की मांग को लेकर आज (सोमवार) वार्ड पार्षदों ने पटना की सड़कों पर प्रदर्शन किया. इसमें ना सिर्फ पटना नगर निगम के 75 वार्डों के वार्ड पार्षद थे बल्कि पूरे बिहार के सभी नगर निकायों के वार्ड पार्षद भी पहुंचे थे.
इन लोगों ने दरोगा राय पथ से निकलकर जेडीयू कार्यालय का घेराव किया. अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे. इसके बाद बीजेपी कार्यालय का घेराव किया. पार्षदों ने कहा कि हमारी पांच मांगें हैं. सबसे प्रमुख मांग है कि बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 23 को फिर से पुनर्जीवित किया जाए. जैसे पहले वार्ड पार्षद को मेयर चुनने का अधिकार था उसे लागू किया जाए.
कहा कि यह अधिकार पहले था, लेकिन 2022 में पार्षदों से यह अधिकार छीन लिया गया. वोट करने के अधिकार से वंचित कर दिया गया, जिससे मेयर मनमानी करते हैं. जनहित का काम प्रभावित हो रहा है, भ्रष्टाचार बढ़ गया है, जिसका हम लोग विरोध कर रहे हैं.
मानदेय बढ़ाने की मांग
पटना नगर निगम के वार्ड नंबर-10 के पार्षद सुनील कुमार ने कहा, "क्षेत्र के विकास कार्य का चयन करने का अधिकार सिर्फ वार्ड पार्षदों को सुनिश्चित किया जाए जिस तरह विधायक और सांसद को है. उन्होंने कहा कि हम लोगों का मानदेय ढाई हजार महीना मिलता है, इसे बढ़ाया जाए.
'आने वाले चुनाव में…'
पटना वार्ड नंबर 60 के पार्षद प्रतिनिधि बलिराम चौधरी ने कहा कि नगर पालिका में ग्रुप सी और डी की बहाली अविलंब हो, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी है, लेकिन सरकार नौकरी दबा कर बैठी है और इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. अगर इन सब मांगों को सरकार पूरा नहीं करती है तो आने वाले चुनाव में पार्षदों का कोप भाजन सरकार को झेलना पड़ेगा और इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. इस चेतावनी से पार्षदों ने एनडीए की टेंशन बढ़ा दी है.
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