बिहार का क्राइम रेट 20 साल में सबसे कम, हत्या-दंगे और हिंसक झड़प के मामलों में गिरावट, सामने आए आंकड़े
Bihar News: वर्ष 2001 से 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार बिहार में हत्या, डकैती, लूट और दंगे जैसे गंभीर अपराध ऐतिहासिक रूप से घटे हैं. जबकि चोरी, साइबर अपराध और गैर-हिंसक मामलों में बढ़ोतरी हुई है.

बिहार में हत्या, डकैती, लूट और दंगों जैसे गंभीर और हिंसक अपराध पिछले 20-25 वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. बिहार पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार द्वारा साझा किए गए 2001 से 2025 तक के आंकड़े यह दिखाते हैं कि राज्य की अपराध स्थिति में बड़ा बदलाव आया है. जिन अपराधों के कारण कभी बिहार को ‘जंगलराज’ से जोड़ा जाता था, उनमें अब लगातार कमी देखी जा रही है.
अखबार में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2001 में बिहार में हत्या के 3,619 मामले दर्ज हुए थे. 2005 से 2015 के बीच यह संख्या 3,000 से ऊपर बनी रही, लेकिन इसके बाद इसमें गिरावट शुरू हो गई. 2019 और 2020 में कुछ समय के लिए मामलों में हल्की बढ़ोतरी हुई, लेकिन 2025 में हत्या के मामले घटकर 2,556 रह गए, जो ढाई दशक में सबसे कम हैं.
डकैती मामलों में आई सबसे बड़ी गिरावट
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, डकैती के मामलों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. 2004 में जहां 1,297 डकैती के मामले थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 174 रह गई. यानी 25 वर्षों में डकैती के मामलों में 80 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है. लूट के मामलों में भी यही रुझान दिखा. 2004 में 2,909 मामलों से घटकर 2025 में यह संख्या 1,558 रह गई.
वर्ष 2025 में घटकर सबसे कम दर्ज हुए मामले
दंगों से जुड़े मामलों में भी ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है. 2014 में दंगों के 13,566 मामले थे, जो 2025 में घटकर 2,502 रह गए. यह 2001 के बाद सबसे कम आंकड़ा है. हालांकि, बलात्कार के मामलों में बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है. वर्ष 2000 में 746 मामलों से बढ़कर 2024 में यह संख्या 2,205 तक पहुंच गई. 2025 में इसमें मामूली गिरावट आई और 2,025 मामले दर्ज हुए.
फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में आई है कमी
गंभीर अपराधों में कमी के बावजूद बिहार में कुल संज्ञेय अपराध बढ़े हैं. जानकारी के अनुसार, इसकी मुख्य वजह चोरी, सेंधमारी, साइबर अपराध, गैर-फिरौती अपहरण और अन्य गैर-हिंसक अपराध हैं. चोरी और सेंधमारी अब कुल अपराधों में बड़ा हिस्सा बन चुके हैं. अपहरण के मामलों में बढ़ोतरी का कारण अक्सर प्रेम प्रसंग, बच्चों के गुम होने और पारिवारिक विवाद बताए जा रहे हैं. जबकि फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में कमी आई है.
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Source: IOCL























