Bihar Election: बिहार चुनाव के लिए जमीन पर रैलियां, सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की जंग, कौन मारेगा बाजी?
Bihar Election 2025: एनडीए बिहार में आरजेडी और कांग्रेस पर परिवारवाद व भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहा है, जबकि महागठबंधन बेरोजगारी, पलायन और वादा खिलाफी के मुद्दों पर एनडीए को घेर रहा है.

बिहार में अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. इस बार जंग दो मोर्चों पर लड़ी जा रही है - एक जमीन पर रैलियां और यात्राओं के जरिए. वहीं दूसरा सोशल मीडिया के मैदान में. हर कोई अपने स्तर पर अपने ही अंदाज में जंग लड़ रहा है.
राजनीतिक दल जानते हैं कि आज के समय में हर वर्ग - युवा, महिला, बुजुर्ग और बच्चे - मोबाइल पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसलिए चुनाव प्रचार में डिजिटल कैंपेन अहम हथियार बन गया है. फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब पर पार्टियां अपने संदेश को लाखों लोगों तक पहुंचा रही हैं.
किसके कितने फॉलोअर्स?
बीजेपी के फेसबुक पर 11 लाख और एक्स पर 7 लाख फॉलोअर्स हैं. जेडीयू के फेसबुक पर 9 लाख और एक्स पर 3.11 लाख फॉलोअर्स हैं. वहीं आरजेडी के फेसबुक पर 13 लाख से ज्यादा और एक्स पर 11 लाख से अधिक फॉलोअर्स मौजूद हैं.
चुनाव में प्रचार का नया अंदाज
पार्टियां केवल भाषण और पोस्टर तक सीमित नहीं हैं. अब वे रैप गानों, एआई तकनीक और बॉलीवुड डायलॉग का इस्तेमाल कर एक-दूसरे पर तंज कस रही हैं. रील्स बनाकर और वायरल पोस्टर शेयर कर माहौल गर्माने की कोशिश की जा रही है.
मुद्दों पर घमासान
बीजेपी बिहार में आरजेडी और कांग्रेस को परिवारवाद, भ्रष्टाचार और जंगलराज के मुद्दों पर घेर रही हैं. वहीं महागठबंधन बेरोजगारी, पलायन और वादा खिलाफी को लेकर एनडीए पर निशाना साध रहा है.
विशेषज्ञ और नेताओं की राय
वरिष्ठ पत्रकार संतोष यादव का मानना है कि इस बार सोशल मीडिया चुनावी प्रचार का बड़ा साधन बनेगा. उन्होंने कहा कि "प्रशांत किशोर की पार्टी सबसे ज्यादा एक्टिव है. बीजेपी-जेडीयू आगे हैं, जबकि आरजेडी भी अब तेजी से पकड़ बना रही है."
वहीं बीजेपी प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि "हम युवाओं को बताना चाहते हैं कि राजद-कांग्रेस के शासन में बिहार कैसा था. इसलिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं."
आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने दावा किया कि "हमने जनता के मुद्दों को सोशल मीडिया पर बेहतर ढंग से रखा है. जमीन पर वोटर अधिकार यात्रा से हमें व्यापक समर्थन मिला है."
इस बार का चुनाव साफ दिखा रहा है कि रैलियों के साथ-साथ डिजिटल जंग भी जीत का अहम रास्ता होगी.
Source: IOCL






















