बिहार: अररिया में जांच टीम की छापेमारी पर बवाल, एडीएम पर डॉक्टर को थप्पड़ मारने का आरोप
Bihar News: अररिया में धावा दल की छापेमारी के दौरान ADM द्वारा चिकित्सक को थप्पड़ मारने का आरोप लगाया. इस घटना के बाद से डॉक्टर और दवा दुकानदार हड़ताल पर है. जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही है.

बिहार के अररिया जिले में स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी उस वक्त बड़ा विवाद बन गई, जब जांच के लिए पहुंचे धावा दल में शामिल एक एडीएम द्वारा एक चिकित्सक को थप्पड़ मारने का आरोप सामने आया. घटना फारबिसगंज के रेफरल रोड स्थित बचपन नियो एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में हुई, जहां डीएम के निर्देश पर गठित धावा दल नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड सेंटर और पैथोलॉजी सेंटर की जांच के लिए पहुंचा था.
आरोप है कि जांच के दौरान एडीएम और चिकित्सक के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में मारपीट हो गई. चिकित्सक ने धावा दल पर दुर्व्यवहार का गंभीर आरोप लगाया है. घटना के बाद पूरे जिले में आक्रोश फैल गया, जिसके चलते चिकित्सकों के साथ-साथ दवा दुकानदार भी हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं.
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन और धावा दल के सदस्यों के बीच आरोप प्रत्यारोप के बीच धावा दल में शामिल एडीएम एवं उप निर्वाचन पदाधिकारी डॉ रामबाबू ने चिकित्सक डॉ दीपक कुमार को थप्पड़ जड़ दिया. जिसके बाद दोनों पक्षों में मारपीट हुई और धावा दल के सदस्यों को एक कमरे में फिर बंधक बना लिया गया. जिसकी सूचना के बाद फारबिसगंज एसडीएम अभय कुमार तिवारी,अनुमंडल निर्वाचन पदाधिकारी अविनाश कृष्ण और थानाध्यक्ष राघवेंद्र कुमार सिंह भारी संख्या में पुलिस बलों के साथ मौके पर पहुंच कर कमरे को खुलवाकर बंधक बने धावा दल के सदस्यों को बाहर निकलवाया.
धावा दल के सदस्यों में वरीय उप समाहर्ता एवं उप निर्वाचन पदाधिकारी डॉ रामबाबू, नरपतगंज के पीएचसी प्रभारी डॉ दीपक कुमार सिंह, फारबिसगंज पीएचसी प्रभारी डॉ राजीव बसाक, अंचलाधिकारी पंकज कुमार, सब इंस्पेक्टर संजीव कुमार और पुलिस बल के जवान शामिल थे. अस्पताल प्रबंधन ने करीबन आधे घंटे तक धावा दल के सदस्यों को कमरे में बंधक बनाए रखा. दोनों ओर से एक दूसरे पर मारपीट का आरोप लगाया गया. अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरा में एडीएम के पहले चिकित्सक पर थप्पड़ जड़ने का वीडियो है, जिसके बाद दोनों पक्षों में मारपीट हुई. मामले को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और भाषा ने गंभीरता से लिया है. अररिया, पूर्णिया और सुपौल के साथ राज्य स्तर पर आईएमए और भाषा ने जिला प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दे रखा है. जिसके तहत चिकित्सक दो दिनों से हड़ताल पर है और अपने निजी क्लिनिक में ओपीडी सेवा सहित इमरजेंसी सेवा को बंद कर रखा है. चिकित्सकों के समर्थन में सभी अल्ट्रासाउंड सेंटर, पैथोलॉजी सेंटर, एक्सरे सेंटर भी बंद हैं.
वहीं फारबिसगंज केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन भी चिकित्सकों के समर्थन में है और शहर की सभी दवाई दुकानों को बंद कर दिया है. केवल इमरजेंसी के लिए रेफरल रोड के एक दुकान को खोल कर रखा गया है. जिसके कारण दूरदराज क्षेत्र से आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और वे निराश होकर लौट रहे हैं.
सीसीटीवी में दर्ज हुई सारी घटना
घटना को लेकर बचपन नियो एंड चाइल्ड हॉस्पिटल के संचालक एवं कुर्साकांटा निवासी डॉ दीपक कुमार सुपौल जिला के निर्मली अनुमंडल अस्पताल में चीफ मेडिकल ऑफिसर के पद पर तैनात है. उन्होंने धावा दल के सदस्यों के द्वारा दुर्व्यवहार करने और फिजिकल अटैक के लिए पहल करने की बात कही. उन्होंने अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे में सारी घटना के कैद होने की बात कही. हालांकि उन्होंने खुद और उनके कर्मचारियों के द्वारा बचाव में फिजिकल होने की बात स्वीकार की. डॉ दीपक कुमार का हाथापाई में हाथ फ्रैक्चर हो गया है.
डीएम के निर्देश पर धावा दल का किया गठन
सूचना के बाद सिविल सर्जन डॉ के.के कश्यप मौके पर पहुंचे थे और मामले की जानकारी ली थी. उन्होंने मामले में जांच कर कार्रवाई करने की बात कही थी. उन्होंने बताया कि डीएम के निर्देश पर धावा दल का गठन किया गया है, जो जिले में संचालित निजी अस्पताल की जांच के लिए है. तय मानकों का पालन अस्पताल, पैथोलॉजी सेंटर, अल्ट्रासाउंड सेंटर प्रबंधन के द्वारा किया जा रहा है या नहीं. साथ ही अग्निशमन,वेस्टेज लाइसेंस और अस्पताल के रजिस्ट्रेशन और चिकित्सक की डिग्री समेत अन्य कागजातों की जांच कर रही है.
इधर, आईएमए के फारबिसगंज शाखा के सचिव डॉ. अतहर ने बताया कि मामले को आईएमए के साथ भाषा ने मामले को गंभीरता से लिया है. अररिया,पूर्णिया और सुपौल जिला इकाई के साथ राज्य स्तर के निर्देश पर डॉक्टर अपनी सुरक्षा को लेकर प्रदर्शन पर है. ओपीडी के साथ इमरजेंसी सेवा को दो दिनों से बंद रखा गया है और 48 घंटे की अल्टीमेटम में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है तो अनिश्चितकाल के लिए भी यह हड़ताल जा सकता है. इधर मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन की ओर से सीनियर एडीएम राजमोहन झा की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया है. जिन्हें 72 घंटे के भीतर जांच कर प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश डीएम ने दिया है. प्रतिवेदन के आधार पर जिला प्रशासन मामले में कार्रवाई करेगी. जांच दल में सीनियर एडीएम के अलावे सिविल सर्जन, सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक, फारबिसगंज एसडीओ और एसडीपीओ शामिल है.
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