Commonwealth Games History: जानिए कॉमनवेल्थ गेम्स का इतिहास, गुलाम देशों के लिए हुआ था शुरू; भारत से जुड़ी खास बातें
Commonwealth Games History: 1891 में जब दुनिया के कई देशों पर ब्रिटिश सरकार का राज था तब ब्रिटिश पादरी ने ऐसे आयोजन के बारे में पहली बार सोचा. भारत ने 1934 में पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया

कॉमनवेल्थ गेम्स के 23वें संस्करण (Commonwealth Games 2026) की शुरुआत आज से स्कॉटलैंड के शहर ग्लासगो में होने जा रही है. चौथी बार स्कॉटलैंड इस टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा है. 23 जुलाई से शुरू, 2 अगस्त तक चलने वाले इस आयोजन में 74 देशों के 3 हजार से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं. भारत के 125 खिलाड़ी इसमें शामिल हैं, जो 8 खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे. यहां हम आपको कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास के बारे में बता रहे हैं, इसकी शुरुआत कैसे और क्यों हुई थी. भारत से जुड़े कुछ फैक्ट्स.
1891 में जब दुनिया के कई देशों पर ब्रिटिश सरकार का राज था तब ब्रिटिश पादरी जॉन एस्टली कूपर ने ऐसे आयोजन के बारे में पहली बार सोचा था. उनका मानना था कि साम्राज्य की ताकत बढ़ाने के लिए ये भी जरुरी है. उन्होंने ‘पैन-ब्रिटेनिक फेस्टिवल’ नाम दिया, हालांकि ये शुरू नहीं हो पाया.
ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम के राज्याभिषेक के मौके (1911) पर लंदन में फेस्टिवल ऑफ एम्पायर आयोजित किया गया. कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के प्लेयर्स पहली बार एक आयोजन में खेले. हालांकि ये आधिकारिक कॉमनवेल्थ गेम्स नहीं था.
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पहला कॉमनवेल्थ गेम्स कब और कहां हुआ था?
कनाडा के हैमिल्टन शहर में पहला कॉमनवेल्थ गेम्स 1930 में आयोजित हुआ था. इससे पहले 1928 एम्स्टर्डम ओलिंपिक के समय ब्रिटिश सरकार के खेल अधिकारियों की मुलाकात हुई थी. यहीं फैसला हुआ था कि ओलिंपिक के आलावा एक और आयोजन हर 4 साल में होना चाहिए. उस समय हवाई सफर आसान नहीं होता था, कई देशों ने उस दौरान कहा था कि उनके पास ट्रेवलिंग के लिए पैसा नहीं है. तब अधिकतर प्लेयर जहाजों से कनाडा पहुंचे थे. आयोजकों ने भी कई टीमों की मदद की. काफी मुश्किलों के बाद पहला कॉमनवेल्थ गेम्स हुआ.
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पहले संस्करण में खेले थे 400 खिलाड़ी
कनाडा में हुए पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में 11 देशों के 400 प्लेयर्स ने हिस्सा लिया. पहले संस्करण में डाइविंग, बॉक्सिंग, स्विमिंग, एथलेटिक्स, कुश्ती और लॉन बॉल्स खेला गया था. आज गेम्स की संख्या भी ज्यादा है और खिलाड़ियों की भी.
बता दें कि कॉमनवेल्थ गेम्स का पहला गोल्ड मेडल रोवर बॉबी पियर्स ने जीता था, जो ऑस्ट्रेलिया के थे. बाद में उन्होंने ओलंपिक में भी पदक जीता.
भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार हिस्सा कब लिया था?
1934 में भारत इसमें शामिल हुआ, हालांकि तब भारत आजाद नहीं था. ब्रिटिश भारत में तब 6 खिलाड़ी थे. भारत के लिए पहला पदक जीतने वाले राशिद अनवर थे, जिन्होंने कांस्य पदक जीता था. 1942 और 1946 कॉमनवेल्थ गेम्स द्वितीय विश्व युद्ध की वजह से रद्द हो गए थे, 1950 में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड से इसकी वापसी हुई.
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का पहला गोल्ड किसने जीता था?
मिल्खा सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता. 1958 में कार्डिफ में हुए आयोजन में उन्होंने 440 यार्ड दौड़ जीतकर इतिहास रचा था. इसके बाद उन्हें 'फ्लाइंग सिख' नाम से पुकारा जाने लगा. इसी संस्करण में भारत के लिए पहलवान लीला राम ने भी गोल्ड जीता था.
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भारत ने कब की कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी?
कॉमनवेल्थ गेम्स के पहले संस्करण के 80 साल बाद भारत ने पहली बार इन खेलों की मेजबानी की। नई दिल्ली मेजबान बना, जो इन खेलों की मेजबानी करने वाला दक्षिण एशिया का पहला शहर बना. इस संस्करण में भारत ने 38 गोल्ड, 27 सिल्वर और 36 ब्रोंज मेडल जीतकर इतिहास रचा. पहली बार भारत मेडल टेली में दूसरे स्थान पर रहा था, जो भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.
























