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क्या वजन घटाने में बेअसर है इंटरमिटेंट फास्टिंग? स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा
इस समीक्षा में पाया गया कि मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग से वजन कम करने या जीवन की क्वालिटी सुधारने में बहुत कम या लगभग कोई फायदा नहीं दिखा.
आजकल वजन घटाने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग बहुत फेमस हो गया है. सोशल मीडिया, फिटनेस ब्लॉग और कई सेलिब्रिटी इसे तेजी से वजन कम करने का आसान तरीका बताते हैं, लेकिन हाल ही में प्रकाशित एक बड़ी वैज्ञानिक समीक्षा ने इस दावे पर सवाल उठाया है. इस समीक्षा में पाया गया कि मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग से वजन कम करने या जीवन की क्वालिटी सुधारने में बहुत कम या लगभग कोई फायदा नहीं दिखा. हालांकि, शरीर के कुछ आंतरिक कार्यों पर इसके सकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए अभी और शोध की जरूरत है.
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इंटरमिटेंट फास्टिंग का मतलब है खाने और उपवास के समय को तय कर लेना. इसमें लोग रोज या सप्ताह के कुछ दिनों में सीमित समय के लिए ही खाना खाते हैं. इसके कुछ सामान्य तरीके हैं. जिसमें 5:2 डाइट यानी सप्ताह में 5 दिन सामान्य खाना और 2 दिन बहुत कम कैलोरी लेना. रोजाना 8 घंटे के अंदर ही खाना खाना और बाकी 16 घंटे फास्ट रखना. एक दिन सामान्य खाना और अगले दिन बहुत कम खाना (बारी-बारी से), लोग मानते हैं कि इससे वजन जल्दी कम होता है और मेटाबॉलिज्म तेज होता है.
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शोधकर्ताओं ने लगभग 2,000 वयस्कों पर किए गए 22 अलग-अलग अध्ययनों का विश्लेषण किया. इन अध्ययनों में 12 महीने तक इंटरमिटेंट फास्टिंग का प्रभाव देखा गया. सामान्य डाइट सलाह (जैसे कम कैलोरी लेना और संतुलित भोजन) या बिल्कुल कोई सलाह न देना की तुलना की गई. रिज्लट यह निकला कि वजन घटाने में इंटरमिटेंट फास्टिंग और सामान्य डाइट सलाह के बीच बहुत कम या कोई खास अंतर नहीं था. लाइफ की क्वालिटी में भी कोई बड़ा सुधार नहीं दिखा.
Published at : 27 Feb 2026 09:09 AM (IST)
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