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पहले ऐसे दी जाती थी क्रूर सजा, उनके बारे में पढ़कर ही आपकी रूह कांप जाएगी

इतिहास उठाकर देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि आज के फांसी के मुकाबले उस दौर की मौत की सजा कितनी दर्दनाक थी. चलिए आपको तस्वीरों के जरिए दिखाते हैं कि उस समय कैसे मौत की सजा दी जाती थी.

इतिहास उठाकर देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि आज के फांसी के मुकाबले उस दौर की मौत की सजा कितनी दर्दनाक थी. चलिए आपको तस्वीरों के जरिए दिखाते हैं कि उस समय कैसे मौत की सजा दी जाती थी.

इतिहास की सबसे क्रूर सजा

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रैट किलिंग की सजा भी बेहद भयावह होती थी. इसमें इंसान को एक एक बक्से में बांध कर डाल दिया जाता और उसके साथ ही उसमें कुछ भूखे चूहों को भी डाल दिया जाता. ये चूहे जब हद से ज्यादा भूखे हो जाते तो इंसान को काटने लगते. धीरे धीरे ये चूहे इंसान को काट काट कर मार डालते.
रैट किलिंग की सजा भी बेहद भयावह होती थी. इसमें इंसान को एक एक बक्से में बांध कर डाल दिया जाता और उसके साथ ही उसमें कुछ भूखे चूहों को भी डाल दिया जाता. ये चूहे जब हद से ज्यादा भूखे हो जाते तो इंसान को काटने लगते. धीरे धीरे ये चूहे इंसान को काट काट कर मार डालते.
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रैक किलिंग सबसे भयावह और दर्दनाक मौत की सजा में से एक है. इस सजा के दौरान इंसान को एक रैक पर लिटा दिया जाता और उसके हाथों-पैरों को रस्सी से बांध दिया जाता. इस रस्सी का दूसरा सिरा घोड़ों पर बांध दिया जाता और घोड़ों को सोंटा मारा जाता. जैसे ही घोड़े अपना जोर लगाते इंसान का हर अंग फट के अलग हो जाता.
रैक किलिंग सबसे भयावह और दर्दनाक मौत की सजा में से एक है. इस सजा के दौरान इंसान को एक रैक पर लिटा दिया जाता और उसके हाथों-पैरों को रस्सी से बांध दिया जाता. इस रस्सी का दूसरा सिरा घोड़ों पर बांध दिया जाता और घोड़ों को सोंटा मारा जाता. जैसे ही घोड़े अपना जोर लगाते इंसान का हर अंग फट के अलग हो जाता.
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गुइलोटीन से इंसान की मौत आसान थी. लेकिन देखने में ये सबसे डरावना था. इसे देख कर ही इंसान को पता था कि उसकी मौत तय है. दरअसल, इस सजा में इंसान को एक तख्ते पर लिटा दिया जाता था और उपर से उसके गले पर एक बड़ा सा ब्लेड गिरता था. जैसे ही ब्लेड गिरता था इंसान का सिर एक सेकंड में कट के अलग हो जाता था.
गुइलोटीन से इंसान की मौत आसान थी. लेकिन देखने में ये सबसे डरावना था. इसे देख कर ही इंसान को पता था कि उसकी मौत तय है. दरअसल, इस सजा में इंसान को एक तख्ते पर लिटा दिया जाता था और उपर से उसके गले पर एक बड़ा सा ब्लेड गिरता था. जैसे ही ब्लेड गिरता था इंसान का सिर एक सेकंड में कट के अलग हो जाता था.
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इसे रैक टॉर्चर कहते हैं. इसके जरिए मौत की सजा लंदन में दी जाती थी. दरअसल, जब लंदन में किसी को मौत की सजा सुनाई जाती थी तो उसे टॉवर पर सेट एक रैक टॉर्चर में बांध दिया जाता था. इस रैक में इंसान के अलग अलग हिस्सों को अलग अलग तरीके से बांध दिया जाता था. फिर इसे तेजी से घुमाया जाता और ये तब तक जारी रहता जब तक कि इंसान के शरीर के अलग अलग हिस्से कट कर बाहर ना हो जाते.
इसे रैक टॉर्चर कहते हैं. इसके जरिए मौत की सजा लंदन में दी जाती थी. दरअसल, जब लंदन में किसी को मौत की सजा सुनाई जाती थी तो उसे टॉवर पर सेट एक रैक टॉर्चर में बांध दिया जाता था. इस रैक में इंसान के अलग अलग हिस्सों को अलग अलग तरीके से बांध दिया जाता था. फिर इसे तेजी से घुमाया जाता और ये तब तक जारी रहता जब तक कि इंसान के शरीर के अलग अलग हिस्से कट कर बाहर ना हो जाते.
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जुडास क्रेडल के जरिए मध्य काल में मौत की सजा दी जाती थी. यह एक ऐसा स्टूल होता था जिसका ऊपरी हिस्सा नुकीला होता था. जब किसी को इसके जरिए मौत की सजा दी जाती थी उस महिला या पुरुष को निरवस्त्र कर इस स्टूल पर बिठा दिया जाता था. धीरे धीरे इंसान नीचे से कटता जाता था और अंत में मर जाता था.
जुडास क्रेडल के जरिए मध्य काल में मौत की सजा दी जाती थी. यह एक ऐसा स्टूल होता था जिसका ऊपरी हिस्सा नुकीला होता था. जब किसी को इसके जरिए मौत की सजा दी जाती थी उस महिला या पुरुष को निरवस्त्र कर इस स्टूल पर बिठा दिया जाता था. धीरे धीरे इंसान नीचे से कटता जाता था और अंत में मर जाता था.

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