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LBSNAA में ट्रेनिंग के दौरान IAS ऑफिसर को कितनी मिलती है सैलरी, जानें शुरुआती कमाई?

ट्रेनिंग के दौरान अधिकारियों को नियमित सैलरी नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें स्टाइपेंड मिलता है. सातवें वेतन आयोग के अनुसार यह राशि करीब 56,100 रुपये प्रतिमाह होती है.

ट्रेनिंग के दौरान अधिकारियों को नियमित सैलरी नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें स्टाइपेंड मिलता है. सातवें वेतन आयोग के अनुसार यह राशि करीब 56,100 रुपये प्रतिमाह होती है.

LBSNAA training: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. वहीं परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवार के जीवन का एक नया दौर शुरू हो जाता है. परीक्षा पास करने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को अलग-अलग सेवाओं में नियुक्ति दी जाती है और फिर उनकी प्रोफेशनल ट्रेनिंग शुरू होती है. खासतौर पर आईएएस कैडर पाने वाले उम्मीदवारों के लिए असली सफर उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से शुरू होता है.

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मसूरी स्थित यह अकेडमी केवल ट्रेनिंग सेंटर नहीं, बल्कि वह जगह है जहां यूपीएससी एस्पिरेंट्स को प्रशासनिक अधिकारी के रूप में तैयार किया जाता है. यहां उम्मीदवारों को प्रशासनिक जिम्मेदारियां, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और देश की विविधता को समझने की ट्रेनिंग दी जाती है. इस बीच कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि ट्रेनिंग के दौरान आईएएस अधिकारियों को कितनी सैलरी मिलती है और उनके हाथ में आखिर कितनी रकम आती है.
मसूरी स्थित यह अकेडमी केवल ट्रेनिंग सेंटर नहीं, बल्कि वह जगह है जहां यूपीएससी एस्पिरेंट्स को प्रशासनिक अधिकारी के रूप में तैयार किया जाता है. यहां उम्मीदवारों को प्रशासनिक जिम्मेदारियां, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और देश की विविधता को समझने की ट्रेनिंग दी जाती है. इस बीच कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि ट्रेनिंग के दौरान आईएएस अधिकारियों को कितनी सैलरी मिलती है और उनके हाथ में आखिर कितनी रकम आती है.
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ट्रेनिंग के दौरान अधिकारियों को नियमित सैलरी नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें स्टाइपेंड मिलता है. सातवें वेतन आयोग के अनुसार यह राशि करीब 56,100 रुपये प्रतिमाह होती है, हालांकि यह पूरी रकम अधिकारियों के हाथ में नहीं आती.
ट्रेनिंग के दौरान अधिकारियों को नियमित सैलरी नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें स्टाइपेंड मिलता है. सातवें वेतन आयोग के अनुसार यह राशि करीब 56,100 रुपये प्रतिमाह होती है, हालांकि यह पूरी रकम अधिकारियों के हाथ में नहीं आती.
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इस स्टाइपेंड से मेस, आवास, बिजली-पानी, वर्दी और दूसरी सुविधाओं से जुड़े खर्च काटे जाते हैं. इन कटौतियों के बाद आमतौर पर एक ट्रेनी अधिकारी के हाथ में करीब 35 से 40 हजार रुपये की राशि बचती है.
इस स्टाइपेंड से मेस, आवास, बिजली-पानी, वर्दी और दूसरी सुविधाओं से जुड़े खर्च काटे जाते हैं. इन कटौतियों के बाद आमतौर पर एक ट्रेनी अधिकारी के हाथ में करीब 35 से 40 हजार रुपये की राशि बचती है.
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लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में ट्रेनिंग की शुरुआत लगभग 15 सप्ताह के फाउंडेशन कोर्स से होती है. इस दौरान आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और दूसरे केंद्रीय सेवाओं के सभी उम्मीदवार एक साथ प्रशिक्षण लेते हैं. इसका उद्देश्य अलग-अलग सेवाओं के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय और समझ विकसित करना होता है.
लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में ट्रेनिंग की शुरुआत लगभग 15 सप्ताह के फाउंडेशन कोर्स से होती है. इस दौरान आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और दूसरे केंद्रीय सेवाओं के सभी उम्मीदवार एक साथ प्रशिक्षण लेते हैं. इसका उद्देश्य अलग-अलग सेवाओं के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय और समझ विकसित करना होता है.
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फाउंडेशन कोर्स में कानून, अर्थव्यवस्था, भारतीय इतिहास, सार्वजनिक प्रशासन और शासन व्यवस्था से जुड़े विषय पढ़ाए जाते हैं. यहां उम्मीदवार को प्रशासन की बुनियादी समझ देने के साथ-साथ नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित की जाती है.
फाउंडेशन कोर्स में कानून, अर्थव्यवस्था, भारतीय इतिहास, सार्वजनिक प्रशासन और शासन व्यवस्था से जुड़े विषय पढ़ाए जाते हैं. यहां उम्मीदवार को प्रशासन की बुनियादी समझ देने के साथ-साथ नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित की जाती है.
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मसूरी की पहाड़ियों में स्थित अकादमी में अधिकारियों का रूटीन काफी अनुशासित और व्यस्त होता है. दिन की शुरुआत करीब सुबह 6 बजे पीटी या योग सत्र से होती है. इसके बाद दिनभर क्लासरूम, लेक्चर, केस स्टडी और अलग-अलग प्रशासनिक सेवाओं पर प्रशिक्षण दिया जाता है.
मसूरी की पहाड़ियों में स्थित अकादमी में अधिकारियों का रूटीन काफी अनुशासित और व्यस्त होता है. दिन की शुरुआत करीब सुबह 6 बजे पीटी या योग सत्र से होती है. इसके बाद दिनभर क्लासरूम, लेक्चर, केस स्टडी और अलग-अलग प्रशासनिक सेवाओं पर प्रशिक्षण दिया जाता है.
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शाम के समय अधिकारियों को खेलकूद, तैराकी, घुड़सवारी और दूसरे अधिकारियों के साथ एक्टिविटी में हिस्सा लेना होता है. इसके अलावा औपचारिक डिनर के दौरान उन्हें प्रशासनिक और सामाजिक शिष्टाचार भी सिखाए जाते हैं.
शाम के समय अधिकारियों को खेलकूद, तैराकी, घुड़सवारी और दूसरे अधिकारियों के साथ एक्टिविटी में हिस्सा लेना होता है. इसके अलावा औपचारिक डिनर के दौरान उन्हें प्रशासनिक और सामाजिक शिष्टाचार भी सिखाए जाते हैं.
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वहीं फाउंडेशन कोर्स पूरा होने के बाद अलग-अलग सेवाओं के लिए अधिकारी अपनी-अपने विशेष अकेडमी में चले जाते हैं. आईपीएस अधिकारियों को हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकेडमी भेजा जाता है, जबकि आईएफएस अधिकारियों की ट्रेनिंग दिल्ली स्थित विदेश सेवा संस्थान में होती है. वहीं आईआरएस अधिकारियों को नागपुर स्थित राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी में प्रशिक्षण दिया जाता है, हालांकि आईएएस अधिकारियों की आगे की ट्रेनिंग लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में ही जारी रहती है.
वहीं फाउंडेशन कोर्स पूरा होने के बाद अलग-अलग सेवाओं के लिए अधिकारी अपनी-अपने विशेष अकेडमी में चले जाते हैं. आईपीएस अधिकारियों को हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकेडमी भेजा जाता है, जबकि आईएफएस अधिकारियों की ट्रेनिंग दिल्ली स्थित विदेश सेवा संस्थान में होती है. वहीं आईआरएस अधिकारियों को नागपुर स्थित राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी में प्रशिक्षण दिया जाता है, हालांकि आईएएस अधिकारियों की आगे की ट्रेनिंग लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में ही जारी रहती है.
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अकादमी में शुरुआती प्रशिक्षण के बाद आईएएस अधिकारियों को उनके आवंटित राज्य कैडर में फील्ड ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है. इस दौरान में जिला प्रशासन के साथ काम करते हुए सरकारी योजनाओं, फाइल प्रक्रिया, राजस्व व्यवस्था और जन समस्याओं के समाधान की व्यावहारिक जानकारी हासिल करते हैं.
अकादमी में शुरुआती प्रशिक्षण के बाद आईएएस अधिकारियों को उनके आवंटित राज्य कैडर में फील्ड ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है. इस दौरान में जिला प्रशासन के साथ काम करते हुए सरकारी योजनाओं, फाइल प्रक्रिया, राजस्व व्यवस्था और जन समस्याओं के समाधान की व्यावहारिक जानकारी हासिल करते हैं.

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