Nepal Gen-G Protest: नेपाल के बिगड़े हालात पर छलका नेपालियों का दर्द, कहा-'काश हमारा देश भी गुलाम होता...'
नेपाल में बेरोजगारी, राजनीतिक अस्थिरता और विकास की कमी से लोग निराश हैं. हालात इतने खराब हैं कि नागरिक भारत से तुलना करते हुए बेहतर भविष्य की उम्मीद जता रहे हैं.

भारत के पड़ोसी मुल्क नेपाल में हुए जेन जी विरोध प्रदर्शन ने देश पर काफी बुरा असर डाला है. इस बीच भारत-नेपाल सीमा के रूपैडीहा बॉर्डर पर बड़ी संख्या में लौट रहे नेपाली नागरिकों ने मौजूदा स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया दी. इसी दौरान पाल्पा के रहने वाले खेम बहादुर ने अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि नेपाल की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि लोग अब यह सोचने लगे हैं कि अगर अंग्रेजों ने नेपाल को भी भारत के साथ मिलाकर गुलाम बना लिया होता तो शायद देश आज कहीं आगे होता. उनके अनुसार कम से कम ट्रेन, सड़कें और रोजगार की सुविधाएं तो होतीं.
निजी चैनल को दिए एक बयान में खेम बहादुर ने बताया कि लोकतंत्र आने के बाद लोगों को बड़ी उम्मीदें थीं. जनता सोच रही थी कि अब देश में विकास होगा, लेकिन नेताओं ने जनता की बजाय अपना विकास किया. रोजगार के साधन लगभग न के बराबर हैं और आम लोग अपने हाल पर छोड़ दिए गए हैं. उनका मानना है कि अगर नेपाल का नेतृत्व ईमानदार और दूरदर्शी होता तो हालात इतने खराब नहीं होते.
जेन-जी आंदोलन पर नजरिया
नेपाल में हाल का जेन-जी आंदोलन राजनीति और समाज दोनों में बड़ा बदलाव लेकर आया. खेम बहादुर मानते हैं कि यह आंदोलन जरूरी था क्योंकि जनता का आक्रोश बहुत गहरा हो चुका था, लेकिन उन्होंने आंदोलन के दौरान सरकारी इमारतों में आगजनी और तोड़फोड़ की निंदा की. उनका कहना है कि इन भवनों का पुनर्निर्माण जनता की जेब से यानी टैक्स से ही होगा इसलिए इस तरह की हिंसा सही नहीं है.
भारत से तुलना क्यों की जाती है
नेपाल के कई नागरिक भारत से तुलना करते हैं. इसका कारण यह है कि अंग्रेजों के शासनकाल में भारत में रेल, सड़क और प्रशासनिक ढांचा तैयार हुआ. आज वही आधार भारत को आर्थिक और तकनीकी विकास की दिशा में आगे ले जा रहा है. नेपाल में ऐसा कोई ढांचा नहीं बन पाया और राजनीतिक अस्थिरता ने स्थिति को और खराब कर दिया.
भविष्य को लेकर उम्मीद
खेम बहादुर जैसे कई नागरिक मानते हैं कि आंदोलन के बाद जो भी सरकार बनेगी, उसे जनता की भलाई पर ध्यान देना होगा. रोजगार, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देनी होगी. अगर नेतृत्व ने अब भी सबक नहीं सीखा तो देश और गहरे संकट में जा सकता है.
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Source: IOCL





















