नेपाल में बाढ़ का कहर: मौतों का आंकड़ा 1,127 पार, 4,858 लापता
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के करीब एक सप्ताह बाद भी तबाही का मंजर जारी है.

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. हिमालयी क्षेत्र में आई इस आपदा के करीब एक सप्ताह बाद भी हजारों लोग लापता हैं और सुरक्षा बल लगातार खोज एवं बचाव अभियान चला रहे हैं. नेपाल पुलिस के मुताबिक, बुधवार तक बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है, जबकि 4,858 लोगों की तलाश अब भी जारी है. अब तक सुरक्षा बल प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाल चुके हैं. इस बीच नेपाल के कई हिस्सों में दोबारा अचानक बाढ़ और नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए नए अलर्ट जारी किए गए हैं.
चितवन में सबसे ज्यादा 348 शव बरामद
नेपाल पुलिस के अनुसार, अब तक चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं. इसके अलावा गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहूं से 38 शव बरामद हुए हैं. पुलिस ने बताया कि 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, जबकि 95 शव उनके परिजनों को सौंपे जा चुके हैं. लापता लोगों के परिजनों को अज्ञात शवों की पहचान में मदद देने के लिए नेपाल पुलिस ने 911 अज्ञात शवों का विवरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है.
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6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
नेपाल पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा बल अब तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाल चुके हैं. हालांकि, 4,858 लोग अब भी लापता हैं और उनकी तलाश लगातार जारी है. अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों में 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है. ये जवान खोज और बचाव अभियान के साथ राहत सामग्री के वितरण तथा बरामद शवों के प्रबंधन में भी जुटे हैं. पुलिस की टीमें उच्च जोखिम वाले इलाकों में फंसे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, मलबे के कारण बंद सड़कों को साफ करने और स्थानीय प्रशासन व लोगों के साथ मिलकर खोज, बचाव एवं राहत अभियानों के समन्वय का काम कर रही हैं.
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को आई थी अचानक बाढ़
नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के ढहने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आ गई थी. इस आपदा ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई. बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए और कई इलाकों में सड़क, पुल समेत महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है.
भारत की विशेष सुरंग बचाव टीम ने शुरू किया अभियान
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि भारत की विशेष सुरंग बचाव टीम ने दो पनबिजली परियोजना स्थलों पर सफलता हासिल की है. उन्होंने बताया कि टीम ने चिलिमे में एक सुरंग के अंदर अपनी जगह बनाई है, जबकि लांगटांग में 185 मीटर तक जांच की जा रही है. भारत की टीम प्रभावित इलाकों में सुरंगों से जुड़े बचाव कार्यों में जुटी है और संभावित रूप से फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए अभियान चला रही है.
कई जिलों में अचानक बाढ़ का नया अलर्ट
नेपाल में अधिकारियों ने मंगलवार को देश के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों के कई जिलों में बाढ़ के खतरे को लेकर नया अलर्ट जारी किया. लोगों से नदियों और जलधाराओं के आसपास सावधानी बरतने तथा जरूरी एहतियाती कदम उठाने की अपील की गई है. राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) की ओर से जारी सूचना के अनुसार, नुवाकोट और रसुवा जिलों में अचानक बाढ़ आने की काफी अधिक आशंका जताई गई है. इन इलाकों में छोटी नदियों और जलधाराओं का जलप्रवाह बढ़ने का अनुमान है.
पूर्वी और मध्य नेपाल के कई जिलों में भी खतरा
ताप्लेजुंग, संखुवासभा, सोलुखुम्बु, खोटांग, ओखलढुंगा, रामेछाप, दोलखा, सिंधुपालचोक, काभ्रेपलांचोक, ललितपुर, भक्तपुर, काठमांडू और धादिंग समेत पूर्वी और मध्य नेपाल के कई जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ने का खतरा बताया गया है. इन इलाकों में अचानक बाढ़ आने का मध्यम स्तर का जोखिम भी जताया गया है. प्राधिकरण ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से मौसम और जलस्तर पर नजर रखने तथा समय रहते सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी रखने को कहा है.
पश्चिमी नेपाल के लिए भी अलर्ट जारी
प्राधिकरण के मुताबिक, पश्चिमी नेपाल के गोरखा, लमजुंग, डोल्पा, रुकुम पूर्व, रुकुम पश्चिम, जाजरकोट, दार्चुला, बैतड़ी, डडेलधुरा, डोटी, कैलाली और कंचनपुर जिलों के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है. एनडीआरआरएमए ने मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए नदी किनारे और अन्य संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक एहतियाती उपाय करने की अपील की है.
प्रमुख नदियों के जलस्तर पर नजर
अधिकारियों ने बताया कि कोशी, नारायणी, बागमती, कर्णाली और महाकाली नदियों के साथ उनकी सहायक नदियों के जलस्तर पर करीबी नजर रखी जा रही है. इसके अलावा कंकाई, कमला, बबई, पूर्वी राप्ती और पश्चिमी राप्ती नदियों के जलस्तर की भी लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सके.
21 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात
नेपाल सरकार ने खोज और बचाव अभियानों के लिए 21,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है. प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने तथा राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर भी लगातार उड़ान भर रहे हैं. सुरक्षा बलों और राहत टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दूरदराज के पहाड़ी इलाकों तक पहुंचना और बाढ़ व मलबे के बीच फंसे लोगों की तलाश करना है.
19 पुल और कई सड़कें बाढ़ में बहीं
विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के सड़क और पुल नेटवर्क को भी भारी नुकसान पहुंचाया है. वाहनों के आवागमन योग्य 19 पुल और कई राजमार्ग तथा प्रमुख सड़कें बाढ़ में बह गई हैं. इनमें से एक पुल नेपाल और चीन के बीच मुख्य जमीनी व्यापार मार्ग का हिस्सा था. इसके अलावा दोनों देशों को जोड़ने वाला रसुवागढ़ी सीमा पार मार्ग भी बाढ़ से प्रभावित हुआ है. बाढ़ के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है. एक तरफ लापता लोगों की तलाश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नए इलाकों में बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.
(इनपुट- पीटीआई)






















