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इजरायल-सऊदी अरब अपने संबंध सुधारने में कर रहे प्रगति, क्या हो पाएगी दोनों मे दोस्ती! जानिए

Mohammed Bin Salman: रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से कहा है कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर ‘फिलिस्तीनी मुद्दे’ में रुचि नहीं है.

Israel-South Arabia Relations: हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें इजरायल और सऊदी अरब के बीच संबंधों के सामान्य बनाने की कोशिशों में प्रगति की चर्चा हुई है. इजरायल के एक अखबार हारेत्ज की रिपोर्ट की मुताबिक, दोनों देशों के बीच संबंधों का सामान्यीकरण सीजफायर समझौते से जुड़ा हो सकता है, जो कि गाजा में इजरायल युद्ध को भी खत्म कर सकता है. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि इजरायल सऊदी अरब की मांग पर एक स्वतंत्र फिलीस्तीनी देश की दिशा में एक अस्पष्ट प्रतिबद्धता पर सहमत हुआ है.

हालांकि, एक्सियोस से संबंधित एक पत्रकार बराक रवीद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सऊदी अरब के एक अधिकारी के हवाले से इस रिपोर्ट का खंडन किया है. पोस्ट के अनुसार, अधिकारी ने कहा, ‘यह कहना कि सऊदी नेतृत्व ने स्वतंत्र फिलिस्तीन की स्थापना के लिए अपनी प्रतिबद्धता में कोई बदलाव किया है, यह बिल्कुल ही निराधार है. सऊदी अरब ने यह कहा है कि वह गाजा में जारी इजरायल से युद्ध को समाप्त करने और फिलिस्तीनी नागरिकों के स्वतंत्र राज्य के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत रहेगा.’

क्या कहते हैं सऊदी क्राउन प्रिंस?

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सार्वजनिक तौर पर गाजा में इजरायल के हमले और कार्रवाई को नरसंहार करार दिया है. क्राउन प्रिंस ने कहा कि पूर्वी यूरूशलेम को राजधानी बनाने वाले फिलिस्तीनी देश को मान्यता दिए बिना सऊदी अरब और इजरायल के बीच सामान्य संबंध नहीं हो सकता है.

हारेत्ज के मुताबिक, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नजदीकी सूत्रों ने बताया कि सऊदी क्राउन प्रिंस को व्यक्तिगत तौर पर फिलिस्तीनी देश गाजा को औपचारिक मान्यता देने में रुचि नहीं है. यह मुद्दा सिर्फ घरेलू राजनीतिक और धार्मिक समर्थन हासिल करने के लिए जरूरी है.

अमेरिका की बाइडन प्रशासन ने समझौता कराने की कोशिश की

द अटलांटिक की रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से कहा है कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर ‘फिलिस्तीनी मुद्दे’ में रुचि नहीं है. लेकिन सऊदी अरब की जनता इसे महत्व देती है, इसलिए इस गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने कई सालों से दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य कराने का प्रयास किया है, लेकिन अब तक उन्हें इसमें सफलता हासिल नहीं हो पाई है. वहीं, अब अमेरिका में जल्द ही डोनाल्ड ट्रंप का शासन आने वाला है, तो ऐसे में बाइडन के पास कोई समझौता कराने के लिए पर्याप्त समय नहीं है. 

यह भी पढ़ेंः सऊदी अरब में होना है फीफा 2034, जानें यहां भारतीयों के लिए रोजगार के अवसर कितने?

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