ट्रंप के टैरिफ पर भारत ने खींच दी 'लक्ष्मण रेखा', डेडलाइन से पहले अब अमेरिका के पाले में गेंद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारत सहित दर्जनों देशों के लिए 90-दिवसीय शुल्क निलंबन भी इसी दिन खत्म हो रहा है. भारत ने अपनी सीमाएं तय कर दी हैं और अब गेंद अमेरिका के पाले में है.

भारत ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते के लिए कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों में प्रमुख मुद्दों पर अपनी सीमाएं तय कर दी हैं. इसलिए अब सौदे को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी वाशिंगटन के हाथ में है.
सूत्रों ने बताया कि अगर मुद्दे सुलझ जाते हैं तो 9 जुलाई से पहले अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की जा सकती है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारत सहित दर्जनों देशों के लिए 90-दिवसीय शुल्क निलंबन भी इसी दिन खत्म हो रहा है. उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी सीमाएं तय कर दी हैं और अब गेंद अमेरिका के पाले में है.
अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश
दोनों देशों ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के लिए बातचीत शुरू करने की घोषणा की थी. उन्होंने इस साल की शरद ऋतु (सितंबर-अक्टूबर) तक बीटीए के पहले चरण को पूरा करने की समयसीमा तय की. उससे पहले, दोनों पक्ष अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं.
2 अप्रैल को अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 26 प्रतिशत का अतिरिक्त जवाबी शुल्क लगाया, लेकिन इसे 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया. हालांकि, अमेरिका की तरफ से लगाया गया 10 प्रतिशत मूल शुल्क अभी भी लागू है. भारत इस 26 प्रतिशत शुल्क से पूरी छूट चाहता है. एक सूत्र ने कहा, 'यदि प्रस्तावित व्यापार वार्ता विफल हो जाती है तो 26 प्रतिशत शुल्क फिर से लागू हो जाएंगे.'
भारत समय सीमा के आधार पर नहीं करता व्यापार समझौता
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले सप्ताह कहा था कि भारत समय सीमा के आधार पर कोई व्यापार समझौता नहीं करता है और अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को तभी स्वीकार करेगा, जब यह राष्ट्रीय हित में होगा. सूत्रों के अनुसार, एफटीए तभी संभव है, जब दोनों पक्षों को लाभ मिले और यह दोनों पक्षों के लिए लाभ वाला समझौता होना चाहिए.
पिछले सप्ताह ही भारतीय दल अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत करके वाशिंगटन से लौटा है. दोनों देशों के बीच इस्पात और एल्युमीनियम (50 प्रतिशत), वाहन (25 प्रतिशत) शुल्क पर भी मतभेद हैं.
भारत भी अपना रहा कड़ा रूख
भारत ने कृषि और डेयरी उत्पादों पर अमेरिका को शुल्क रियायतें देने पर अपना रूख कड़ा कर लिया है, क्योंकि दोनों ही संवेदनशील विषय हैं. भारत ने पहले कभी भी हस्ताक्षरित किसी भी व्यापार समझौते में डेयरी क्षेत्र को नहीं खोला है.
ट्रंप ने पिछले सप्ताह कहा था कि उनका प्रशासन 10-12 देशों के पहले समूह को पत्र भेज रहा है, जिसमें जवाबी शुल्क दरों का विवरण साझा किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया 9 जुलाई तक पूरी हो सकती है.
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