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बांग्लादेश की बदलने वाली है राजधानी! आम जनता हुई तंग, जानें क्या कहा

Bangladesh News: भारत के एक पड़ोसी देश में राजधानी बदलने की मांग तेजी से हो रही है. लोगों को यहां पर अब बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है.

Bangladesh News: बांग्लादेश में राजधानी ढाका को बदलने की मांग जोर पकड़ रही है. इसका मुख्य कारण शहर में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है. 306 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में बसे इस शहर में एक करोड़ से अधिक लोग रहते हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत से ज्यादा आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है.

ढाका नदी के किनारे स्थित है, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों को स्वच्छ पेयजल तक उपलब्ध नहीं हो पाता. बेतरतीब शहरीकरण ने स्थिति और बिगाड़ दी है. चुनिंदा क्षेत्रों को छोड़ दें तो पूरा शहर अव्यवस्थित विकास से जूझ रहा है. धूल-मिट्टी, टूटी सड़कें, बेहाल ट्रैफिक, कमजोर कानून-व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं की कमी ने यहां के निवासियों का जीवन कठिन बना दिया है.

रहने लायक नहीं रहा ढाका!

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, अब स्थानीय लोग भी इस शहर को रहने के योग्य नहीं मान रहे हैं. रिपोर्ट में बिजनेसमैन जाहिदुर रहमान के हवाले से कहा गया है कि वह ढाका की स्थिति को लेकर बेहद चिंतित हैं. उन्होंने कहा, 'यह शहर अब रहने लायक नहीं रहा. मैं यहां सिर्फ अपने काम के कारण रहता हूं, वरना मैं बहुत पहले ही इसे छोड़ चुका होता.'

ढाका में हर चीज केंद्रीकृत होने के कारण नागरिकों को मजबूरी में भीड़भाड़ का सामना करना पड़ता है. यहां तक कि अगर कोई सुरक्षित और बेहतर जीवन की तलाश में इस शहर से बाहर जाना भी चाहे, तो यह आसान विकल्प नहीं है.

सार्वजनिक परिवहन की बदहाली

रिपोर्ट के अनुसार, ढाका में सार्वजनिक परिवहन की स्थिति इतनी दयनीय है कि यात्रियों को खड़े होने तक की जगह नहीं मिलती. बसों में भारी भीड़ के कारण कई लोग जोखिम उठाकर दरवाजे से लटके सफर करने को मजबूर होते हैं.

एक निजी बैंक के अधिकारी, मारुफुल हक ने अपने रोजमर्रा के संघर्ष को साझा करते हुए कहा, 'ऑफिस टाइम में बस में जगह मिलना लगभग नामुमकिन होता है. लेकिन नौकरी छोड़ना कोई विकल्प नहीं है इसलिए हमें किसी भी तरह बस में चढ़ना पड़ता है, चाहे धक्का-मुक्की करनी पड़े या दरवाजे से लटककर सफर करना पड़े.'

सड़कों पर पैदल चलना भी मुश्किल

मारुफुल हक ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा, 'भीड़भाड़ सिर्फ बसों तक सीमित नहीं है. सड़कें हर समय जाम रहती हैं, और फुटपाथों पर चलना भी मुश्किल हो जाता है. लेकिन कोई विकल्प नहीं है. हमें इसी शहर में रहना पड़ता है. हम बसों में ठूंस-ठूंस कर सफर करते हैं, ट्रैफिक से जूझते हैं और थक-हारकर अपने काम तक पहुंचते हैं. यह हमारी रोजमर्रा की कड़वी सच्चाई है.'

उन्होंने कहा, 'जिस तरह एक डॉक्टर मरीज की धड़कनें धीमी होने का अंदाजा लगा सकता है, उसी तरह ढाका की स्थिति भी गंभीर होती जा रही है. भारी निवेश के बावजूद कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला. यह शहर अब अव्यवस्था और लापरवाही का शिकार हो गया है.' भारत, पाकिस्तान, ब्राजील, नाइजीरिया, म्यांमार, मलेशिया, इंडोनेशिया, मिस्र और दक्षिण कोरिया जैसे कई देशों ने या तो अपनी राजधानियां बदल दी हैं या बदलने की योजना बना रहे हैं. इसका मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या और यातायात की भीषण समस्या है.

पूर्वोत्तर बांग्लादेश बन सकता है नई राजधानी का विकल्प

डॉ. शम्सुल हक के अनुसार, ढाका को तुरंत एक वैकल्पिक राजधानी की जरूरत है, और इस संदर्भ में पूर्वोत्तर बांग्लादेश एक उपयुक्त विकल्प हो सकता है. उन्होंने कहा, 'कुछ लोगों के लिए यह विचार चौंकाने वाला हो सकता है, जबकि कुछ इसे भावनात्मक रूप से देख सकते हैं. लेकिन एक देश केवल भावनाओं के आधार पर नहीं चल सकता. यदि हमने पहले से योजना बनाई होती, तो पूर्वाचल एक किफायती और व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकता था.'

उन्होंने आगे बताया, 'पूर्वाचल ऊंचे भूभाग पर स्थित है और बाढ़ मुक्त है, जो एक राजधानी के लिए बेहद जरूरी विशेषता है. इसके विपरीत, ढाका के अन्य इलाकों में भूमि सुधार के लिए लैंडफिलिंग करनी पड़ी थी, लेकिन पूर्वाचल में पहले से ही ठोस और मजबूत जमीन उपलब्ध है, जिससे निर्माण लागत भी कम हो जाती है.'

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