'पहले लादेन का सुराग बताने वाले डॉक्टर को रिहा करो', भारत के खिलाफ जहर उगलने पहुंचे बिलावल भुट्टो को अमेरिका की दो टूक
2 मई, 2011 को अमेरिकी सेना के जवानों ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ओसामा बिन लादेन को मार गिराया. इस हमले ने दुनिया को चौंका दिया और पाकिस्तान को शर्मिंदा कर दिया.

America Demand on Osama Bin Laden: अमेरिका में हुए 9/11 हमलों के अपराधी ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी सेना ने पाकिस्तान में मार गिराया था. लादेन को ट्रैक करने में पाकिस्तानी डॉक्टर शकील अफरीदी ने US की खुफिया एजेंसी सीआईए की मदद की थी. ऐसे में अब ये मामला एक बार फिर सुर्खियों में वापस आ गया है.
अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य ब्रैड शेरमैन ने डॉ. अफरीदी की रिहाई की मांग की है. उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के नेतृत्व में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल से कहा कि वे पाकिस्तान की जेल में बंद डॉक्टर को रिहा करने के लिए दबाव डालें.
शेरमैन ने बिलावल भुट्टो जरदारी से कहा कि डॉ. अफरीदी को रिहा करना एक सार्थक कदम होगा, खासकर उन परिवारों के लिए जिन्होंने 9/11 के हमलों में अपने प्रियजनों को खोया है. शेरमैन की ये अपील इस मुद्दे पर अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में लंबे समय से चल रहे तनाव को जाहिर करती है.
कौन हैं डॉ. शकील अफरीदी?
डॉ. शकील अफरीदी पाकिस्तान के खैबर के आदिवासी क्षेत्र में एक सरकारी डॉक्टर थे, जब उनसे टीकाकरण अभियान चलाने के लिए संपर्क किया गया. हालांकि ये सार्वजनिक स्वास्थ्य लाभ के लिए नहीं बल्कि जासूसी के लिए किया गया था. हेपेटाइटिस बी टीकाकरण अभियान की आड़ में डॉ. अफरीदी का काम पेशावर से लगभग 160 किलोमीटर दूर एक सैन्य छावनी शहर एबटाबाद के निवासियों के डीएनए नमूने एकत्र करना था.
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को उम्मीद थी कि ये नमूने वहां रह रहे ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी की पुष्टि करेंगे. नेशनल जियोग्राफिक और बीबीसी की रिपोर्टों के अनुसार अप्रैल 2011 में डॉ. अफरीदी ने उस किलेनुमा घर के द्वार खटखटाए, जहां बिन लादेन छिपा हुआ था. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने कभी बिन लादेन के रिश्तेदारों से डीएनए नमूने प्राप्त किए या नहीं, लेकिन उन्होंने जो जानकारी एकत्र करने में मदद की, उससे सीआईए को आतंकी लादेन के रहने की जगह के बारे में पता चल गया था.
2 मई, 2011 को अमेरिकी सेना के जवानों ने एबटाबाद में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मार गिराया. इस हमले ने दुनिया को चौंका दिया और पाकिस्तान को शर्मिंदा कर दिया.
डॉ. शकील अफरीदी को सुनाई गई 33 साल की सजा
ओसामा बिन लादेन की मौत के बीस दिन बाद 23 मई 2011 को पाकिस्तानी अधिकारियों ने डॉ. अफरीदी को गिरफ़्तार कर लिया. शुरू में उन पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया. 2012 में उन्हें एक अदालत ने लश्कर-ए-इस्लाम को कथित रूप से फंड करने के लिए दोषी ठहराया. इसके बाद उन्हें 33 साल की जेल की सजा सुनाई गई, जिसे बाद में घटाकर 23 साल कर दिया गया.
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