एक क्लिक पर मिलेंगी यूपी की मशहूर बनारसी साड़ियां और कन्नौज का इत्र
उत्तर प्रदेश सरकार अमेजन पोर्टल से करार करने की तैयारी में है और राज्य के बेहतरीन मशहूर उत्पाद मसलन कन्नौज का इत्र, बनारस की साड़ी, भदोही के कालीन या मुरादाबाद का पीतल दुनिया भर में शौकीन लोगों को आसानी से उपलब्ध होंगे.

लखनऊ: वह दिन दूर नहीं जब अमेरिका के कैलिफोर्निया जैसे शहर में बैठा आदमी बनारस की साड़ियों की तलाश में हो तो उसे बस एक क्लिक पर उसकी पसंद की चीज घर के दरवाजे पर उपलब्ध हो जाए. उत्तर प्रदेश सरकार अमेजन पोर्टल से करार करने की तैयारी में है और राज्य के बेहतरीन मशहूर उत्पाद मसलन कन्नौज का इत्र, बनारस की साड़ी, भदोही के कालीन या मुरादाबाद का पीतल दुनिया भर में शौकीन लोगों को आसानी से उपलब्ध होंगे.
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा, 'अमेजन पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत सभी उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध कराये जाएंगे और इसके लिए एक एमओयू सहमति पत्र प्रस्तावित है.'
अमेरिका के दौरे पर गया था तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल 30 अप्रैल से छह मई तक अमेरिका के दौरे पर गया था और वहां निवेश की संभावनाओं को लेकर उत्साहजनक नतीजे हासिल हुए.सिंह राज्य सरकार के प्रवक्ता भी हैं.
अमेजन से हो रही है बातचीत
सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि अमेजन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जय कार्ने के साथ वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट के अन्तर्गत निर्मित उत्पादों की ई-मार्केटिंग अमेजन पोर्टल पर करने के लिए एमओयू करने की संभावनाओं पर चर्चा की गयी. उन्होंने बताया इस प्रकार की व्यवस्था उत्तर प्रदेश में निर्मित खादी उत्पादों के बारे में भी की जा रही है.
इस पहल को लेकर कारोबारियों में उत्साह
बात कारोबारियों की करें तो इस पहल को लेकर उनमें खासा उत्साह है. प्रतापगढ़ के आंवला उत्पादक राजकुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने बाकायदा अपने क्षेत्र में प्रचार शुरू कर दिया है कि अब उनकी आंवला कैण्डी और मुरब्बा आनलाइन आसानी से उपलब्ध रहेगा.भदोही के कालीन कारोबारी इकबाल खान भी ऑनलाइन बिक्री को लेकर प्रदेश सरकार के प्रयासों से प्रसन्न हैं. हालांकि उनका कहना है कि प्रस्ताव को अमली जामा पहनाने के बाद ही पता लगेगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पाद की मांग कितनी है. वह इस बात से खासे आशान्वित हैं कि दुनिया भर में कालीन के शौकीनों की कमी नहीं है और आनलाइन बिक्री से उनके उत्पादों की पहुंच का दायरा बढ़ेगा.
Source: IOCL



























