एक्सप्लोरर

यूपी:  बहुत दिनों तक नहीं चलती है 'मायावती की दोस्ती'

बता दें कि गठबंधन के भविष्य पर लगने वाले कयासों पर विराम लगाते हुए मायावती एलान कर दिया है कि बीएसपी आगे होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले अपने बूते पर ही लड़ेगी. पार्टी की ऑल इंंडिया बैठके बाद मायावती ने ये एलान किया है.

लखनऊ: सपा के साथ गठबंधन लगभग पूरी तरह खत्म कर देने की बसपा प्रमुख मायावती की सोमवार की घोषणा ने एक बार फिर साबित किया है कि गठबंधन जोड़ना और तोड़ना उनके लिए कोई नयी बात नहीं है.

इस साल लोकसभा चुनाव से पहले 12 जनवरी को जब मायावती ने कहा कि देशहित में गेस्ट हाउस कांड को किनारे रखते हुए उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) से दोस्ती की है तो सियासी विश्लेषकों को लगा था कि यह साथ लंबा चलेगा. इस गठबंधन को राज्य की सियासत में ‘गेमचेंजर’ के तौर पर देखा गया, लेकिन महज छह महीनों के अंदर ही मायावती और अखिलेश यादव की राहें जुदा हो गई हैं.

गौर करने वाली बात यह है कि दोनों की दोस्ती कांशीराम-मुलायम के दौर में हुए गठबंधन से भी कम समय के लिए अस्तित्व में रही.

वर्ष 1993 में मुलायम सिंह और कांशीराम जब सपा-बसपा गठबंधन के पहली बार सूत्रधार बने थे तो बीजेपी का रथ रुक गया था. मुलायम और कांशीराम की दोस्ती तकरीबन डेढ़ साल तक ठीकठाक चली थी.

बसपा अध्यक्ष ने सोमवार को इशारा किया कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ गठबंधन से हाल के लोकसभा चुनाव में कोई खास फायदा नही पहुंचा.

मायावती ने ट्वीट किया कि 'पार्टी व मूवमेन्ट के हित में अब बसपा आगे होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले अपने बूते पर ही लड़ेगी.'

वैसे 2019 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन को मनमाफिक सीटें तो नहीं मिलीं, लेकिन 2014 में प्रदेश में शून्य पर अटकी बसपा इस लोकसभा चुनाव में दस सीट जीतने में कामयाब रही.इसके विपरीत गठबंधन की दूसरी साथी सपा लोकसभा चुनाव में केवल पांच सीटों पर सिमट गयी. सपा यहां तक कि अपनी परंपरागत सीटों बंदायू, कन्नौज और फिरोजाबाद से भी हार गई.

मायावती की घोषणा के बाद अब यह साफ हो गया है कि समाजवादी पार्टी के साथ उनका गठबंधन लगभग खत्म हो गया है. हालांकि उन्होंने सीधे-सीधे गठबंधन खत्म करने की बात नहीं की.लोकसभा चुनाव परिणाम आने के चंद दिनों बाद ही मायावती ने कह दिया था कि बसपा उत्तर प्रदेश में 12 सीटों पर उपचुनाव अकेले लड़ेगी.

मायावती ने पहली बार यूं किसी गठबंधन को अचानक नही. तोड़ा है. 1993 में बसपा ने पहली बार सपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था. इसका फायदा यह हुआ कि 1989 में 13 सीट पाने वाली पार्टी 1993 में पांच गुना अधिक 65 सीट जीत गई. हालांकि दो साल बाद गठबंधन टूट गया.

इसके बाद बीजेपी ने मायावती को समर्थन दिया और 1995 में वह पहली बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन चार महीने बाद ही उनका बीजेपी से मोहभंग हो गया और 1996 में उन्होंने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और विधानसभा में 68 सीट प्राप्त कीं.

वर्ष 1997 में मायावती बीजेपी के सहयोग से छह-छह महीने के फार्मूले पर मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन छह महीने बाद बीजेपी के कल्याण सिंह को कुर्सी सौंपने के बाद जल्द ही उन्होंने समर्थन वापस ले लिया.

वर्ष 2002 में विधानसभा में बसपा को 101 सीट मिलीं और मायावती तीसरी बार बीजेपी के सहयोग से मुख्यमंत्री बनीं. तीन महीने के अंदर ही मायावती ने गठबंधन तोड़ दिया और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.

साल 2007 में बसपा को प्रदेश में ऐतिहासिक विजय मिली और मायावती चौथी बार मुख्यमंत्री बनीं.

बेनकाब हुआ मायावती की परिवारवादी राजनीति का चेहरा- बीजेपी

मेरे क्षेत्र में किसी को डरने की जरूरत नहीं, आजाद होकर जिंदगी जीएं सुल्तापुर के लोग- मेनका गांधी

यूपी: आकाशीय बिजली गिरने से 6 की मौत, मवेशियों को भी गंवानी पड़ी जान

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Explained: सोनम और अन्ना के एक ही हथियार, लेकिन दो अलग अंजाम... एक कामयाब और दूसरे की नाकामी की 5 बड़ी वजहें
सोनम और अन्ना के एक ही हथियार! दो अलग अंजाम... एक कामयाब और दूसरे की नाकामी की 5 बड़ी वजहें
बिहार मानसून सत्र: विपक्ष ने मांगा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, RJD बोली- 'सरकार बहरी हो जाए तो…'
बिहार मानसून सत्र: विपक्ष ने मांगा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, RJD बोली- 'सरकार बहरी हो जाए तो…'
जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज के बीच सोनम वांगचुक ने लिखी चिट्ठी, सुप्रिया सुले ने भी RPF एक्शन का जताया विरोध
जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज के बीच सोनम वांगचुक ने लिखी चिट्ठी, सुप्रिया सुले ने भी RPF एक्शन का जताया विरोध
'BJP सरकार नहीं अहंकार की तरह...', मानसून सत्र के पहले दिन अखिलेश यादव ने BJP पर किया हमला
'BJP सरकार नहीं अहंकार की तरह...', मानसून सत्र के पहले दिन अखिलेश यादव ने BJP पर किया हमला

वीडियोज

पुलिस थाने पर शराबी का कब्जा!
Hyundai Alcazar Long Term Review & E20 Petrol Mileage Test | #hyundai #alcazar #review #autolive
Nitin Gadkari Exclusive: E20 Petrol पर क्या बोले? Part 2 | #nitingadkari #e20fuel #autolive
Man Atisundar:🙈radhya से 'I love you' सुनने के लिए तड़पा Pratham, लाख कोशिशों बाद नखरे बरकरार #sbs
Bollywood News: शानदार VFX और रावण बने यश के लुक के खुलासे से 'रामायण' के ट्रेलर ने सोशल मीडिया पर मचाई 'तबाही'। (19.07.26)

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
संसद मार्च से पहले जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज, कॉकरोच जनता पार्टी का पहला रिएक्शन, कहा- 'ये तो एकदम...'
संसद मार्च से पहले जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज, कॉकरोच जनता पार्टी का पहला रिएक्शन, कहा- 'ये तो एकदम...'
'BJP सरकार नहीं अहंकार की तरह...', मानसून सत्र के पहले दिन अखिलेश यादव ने BJP पर किया हमला
'BJP सरकार नहीं अहंकार की तरह...', मानसून सत्र के पहले दिन अखिलेश यादव ने BJP पर किया हमला
Explained: सोनम और अन्ना के एक ही हथियार, लेकिन दो अलग अंजाम... एक कामयाब और दूसरे की नाकामी की 5 बड़ी वजहें
सोनम और अन्ना के एक ही हथियार! दो अलग अंजाम... एक कामयाब और दूसरे की नाकामी की 5 बड़ी वजहें
'संयोग नहीं, बल्कि एक संदेश...', संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले PM मोदी का देश को बड़ा मैसेज, पढ़ें क्या-क्या कहा
'संयोग नहीं, बल्कि एक संदेश...', संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले PM मोदी का देश को बड़ा मैसेज
FIFA World Cup: अर्जेंटीना की हार का सबसे बड़ा गुनहगार कौन? किसकी वजह से टूटा Messi का सपना
अर्जेंटीना की हार का सबसे बड़ा गुनहगार कौन? किसकी वजह से टूटा Messi का सपना
'आप लोगों की तबीयत कैसी है?', सलमान खान की हेल्थ को लेकर परेशान हुए फैंस तो एक्टर ने पूछ डाला सवाल, अब शेयर कर दी ऐसी तस्वीरें
'आपकी तबीयत कैसी है?', सलमान खान की हेल्थ को लेकर परेशान हुए फैंस तो एक्टर ने पूछ डाला सवाल
सोनम वांगचुक की पत्नी फिर पहुंचीं हाई कोर्ट, पिछले फैसले को चुनौती, कहा- 'मेरे पति को अधिकार है कि...'
सोनम वांगचुक की पत्नी फिर पहुंचीं हाई कोर्ट, पिछले फैसले को चुनौती, कहा- 'मेरे पति को अधिकार है कि...'
Sonam Wangchuk Hunger Strike: नारियल पानी, शहद या जूस पिलाकर ही क्यों खत्म कराया जाता है अनशन, क्या है इसकी वजह?
नारियल पानी, शहद या जूस पिलाकर ही क्यों खत्म कराया जाता है अनशन, क्या है इसकी वजह?
Embed widget