Kumbh Mela 2019: जानिए अखाड़ों से जुड़ी खास बातें
Kumbh Mela 2019: आपने कुंभ में आने वाले अखाड़ों के बारे में सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये अखाड़े क्या होते हैं. अखाड़ा शब्द अखंड का ही अपभ्रंश होता है जिसका अर्थ है जिसके खंड ना हों यानि अविभाजित.

प्रयागराज: आपने कुंभ में आने वाले अखाड़ों के बारे में सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये अखाड़े क्या होते हैं. अखाड़ा शब्द अखंड का ही अपभ्रंश होता है जिसका अर्थ है जिसके खंड ना हों यानि अविभाजित. अखाड़ों के साधु संत शास्त्रों के साथ शस्त्र विद्या के भी जानकार होते हैं.
ऐसा कहा जाता है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने अलग अलग परंपराओं वाले साधुओं को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया था और इसी प्रयासों के कारण अखाड़ों की स्थापना हुई थी. ये अखाड़े एकता के प्रतीक होते हैं और समाज को एकजुट करने के लिए, अध्यात्म और नैतिक ज्ञान देने के लिए जाने जाते हैं.
अखाड़ों के धर्मगुरुओं के चयन के दौरान यह ध्यान रखा जाता रहा है कि उनका जीवन सदाचार, संयम, परोपकार, कर्मठता, दूरदर्शिता तथा धर्ममय हो.
इन अखाड़ों को तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है- शैव अखाड़े, वैष्णव अखाड़े और उदासीन अखाड़ा. शैव अखाड़ों के इष्ट भगवान शिव होते हैं, वैष्णव अखाड़ों के इष्ट भगवान विष्णु होते हैं और उदासीन मत का प्रवर्तक गुरु नानक के पुत्र चंद्रदेव जी को माना जाता है.
अखाड़ों की व्यवस्था के लिए पांच लोगों की एक समिति होती है जो ब्रह्मा, विष्णु, शिव, गणेश व शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है. संख्या के हिसाब से जूना अखाड़ा सबसे बड़ा है. इसके बाद निरंजनी और फिर महानिर्वाणी अखाड़ा आता है.
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