'रिट अदालतें सभी समस्याओं का समाधान नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर की याचिका पर कहा
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट की ओर से पारित एक आदेश को चुनौती देने वाली सावुक्कू शंकर की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट का रुख करने को कहा.

सुप्रीम कोर्ट ने एक यूट्यूबर की ओर से दायर उस याचिका को मंगलवार (20 जनवरी, 2026) को खारिज कर दिया, जिसमें उसने एक फिल्म निर्माता के आरोपों को लेकर चेन्नई में सील किये गए उसके कार्यालय को खोलने और जब्त किये गए उपकरण लौटाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था.
फिल्म निर्माता ने यूट्यूबर पर मारपीट और जबरन वसूली करने का आरोप लगाया था. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट की ओर से पारित एक आदेश को चुनौती देने वाली सावुक्कू शंकर की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट का रुख करने को कहा.
पीठ ने शंकर की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट बालाजी श्रीनिवासन से कहा, 'यह मत सोचिए कि रिट अदालत सभी समस्याओं का रामबाण इलाज है. याचिका खारिज की जाती है.' हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के लिए रिट अदालत शब्द का भी इस्तेमाल किया जाता है.
मद्रास हाईकोर्ट ने 30 दिसंबर 2025 को सीलिंग आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और यूट्यूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 105 से 107 के तहत संबंधित मजिस्ट्रेट का रुख करने का निर्देश दिया था.
शंकर ने अपनी याचिका में चेन्नई के अडाम्बक्कम स्थित जय कस्तूरी पार्थसारथी नगर की तीसरी गली में अरंगनाथन इल्लम की दूसरी मंजिल के नंबर 111 में अपने कार्यालय परिसर की सील खोलने और परिसर के प्रवेश द्वार पर पुलिस कर्मियों की तैनाती को रोकने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया था.
मद्रास उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष 26 दिसंबर को स्वास्थ्य कारणों के आधार पर शंकर को 17 आपराधिक मामलों में अंतरिम जमानत दे दी थी. अदालत ने इस बात पर गौर किया था कि तमिलनाडु पुलिस द्वारा उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बार-बार अंकुश लगाना केवल ‘‘कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग’’ ही माना जा सकता है.
शंकर को 13 दिसंबर को उसके आवास से गिरफ्तार किया गया और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया. अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उसने एक फिल्म निर्माता से जबरन वसूली की थी.
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