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BCCI के अध्यक्ष के तौर पर सौरव गांगुली उम्मीदों पर कितना खरे उतरे?

दुनिया के सबसे अमीर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष पद से सौरव गांगुली की विदाई हो गई है. उनकी रुखस्ती को लेकर अब उनके कार्यकाल में उनकी नाकामी को लेकर भी चर्चाएं आम हैं.

 "मैं कभी हार नहीं मानता, ये मेरी खूबी है और अधिक सोचना मुझे नापसंद है." ये बात क्रिकेट की दुनिया में दादा के नाम से मशहूर सौरव गांगुली ने 2008 में क्रिकेट से संन्यास लेने के एलान पर एक इंटरव्यू में कही थी, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष पद को लेकर दादा का ये दावा काम नहीं आया. आखिरकार उन्हें न चाहते हुए भी इस पद को अलविदा कहना पड़ा.

बीसीसीआई के टॉप अधिकारियों की 10 अक्टूबर को हुई दूसरी बैठक में गांगुली को आईपीएल का चेयरमैन बनने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे मना कर दिया. शायद वो बोर्ड अध्यक्ष पद से नीचे का कोई पद स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. आज से 3 साल पहले 2019 में गांगुली बोर्ड के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए थे.

तब उनके क्रिकेट में लाए गए बदलावों और तूफानी अंदाज की वजह से उनसे बहुत आशाएं भी रखीं गई थीं. कहा जा रहा है कि इन पर खरा न उतरने की वजह से ही उनकी इस शीर्ष पद से विदाई हुई है. अब उनकी जगह 18 अक्टूबर मंगलवार को रोजर बिन्नी को इस पद की जिम्मेदारी दी गई है. बिन्नी का1983 का वर्ल्ड कप जिताने में अहम रोल रहा है. 

विराट को कप्तानी से हटाया

बीसीसीआई का अध्यक्ष बनते ही उन्होंने बोर्ड के कामकाज के तरीकों से लेकर भारतीय  क्रिकेट को बदल डालने के दावे किए थे. देश के क्रिकेट प्रेमियों में भी उन्हें लेकर खासा उत्साह था. आखिर दुनिया के सबसे अमीर बोर्ड के अध्यक्ष बनने वाले वो पहले क्रिकेटर जो थे. टीम की कामयाब कप्तानी करने के बाद वो इस टॉप प्रशासनिक पद पर पहुंचे थे.

उनके बीसीसीआई अध्यक्ष पद से विदाई के ताबूत में आखिरी कील विराट कोहली को भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी से हटाने के उनके फैसले और उसके पहले हुए विवाद ने ठोंकी थी.  इससे विराट के दिवाने क्रिकेट फैंस उनसे खासे नाखुश रहे. बोर्ड के सूत्र भी इस बात को पुख्ता करते हैं कि गांगुली की बीसीसीआई अध्यक्ष पद से विदाई के पीछे इन बातों का भी बड़ा हाथ रहा. 

कोहली और साहा के बयान

बीते साल भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान विराट कोहली ने सौरव गांगुली को लेकर एक बयान दिया था. कोहली ने अपने दक्षिण अफ़्रीका दौरे पर जाने से पहले साफ शब्दों में गांगुली को 'झूठा' कहा था. इसके अलावा पश्चिम बंगाल के विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा के दावे का भी गांगुली को बीसीसीआई अध्यक्ष पद से बाहर करने में अहम योगदान रहा. साहा ने कहा था कि गांगुली ने उनको भरोसा दिलाया था कि उनके बीसीसीआई अध्यक्ष रहने तक साहा की भारतीय टेस्ट टीम में जगह पक्की है. साहा के इस दावे ने गांगुली के भारतीय क्रिकेट टीम के चुनाव में दखल होने की एक तरह से पुष्टि कर डाली.

बीसीसीआई संविधान की अनदेखी

बीसीसीआई सूत्रों की माने तो सौरव गांगुली को बीसीसीआई अध्यक्ष के दूसरे कार्यकाल से बाहर करने वाले हालात उन्होंने खुद पैदा किए थे. कहा जा रहा है कि  बीसीसीआई अध्यक्ष के तौर पर ही वह टीम इंडिया की चयन कमेटी की बैठकों में भी शिरकत करते थे. ये बीसीसीआई के संविधान के खिलाफ था.बीसीसीआई संविधान बीसीसीआई अध्यक्ष चयन समिति की बैठक में भाग लेने की इजाजत नहीं देता है.

बीसीसीआई अध्यक्ष की जगह इसके सचिव चयनसमिति की बैठक के आयोजन का प्रभार संभालते हैं. उनके खिलाफ चयन कमेटी के एक सदस्य से बीसीसीआई के सचिव को लिखित जानकारी दी थी. इस सदस्य ने लिखा था कि गांगुली ने इस बैठक में कुछ नहीं कहा, लेकिन फिर भी ये अच्छा नहीं है. 

क्रिकेटरों की मांग की अनदेखी

एक क्रिकेटर से क्रिकेट बोर्ड के टॉप प्रशासनिक पद पर पहुंचे सौरव गांगुली से क्रिकेट खिलाड़ी ये उम्मीद लगा के बैठे थे कि वो उनका दर्द समझेंगे. खिलाड़ी आस लगाए बैठे थे कि गांगुली उनके काम के बोझ को समझ पाएंगे. भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटरों को आस थी कि वो घरेलू क्रिकेट में सुधार की मांग को पूरा करेंगे, लेकिन 3 साल बीसीसीआई अध्यक्ष के तौर पर गांगुली ने इन सब उम्मीदों को पूरा करने की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया.

पूर्व खिलाड़ियों की पेंशन बढ़ाने की मांग भी गांगुली ने अनसुनी कर दी. इस मामले में  बीसीसीआई सचिव जय शाह ने उनका साथ दिया और इनकी पेंशन को बढ़वा कर दोगुना करवा दिया. देश में घरेलू क्रिकेट मौजूदा वक्त में बदहाली का शिकार है. कोविड महामारी भी इसकी एक वजह रही, लेकिन अच्छा खासे पैसे खींचने वाले आईपीएल का आयोजन देश से बाहर संयुक्त अरब अमीरात हुआ.

इसके पीछे भी बीसीसीआई के अध्यक्ष का फैसला रहा. साल 2020 में कोविड-19 महामारी की वजह से इसका आयोजन संयुक्त अरब अमीरात में दुबई, शारजाह और अबुधाबी के खाली स्टेडियमों में हुआ था. इस दौरान गांगुली के एक पत्रकार से करीबी रिश्ते होने की बात भी सामने आई थी. विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा  को इस पत्रकार ने धमकी भरा मैसेज भेजा था. बीसीसीआई इस पत्रकार पर तामउम्र के लिए बैन लगाने वाली थी, लेकिन गांगुली के हस्तक्षेप की वजह से इस पर केवल दो साल का ही बैन लगा.

मार्केटिंग मैनेजर होने का आरोप

बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने सौरव गांगुली की खुले तौर पर आलोचना की थी. गृहमंत्री अमित शाह के घर पर बीसीसीआई पदाधिकारियों के चुनाव के लिए एक बैठक हुई थी. इस बैठक में ही पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने गांगुली को आड़े हाथों लिया था. उन्होंने कहा था, "भारतीय क्रिकेट के इतिहास में यह पहला मौका है जब बोर्ड अध्यक्ष क्रिकेट की जगह अपने ब्रांड  के प्रमोशन में लगे हैं.”  इसी दौरान उन्होने साफ कह दिया था कि वो और उनका गुट बीसीसीआई अध्यक्ष पद के लिए गांगुली को सपोर्ट नहीं करेगा.

दरअसल बीसीसीआई का ऑनलाइन गेमिंग ऐप 'ड्रीम-11' के साथ करार था. बावजूद इसके बीसीसीआई अध्यक्ष रहते हुए गांगुली ऑनलाइन गेमिंग ऐप 'माय 11 सर्किल का प्रमोशन कर रहे थे. इससे पहले बीसीसीआई के अध्यक्ष इस तरह के ब्रांड प्रमोशन करते नहीं देखे गए थे. गांगुली की देखादेखी भारतीय क्रिकेट टीम के विराट कोहली सहित कई अन्य खिलाड़ी भी ऑनलाइन गेमिंग ऐप का प्रमोशन करने लगे थे. 

इसे लेकर एक क्रिकेट फैन ने मद्रास उच्च न्यायालय में शिकायत की थी. इसके बाद कोर्ट की मदुरई बेंच ने कोहली और गांगुली को नोटिस भेजा था. अभी भी कई क्रिकेट के सितारे ऑनलाइन गेमिंग ऐप के प्रमोशन में लगे हैं. क्रिकेट बोर्ड का मानना है कि इससे क्रिकेट के खेल के गौरव को ठेस पहुंची है. 

 क्या बीजेपी बनी वजह

साल 2019 में सौरव गांगुली  कर्नाटक के पूर्व भारतीय क्रिकेटर बृजेश पटेल को पीछे छोड़  बीसीसीआई अध्यक्ष पद पर काबिज हुए थे. जबकि उस वक्त इस पद पर पटेल के आने के पूरे आसार थे. तब बृजेश पटेल आईपीएल चैयरमैन पद पर संतोष करना पड़ा था.कहा जा रहा था कि पश्चिम बंगाल के चुनाव से पहले गांगुली ने बीजेपी सरकार से बीजेपी में शामिल होने की जबान दी थी. ऐसी ही कुछ दावे टीएमसी की ओर से भी किए जा रहे हैं.

तृणमूल कांग्रेस ने कहा था कि सौरव गांगुली को बीसीसीआई अध्यक्ष पद का कार्यकाल बीजेपी में शामिल न होने के अपने वादे से पीछे हटने की वजह से गंवाना पड़ा.

दूसरी तरफ बृजेश पटेल ने इस बार शायद गांगुली से अपना पिछली बार का हिसाब पूरा कर लिया लगता है, क्योंकि बीसीसीआई के नए अध्यक्ष रोजर बिन्नी के पटेल के दोस्त हैं. दरअसल बीसीसीआई में पद छोड़ने वाले अध्यक्ष के ही आगे आने वाले अध्यक्ष का नाम प्रस्तावित करने का रिवाज सा है, लेकिन गांगुली ने कहीं रोजर बिन्नी का नाम नहीं लिया था.

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