भारतीय जहाजों को कैसे मिली होर्मुज से आने की इजाजत? जयशंकर ने बताया, बोले- ये तो शुरुआत, अभी तो हमारे और...
डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि यह एक स्वागत करने योग्य कदम है. भारत के और भी कई जहाज वहां मौजूद हैं और ईरान से लगातार बात चल रही है.

अमेरिका-इजरायल और ईरान में छिड़ी जंग की वजह से तेल और गैस को लेकर पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है. खासतौर पर भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में. अरब देश होर्मुज जलडमरुमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए तेल और गैस इंटरनेशनल मार्केट में भेजते हैं, लेकिन ईरान ने यह रास्ता बंद कर दिया है. हालांकि, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि सिर्फ 'दुश्मन और उसके सहयोगियों' के टैंकर और जहाजों को यहां से जाने की इजाजत नहीं है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की वजह से गैस और तेल के कई जहाज फंसे हुए हैं, लेकिन ईरान ने भारत के साथ दोस्ती निभाई है और भारत के दो जहाज शिवालिक और नंदा देवी 92,712 मिट्रिक टन एलपीजी के साथ भारत पहुंचने वाले हैं. विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बताया है कि कैसे भारतीय जहाजों को होर्मुज के जरिए आने की इजाजत मिली है.
फाइनेंशियल टाइम्स के साथ बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि ईरान की ओर से भारतीय झंडे वाले दो जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत देना दर्शाता है कि दोनों देशों के राजनयिक प्रयासों से सकारात्मक परिणाम मिले हैं. जयशंकर ने कहा कि निश्चितरूप से भारत के नजरिए से यह बेहतर है कि कुछ न करने के बजाय हम तर्क से काम लें. आपस में तालमेल बिठाएं और कोई समाधान निकालें. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद किए जाने के बाद से विदेश मंत्री जयशंकर ने चार बार ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात की.
जयशंकर ने बताया कि भारत को अपने जहाजों को होर्मुज के रास्ते जाने की इजाजत ईरान के साथ किसी डील के बदले में नहीं मिली है. ईरान ने इसके बदले में भारत से कोई मांग नहीं की है. उन्होंने कहा कि भारत और ईरान का एक खास रिश्ता है.
जयशंकर ने कहा कि यह तो अभी शुरुआत है, भारत के और भी जहाज वहां हैं. यह एक स्वागत करने योग्य कदम है और इस पर ईरान के साथ लगातार बात चलती रहेगी. विदेश मंत्री ने यह भी साफ किया कि भारत के झंडे वाले जहाजों के लिए यह ईरान के साथ कोई एकमुश्त या आम व्यवस्था (Blanket Arrangement) नहीं है, हर जहाज की आवाजाही एक अलग घटना होती है. जयशंकर से पूछा गया कि क्या यूरोपीय देश भी भारत जैसी व्यवस्था अपना सकते हैं तो उन्होंने कहा कि हर देश का ईरान के साथ रिश्ता अपने आप में महत्वपूर्ण है. उसकी सीधे तुलना करना मुश्किल है.
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Source: IOCL


























