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अपना गोत्र बताने से ममता बनर्जी को फायदा होगा या नुकसान?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के बीच ममता बनर्जी ने अपना गोत्र बताया है. इसको लेकर बीजेपी हमलावर है.

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपने चुनाव क्षेत्र नंदीग्राम में वोटिंग से ऐन पहले आखिरकार अपना गोत्र बताने पर मजबूर क्यों होना पड़ा? क्या यह सिर्फ मजबूरी है या बीजेपी को जवाब देने के लिए मजबूत जातिवादी हथकंडा है ? बड़ा सवाल यह भी कि क्या ममता को अहसास हो चुका है कि बीजेपी ने उन्हें नंदीग्राम में घेर लिया है और वोटों का ध्रुवीकरण उनकी जीत को थोड़ा मुश्किल बना सकता है. हालांकि ममता के इस 'गोत्र कार्ड' से बीजेपी को उनके खिलाफ बैठे बिठाये ही एक नया मुद्दा मिल गया है और उसने पलटवार का कोई मौका नहीं छोड़ा. नंदीग्राम में एक अप्रैल को मतदान है और वहाँ मंगलवार की शाम से प्रचार खत्म हो चुका है.

नंदीग्राम से जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक इस बीच का जो समय बचा है उसमें बीजेपी ने व्हिस्पर कंपैन के जरिये इसे अपने पक्ष में भुनाने के लिए पूरी ताकत लगा रखी है. बता दें कि बंगाल में व्हिस्पर कैंपेन बीजेपी का आजमाया हुआ मजबूत हथियार है जिसमें वोटिंग से पहले के 24 घंटों में आम व कम शिक्षित मतदाताओं को समाज के उन प्रभावी लोगों के जरिये अपने पक्ष में किया जाता है, जिनकी बात को वे टाल नहीं सकते. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इसे कारगर तरीके से अपनाया था जिसका उसे फायदा भी मिला.

हालांकि यह कहना मुश्किल है कि बीजेपी की धर्म आधारित राजनीति का जवाब देने के लिये ममता ने अपना जो गोत्र कार्ड खेला है, उसका उन्हें किस हद तक लाभ मिलेगा. लेकिन ममता के करीबी पत्रकारों-लेखकों का दावा है कि "दीदी ने बिल्कुल सही वक्त पर सही तीर दागा है जो सही निशाने पर लगा है. जो बीजेपी नेता अब तक उन्हें 'ममता बेगम' बताकर उन्हें सिर्फ मुसलमानों का हितैषी साबित करने में जुटे थे,वे अब बैकफुट पर आ चुके हैं."

नंदीग्राम के चुनाव पर नजर रखे राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि बीजेपी ने आक्रामक प्रचार के जरिये यह जताने की कोशिश की है कि यहां पर वो तृणमूल कांग्रेस पर भारी है. लिहाज़ा ममता ने भी इसे हल्के में न लेते हुए आखिरी के तीन दिन तक यहीं डेरा डाले रखा और दूरदराज के गांवों में जाकर अपनी स्थिति को मजबूत किया है. पहले चंडी पाठ,फिर मंदिरों की परिक्रमा और अब अपना गोत्र बताकर ममता ने बड़ी चतुराई से वोटों के ध्रुवीकरण को काफी हद तक रोकने की कोशिश की है

इसके उलट बीजेपी के फायरब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने ममता के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि वह चुनाव हारने के डर से गोत्र बताती हैं. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी अब आप मुझे बात दीजिए कि कहीं रोहिंग्या और घुसपैठियों का गोत्र भी शांडिल्य तो नहीं है.

उन्होंने आगे कहा, ''मोदी जी का डर है कि गोत्र भी बता दिया. चंडी जाप भी करवा दिया. ममता बनर्जी और राहुल गांधी का केवल एक ही गोत्र है वोट बैंक. ये सीजनल मंदिर जाते हैं. धन्य हैं मोदी जी, जिन्होंने राहुल को जनेऊ और ममता को गोत्र बताने पर मजबूर कर दिया.''

वहीं तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय ने इसके जवाब में कहा, ''हमें बीजेपी का काउंटर करने के लिए ये सब करना पड़ेगा. हम बीजेपी से कम हिन्दू नहीं हैं, लेकिन हम बीजेपी के हिन्दुत्व वाली राजनीति नहीं करते हैं. उसको हम बंगाल से निकालेंगे. ममता चंडी पाठ भी करती हैं और लाइल्लाह भी करती हैं. हमें बीजेपी के दबाव में धार्मिक प्रतीकवाद की राजनीति करनी पड़ रही है.''

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