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बंगाल चुनाव: क्या नंदीग्राम में बदल रही है चुनावी हवा ?

स्वपन कुमार दास अपने बारे में बताते हैं, "मैं सीपीआईएम का स्वाभाविक समर्थक रहा हूं, लेकिन बदलते समय के साथ मुझे बाएं से दाएं स्थानांतरित होने के लिए मजबूर किया गया है. मैं वाम में था और अब मैं राम के साथ हूं."

आमार नाम, तोमार नाम, सिंगुर भांगुड़, नंदीग्राम. नंदीग्राम का यह नारा सन् 2007 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लगाया था. उसके बाद भूमि ग्रहण अधिग्रहण आंदोलन में जीत हासिल करके बड़ी सफलता हासिल की थी और 2011 में मुख्यमंत्री बन कर राइटर बिल्डिंग में गई थीं. नंदीग्राम की भूमिका इतिहास के पन्नों में दर्ज है, लेकिन एक बार फिर अब नंदीग्राम इतिहास रचने को तैयार है, पिछले दशक तक जो लोग वाम मोर्चा का समर्थन करते थे, यहां तक कि वाममोर्चा के प्रार्थी थे वह अब पाला बदल रहे हैं.

बांग्ला भाषा में एक कहावत है- अभी बाम, बाद में राम. इसका मतलब है कि अभी वह मोर्चा का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद राम का समर्थन करेंगे. नंदीग्राम एक जमाने में वाममोर्चा का गढ़ रहा.

लगातार पंचायत में जीत हासिल की. विधानसभा में जीत हासिल की. लोकसभा में जीत हासिल की. नंदीग्राम ने कभी भी तृणमूल कांग्रेस को न निराश किया और ना ही साथ छोड़ा. इतिहास बदल चुका है. नंदीग्राम से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सेनापति शुभेंदु अधिकारी उन्हीं के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे हैं. दावा कर रहे हैं कि 50,000 से ज्यादा वोटों से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम में हराएंगे. पूरे नंदीग्राम में चारों ओर इस समय झंडे लग रहे हैं. कहीं तृणमूल कांग्रेस के तो कहीं बीजेपी के चुनाव चिन्ह और इन सबके बीच में बड़ी-बड़ी तस्वीर है, लेकिन एक बोर्ड है, जो आपका ध्यान कई गुना ज्यादा आकर्षित करेगा. यह बोर्ड कहता है शुभेंदु अधिकारी भूमि पुत्र हैं और ममता बहिरागत जिसका मतलब है ममता बनर्जी बाहर से आई हैं.

वाम मोर्चा के जितने भी समर्थक थे. उन्होंने धीरे-धीरे पाला बदला. पाला इस कदर बदला कि नंदीग्राम से उनका अस्तित्व खत्म होता चला गया. लेकिन अब नंदीग्राम भी अपना रंग बदल रहा है. 2007 में जिस नंदीग्राम ने इतिहास के पन्नों में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन किया था. उसी नंदीग्राम में अब लाल की जगह केसरिया झंडा लेने में लोग हिचकिचा नहीं रहे हैं. यह वह लोग हैं जो किसी जमाने में वाम मोर्चा के उम्मीदवार या पंचायत के सदस्य हुआ करते थे, लेकिन अब लाल झंडे से दूर हो चुके हैं.

प्रदीप कुमार बाघ कहते हैं, "मैं 2018 तक सीपीआईएम में था, लेकिन अब BJP में शामिल हो गया हूं, क्योंकि उन्होंने हमारे साथ मारपीट की और फिर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया. टीएमसी के क्षेत्र में केवल माफिया राज है और वोट देने गए लोगों को पार्टी के लोगों ने पीटा. इसलिए मैंने फैसला किया कि बदलाव के लिए हम BJP का समर्थन करने आए हैं.

उत्तम दास का कहना है, "मैं एक हार्ड कोर वामपंथी था और अब एक हार्ड कोर बीजेपी कार्यकर्ता हूं. टीएमसी पार्टीजनों ने सारा पैसा ले लिया और सरकारी खजाने को लूट लिया. हम इससे थक चुके हैं. उन्होंने केवल अपने परिवार और परिजनों की देखभाल की. हमें भी नहीं सुना गया. अब यह बोलने और टीएमसी के खिलाफ लड़ने का समय है."

शम्भू दास ने बताया, "पंचायत चुनावों में जगेश्वर घोष और अपू मन्ना मारे गए. हम दीदी से नाराज़ हैं. क्योंकि उन्होंने वादे किए थे, लेकिन असफल रहीं. 2008 में हमने उन्हें पंचायत और जिला परिषद का तोहफा दिया और फिर 2011 में अपने लेखकों को भी उपहार दिया. लेकिन हमें क्या मिला. हमें पंचायत चुनावों में पीटा गया. तब मैंने 2014 में मोदी के साथ भाजपा में शामिल होने का फैसला किया. मुझे लगता है कि मोदी एक अच्छे इंसान हैं. कम से कम जिन लोगों ने नंदीग्राम में टीएमसी के लिए मतदान किया था, वे अब विश्वासघात महसूस कर रहे हैं. अब हम सभी को बताना चाहते हैं कि दीदी की स्कूटी को इस बार उनके घर भेजा जाएगा."

शम्भू दास ने कहा, "यह सच है कि जो लोग टीएमसी में थे, वे अब भाजपा में हैं, लेकिन आप यह नहीं भूल सकते कि रामायण में भी राम को रावण को मारने के लिए विभीषण से हील लेना पड़ा था. इसलिए अब हमें ममता से छुटकारा पाने के लिए शुभेंदु को पार्टी में लाना होगा. शुभेंदु ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है."

स्वपन कुमार दास अपने बारे में बताते हैं, "मैं सीपीआईएम का स्वाभाविक समर्थक रहा हूं, लेकिन बदलते समय के साथ मुझे बाएं से दाएं स्थानांतरित होने के लिए मजबूर किया गया है. मैं वाम में था और अब मैं राम के साथ हूं."

2018 पंचायत के नतीजे

जिला परिषद

5 सीटें -सभी 5 पर टीएमसी की जीत

पंचायत समिति नंदीग्राम 1 – सभी 30 सदस्य टीएमसी के जीते

नंदीग्राम 2 - सभी 20 सदस्य टीएमसी के जीते

ग्राम पंचायत नंदीग्राम 1 – सभी 10 ग्राम पंचायत में टीएमसी की जीत

नंदीग्राम 2 - सभी 7 ग्राम पंचायत में टीएमसी की जीत

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