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Waqf Act: वक्फ बाय यूजर, बोर्ड में गैर-मुस्लिम मेंबर... सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने दाखिल किया जवाब, जानें क्या कहा?

केंद्र ने कहा है कि किसी भी याचिका में कानून से किसी व्यक्ति पर अन्याय होने की जानकारी नहीं दी गई है. इस कानून को किसी धर्म के खिलाफ बताना भी सही नहीं है.

वक्फ संशोधन एक्ट मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है. केंद्र ने कानून का बचाव करते हुए उस पर रोक नहीं लगाने की मांग की है. केंद्र ने कहा है कि कोर्ट को कानून पर विचार कर अंतिम फैसला लेना चाहिए. कुछ धाराओं पर रोक लगा देना सही नहीं. वक्फ बाय यूजर के रजिस्ट्रेशन और वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों को जगह देने जैसे प्रावधानों को सरकार ने उचित बताया है.

5 मई को चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच को मामले पर सुनवाई करनी है. इससे पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने कानून की कुछ धाराओं के अमल पर अंतरिम रोक का संकेत दिया था. हालांकि, सरकार के अनुरोध पर कोर्ट ने रोक का आदेश नहीं दिया था. कोर्ट ने सरकार के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया था कि फिलहाल किसी भी तरह की वक्फ संपत्ति को डिनोटिफाइ नहीं किया जाएगा. साथ ही, वक्फ बोर्ड और वक्फ काउंसिल में अभी किसी नए सदस्य को जगह नहीं दी जाएगी.

अब केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन कानून का बचाव करते हुए जवाब दाखिल किया है. इसमें कहा गया है कि कानून बनने से पहले संयुक्त संसदीय कमेटी (JPC) ने लंबी चर्चा की. संसद के दोनों सदनों ने बहस के बाद इसे पारित किया है. संसद से बने कानून की कोर्ट समीक्षा कर सकता है, लेकिन कोर्ट का फैसला होने तक कानून संवैधानिक माना जाता है. ऐसे में कानून की कुछ धाराओं पर रोक लगाना गलत होगा.

केंद्र ने कहा है कि किसी भी याचिका में कानून से किसी व्यक्ति पर अन्याय होने की जानकारी नहीं दी गई है. इस कानून को किसी धर्म के खिलाफ बताना भी सही नहीं है. इसके विपरीत यह कानून सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि वक्फ की संपत्तियों का सही उपयोग हो सके. कानून के प्रावधान 3(1)(r) में वक्फ बाय यूजर के लिए किसी ट्रस्ट, डीड या दूसरे दस्तावेजी सबूत की जरूरत नहीं रखी गई है. सिर्फ रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाया गया है. वक्फ कानून के 100 साल के इतिहास में वक्फ बाय यूजर को रजिस्ट्रेशन के आधार पर ही मान्यता मिलती आई है. संशोधित कानून इसी के मुताबिक है.

हलफनामे में कहा गया है कि हिन्दू धार्मिक संस्थाओं से वक्फ बोर्ड की तुलना गलत है. वक्फ हमेशा धार्मिक काम के लिए नहीं होता. कई लोग समाजिक और धर्मनिरपेक्ष उद्देश्य के लिए भी संपत्ति वक्फ करते हैं. वक्फ बोर्ड के कामकाज से मुस्लिमों के अलावा गैर-मुस्लिमों की संपत्ति भी प्रभावित होती है. ऐसे में, वक्फ बोर्ड और वक्फ काउंसिल में गैर मुस्लिम सदस्यों की मौजूदगी उनके काम को ज्यादा समावेशी बनाएगी. 22 में से अधिकतम 2 सदस्य ही गैर-मुस्लिम होंगे. 

सरकार और वक्फ बोर्ड के बीच के भूमि विवाद में कलक्टर को सर्वे का जिम्मा देने का भी केंद्र ने बचाव किया है. केंद्र ने कहा है कि सरकारी जमीन को किसी धार्मिक समुदाय का बताने की इजाजत नहीं दी जा सकती. कई बार जान-बूझकर या गलती से किसी सरकारी संपत्ति को वक्फ संपत्ति बता दिया जाता है. संशोधित कानून में भूमि से जुड़े रिकॉर्ड को सही करने की व्यवस्था बनाई गई है.

 

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करीब 2 दशक से सुप्रीम कोर्ट के गलियारों का एक जाना-पहचाना चेहरा. पत्रकारिता में बिताया समय उससे भी अधिक. कानूनी ख़बरों की जटिलता को सरलता में बदलने का कौशल. खाली समय में सिनेमा, संगीत और इतिहास में रुचि.
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