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UCC Issue: समान नागरिक संहिता पर संसदीय समिति की बैठक में नॉर्थ ईस्ट के लिए बीजेपी ने दी खास सलाह, विपक्ष ने क्या कहा?

UCC Meeting: समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सोमवार (03 जुलाई) को संसदीय समिति की एक बैठक हुई. बीजेपी सांसद सुशील मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई मुद्दों को लेकर चर्चा की गई.

Parliamentary Committee Meeting: बीजेपी सांसद सुशील कुमार मोदी ने उनकी अध्यक्षता में हुई एक संसदीय समिति की बैठक में समान नागरिक संहिता बनने की स्थिति में पूर्वोत्तर और अन्य क्षेत्रों के आदिवासियों को इसके दायरे से बाहर रखने की वकालत की. वहीं, कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों ने इस विवादित मुद्दे पर विचार-विमर्श शुरू करने के विधि आयोग के कदम पर सवाल उठाया. सूत्रों ने यह जानकारी दी.

विभाग-संबंधित कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्यास संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने समान नागरिक संहिता पर सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक की. इसमें विधि कार्य विभाग, विधायी विभाग और भारत के विधि आयोग के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था.

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस, डीएमके सहित ज्यादातर विपक्षी दलों के सदस्यों ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर जोर दिए जाने को अगले लोकसभा चुनाव से जोड़ा. वहीं, शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि कई देशों में समान नागरिक संहिता है और उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों की चिंताओं पर भी ध्यान देने को कहा. राउत ने इस विषय पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू करने के समय को लेकर भी सवाल उठाए.

इन सांसदों ने लॉ कमिशन के कदम पर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा और डीएमके सांसद पी विल्सन ने यूसीसी पर लोगों और अन्य हितधारकों से सुझाव आमंत्रित करने के विधि आयोग के कदम पर सवाल उठाते हुए अलग-अलग लिखित बयान सौंपा. बैठक में विधि आयोग का प्रतिनिधित्व उसके सदस्य सचिव के विस्वाल ने किया.

तन्खा और विल्सन ने कहा कि ‘परिवार कानून में सुधार को लेकर 31 अगस्त 2018 के विधि आयोग के परिचर्चा पत्र को देखा है और इसमें यूसीसी को इस स्तर पर न तो जरूरी और न ही वांछनीय बताया गया है. कांग्रेस सांसद एवं समिति के सदस्य विवेक तन्खा ने अपने ट्वीट में संसदीय समिति के अध्यक्ष सुशील कुमार मोदी को तीन जुलाई को पत्र लिखे पत्र को साझा किया.

पत्र में तन्खा ने कहा कि ‘परिवार कानून में सुधार’ को लेकर 31 अगस्त 2018 के परिचर्चा पत्र को देखने के बाद उनका मानना है कि इस परिचर्चा पत्र को सभी पक्षकारों के विचारार्थ अधिसूचित किया गया था और इसलिए लोगों की राय प्राप्त करने के बाद एक रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में न केवल विधि आयोग के विचार सामने आए, बल्कि उन लोगों के भी विचार सामने आए, जिन पर इसका प्रभाव पड़ेगा.

तन्खा ने कहा कि उक्त परिचर्चा पत्र में कहा गया था कि समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर विचार करते हुए भारत के संविधान पर सम्पूर्णता से विचार किया जाना चाहिए तथा इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि एकरूपता लाने से संविधान के कई प्रावधानों और खास तौर पर छठी अनुसूची और अनुच्छेद 37 (ए) से (आई) का उल्लंघन होगा. 

वहीं, डीएमके सांसद एवं समिति के एक अन्य सदस्य पी विल्सन ने अपने ट्वीट में कहा, ‘‘ आज विधि एवं न्याय पर संसदीय समिति की बैठक से पहले मैंने समिति के अध्यक्ष सुशील मोदी को समान नागरिक संहिता पर विधि आयोग के आगे लोक विचार-विमर्श करने को लेकर पत्र सौंपा.’’

उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर आश्चर्य है कि जब उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले 21 वें विधि आयोग ने विस्तृत अध्ययन कराया था और 2018 में यह निष्कर्ष दिया था कि यूसीसी वांछनीय नहीं है, तब वर्तमान विधि आयोग इस मुद्दे को फिर से खोलने और आगे विचार-विमर्श करने पर जोर दे रहा है.

विल्सन ने सवाल किया कि क्या वे 21वें विधि आयोग के परिचर्चा पत्र को कमतर करना चाहते हैं? इस बीच, सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस के मणिकम टैगोर ने इस कदम की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे आगामी चुनाव से जोड़ा.

महेश जेठमलानी ने की यूसीसी की वकालत

बीजेपी के महेश जेठमलानी ने हालांकि यूसीसी की पुरजोर वकालत की और संविधान सभा में इस विषय पर हुई चर्चा का हवाला दिया. सूत्रों ने बताया कि विधि से संबंधित संसदीय समिति के प्रमुख सुशील मोदी ने पूर्वोत्तर, अन्य क्षेत्रों के आदिवासियों को किसी भी प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की हिमायत की. सूत्रों ने बताया कि समिति की बैठक में इस ओर ध्यान दिलाया गया था कि कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में बिना उनकी सहमति के केंद्रीय कानून लागू नहीं होते हैं.

उन्होंने बताया कि बैठक में 31 सदस्यीय समिति के 17 सदस्य मौजूद थे. विधि आयोग के अधिकारियों ने कहा कि 13 जून के बाद से अब तक विचार- विमर्श के दौरान 19 लाख सुझाव प्राप्त हुए हैं. यह कवायद 13 जुलाई तक जारी रहेगी.

गौरतलब है कि समान नागरिक संहिता लंबे समय से बीजेपी के तीन प्रमुख चुनावी मुद्दों में से एक रही है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में भोपाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की पुरजोर वकालत करते हुए सवाल किया था कि ‘‘दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चलेगा?’’ उन्होंने कहा था कि इस संवेदनशील मुद्दे पर मुसलमानों को उकसाया जा रहा है.

विपक्षी पार्टियों ने समान नागरिक संहिता से जुड़़ी टिप्पणी को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए उनपर महंगाई एवं बेरोजगारी जैसे असल मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास करने का आरोप लगाया था. एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल किया था कि क्या यूसीसी के नाम पर देश के बहुलतावाद को छीन लिया जायेगा?

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