शरद पवार के घर हुए चप्पल आंदोलन का सच क्या है? पुलिस ने बताई ये बड़ी बात
आंदोलन के समय आरोपियों ने खुद की चप्पल का इस्तेमाल करने का फैसला किया गया था, क्योंकि अलग से चप्पल लेकर जाने पर मंशा के पता लगने का डर था. पुलिस को संदेह है की यह आंदोलन पब्लिसिटी पाने के उद्देश से किया गया.

NCP नेता शरद पवार के घर हुए चप्पल फेंक आंदोलन के मामले में पुलिस ने 81 लोगों के खून के नमूने लिए गए थे, जिसने से 11 लोगों के नमूनों में शराब के अंश मिले हैं. मुंबई पुलिस (Mumbai Police) सूत्रों ने बताया की 7 अप्रैल को एडवोकेट गुणरत्न सदावरते के घर एक मीटिंग हुई थी, जिसमें 20-25 लोग आए थे.
इस मीटिंग के बाद चिकन की दावत भी हुई, इसमें आंदोलन के आखिरी पड़ाव में शरद पवार के घर आंदोलन करना का निर्णय लिया गया था. आंदोलन के लिए आज़ाद मैदान से क़रीबन 36 से 40 लोग बेस्ट की बस से महालक्ष्मी पहुंचे थे वहां से वो पैदल आगे बढ़े. इसके अलावा कई लोग टेक्सी के माध्यम से महालक्ष्मी मंदिर पहुंचे थे.
बताया जा रहा है कि आंदोलन के समय आरोपियों ने खुद की चप्पल का इस्तेमाल करने का फैसला किया गया था, क्योंकि अलग से चप्पल लेकर जाने पर मंशा के पता लगने का डर था. पुलिस को संदेह है कि यह आंदोलन पब्लिसिटी पाने के उद्देश से किया गया, इसकी जांच अभी चल रही है.
इसके अलावा एडवोकेट सदावरते ने ST कर्मचारियों से पैसे लिए थे, उसके बारे में पुलिस को इनकी तरफ से बताया गया की इन पैसों से लोगों को आज़ाद मैदान में खाने पीने की व्यवस्था कराई गई थी. पुलिस को यह भी पता चला है की आज़ाद मैदान में कई NGO तमाम आंदोलन में सहभागियों के भोजन की व्यवस्था करती थी.
एक अधिकारी ने बताया की हम उन पैसों के बारे में भी पता लगा रहे हैं जो वकील सदावरते को या उनके सहयोगियों को दिए गए थे. ये ज्यादातर पैसे कैश में आए थे.
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