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ममता बनर्जी को झटका: राज्यसभा में भाषण के दौरान इस्तीफा देने वाले दिनेश त्रिवेदी कौन हैं?

दिनेश त्रिवेदी ने अपने इस्तीफे का ऐलान आज राज्यसभा में अपने स्पीच के दौरान किया. त्रिवेदी पिछले एक महीने से लगातार बीजेपी से संपर्क में थे. ये तय माना जा रहा है कि वह अब टीएमसी छोड़ रहे हैं और कुछ दिनों में बीजेपी में शामिल हो जाएंगे.

नई दिल्ली: बंगाल में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, नेताओं के पाला बदलने का खेल भी तेज होता जा रहा है. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दिल्ली से आज बड़ा झटका लगा. टीएमसी के दिग्गज नेता दिनेश त्रिवेदी ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि मेरे राज्य में हिंसा हो रही है, इससे मुझे घुटन हो रही है. दिनेश त्रिवेदी ने अपने इस्तीफे का ऐलान आज राज्यसभा में अपने स्पीच के दौरान किया.

इस्तीफे के साथ ही कयास लगाए जा रहे हैं कि त्रिवेदी जल्द ही बीजेपी ज्वाइन कर सकते हैं. दिनेश त्रिवेदी पिछले एक महीने से लगातार बीजेपी से संपर्क में थे. ये तय माना जा रहा है कि वह अब टीएमसी छोड़ रहे हैं और कुछ दिनों में बीजेपी में शामिल हो जाएंगे.

अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए दिनेश त्रिवेदी ने कहा, 'बंगाल में जिस प्रकार से हिंसा हो रही है, मुझे यहां बैठे-बैठे बहुत अजीब लग रहा है. मुझसे ये देखा नहीं जा रहा है. हम करें तो क्या करें. हम एक जगह तक सीमित हैं. पार्टी के भी कुछ नियम होते हैं. इसलिए मुझे भी घुटन महसूस हो रही है. उधर अत्याचार हो रहा है. तो आज मेरे आत्मा की आवाज ये कह रही है कि यहां बैठे-बैठे अगर आप चुप रहो और कुछ नहीं कहो, उससे अच्छा है आप यहां से त्यागपत्र दो. मैं यहां घोषणा करता हूं कि मैं राज्यसभा से इस्तीफा दे रहा हूं.'

कौन हैं दिनेश त्रिवेदी? तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेता दिनेश त्रिवेदी 2011 से 2012 तक केंद्र सरकार में रेल मंत्री रहे. साल 2009 में पहली बार बैरकपुर से टीएमसी के लोकसभा सांसद बने. साल 1990 में पहली बार राज्यसभा के सांसद बने. त्रिवेदी दो बार लोकसभा और तीन बार राज्यसभा के सांसद रहे.

कांग्रेस और जनता दल में रहने के बाद जब साल 1998 में ममता बनर्जी ने टीएमसी बनायी तो उनके साथ हो गए. करीब 3 दशक से राजनीति में सक्रिय त्रिवेदी को ममता बनर्जी का बेहद खास माना जाता था. साल 2001 से लेकर 2006 के दौरान जब ममता बनर्जी के राजनीति ग्राफ नीचे गिरा हुआ था त्रिवेदी उनके साथ खड़े रहे.

साल 2001 में ममता बनर्जी ने उन्हें पहली बार राज्यसभा भेजा. त्रिवेदी राज्यसभा जाने के पीछे भी उनका राजनीतिक दिमाग काम आया. ममता बनर्जी के पास सिर्फ 60 विधायक थे. इसके बावजूद वे राज्यसभा जाने में सफल रहे. साल 2006 के सिंगूर आंदोलन के दौरान दिनेश त्रिवेदी टीएमसी सुप्रीमो के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे. ममता बनर्जी ने बंगाल मोर्चा संभाला था त्रिवेदी उनके लिए दिल्ली में जमीन तैयार कर रहे थे.

साल 2009 में बैकरपुर लोकसभा सीट से जीत ने त्रिवेदी को ममता बनर्जी के और करीब ला दिया. बैरकपुर सीट पर दिनेश त्रिवेदी ने सीपीएम के तड़ित तोपदार को मात दी. इस जीत पर तड़ित तोपदार को हराना किसी करिश्मे से कम नहीं था. इस जीत ने ममता बनर्जी का विश्वास त्रिवेदी पर और भी ज्यादा बढ़ा दिया.

टेक्सास से किया एमबीए, कमर्शियल पायलट भी हैं त्रिवेदी त्रिवेदी के व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उनका जन्म गुजरात के एक ब्राहम्ण परिवार में हुआ. माता विभाजन के बाद दिल्ली आकर बस गए. त्रिवेदी की स्कूली शिक्षा हिमाचल प्रदेश के एख बोर्डिंग स्कूल में हुई. इसके बाद कॉलेज की पढ़ाई के लिए कोलकाता गए. जहां उन्होंने सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया. त्रिवेदी उच्च शिक्षा के लिए विदेश भी गए, उन्होंने टेक्सास विश्वविद्यालय से एमबीए किया है. उनके पास कमर्शियल पायलट का लाइसेंस भी है.

ये भी पढ़ें- बंगाल में 'मतुआ' से ममता को मात देने की कवायद? जिसे मतुआ का साथ, उसके सिर पर ताज क्या बंगाल में लेफ्ट-कांग्रेस को मजबूत कर रही है टीएमसी? बीजेपी ने लगाए ममता और वाम की मिलीभगत के आरोप

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