एक्सप्लोरर

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट आज समान नागरिक संहिता से जुड़ी याचिकाओं पर करेगा सुनवाई, जानें अब तक इस पर क्या कुछ हुआ

Uniform Civil Code: तलाक की एक समान व्यवस्था बच्चा गोद लेने, वसीयत के नियम जैसे प्रावधान भी एक जैसे बनाने की मांग को सुप्रीम कोर्ट सुनेगा.

Supreme Court: सभी धर्मों में तलाक की एक समान व्यवस्था की मांग वाली याचिका को आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) सुनेगा. इसके साथ ही कोर्ट बच्चा गोद लेने, वसीयत के नियम जैसे प्रावधान भी सभी धर्मों के लिए एक जैसे बनाने की मांग भी सुनेगा. इन याचिकाओं पर जवाब देते हुए केंद्र ने कहा, यूनिफॉर्म सिविल कोड का मसला नीतिगत है. कोर्ट इस पर विचार न करे. सरकार लॉ कमीशन को मामला सौंपेगी.

ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट भी कई बार देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की ज़रूरत जता चुका है. सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि भारत में अब तक यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया. जबकि संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 44 में नीति निदेशक तत्व के तहत उम्मीद जताई थी कि भविष्य में ऐसा किया जाएगा.

क्या है समान नागरिक संहिता

यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब है विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे जैसे विषयों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नियम. दूसरे शब्दों में कहें तो परिवार के सदस्यों के आपसी संबंध और अधिकारों को लेकर समानता. जाति-धर्म-परंपरा के आधार पर कोई रियायत नहीं.

इस वक़्त हमारे देश में धर्म और परंपरा के नाम पर अलग नियमों को मानने की छूट है. जैसे, किसी समुदाय में बच्चा गोद लेने पर रोक है. किसी समुदाय में पुरुषों को कई शादी करने की इजाज़त है. कहीं-कहीं विवाहित महिलाओं को पिता की संपत्ति में हिस्सा न देने का नियम है. यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने पर किसी समुदाय विशेष के लिए अलग से नियम नहीं होंगे.

धार्मिक मान्यताओं पर फर्क नहीं

यूनिफॉर्म सिविल कोड का ये मतलब कतई नहीं है कि इसकी वजह से विवाह मौलवी या पंडित नहीं करवाएंगे. ये परंपराएं बदस्तूर बनी रहेंगी. नागरिकों के खान-पान, पूजा-इबादत, वेश-भूषा पर इसका कोई असर नहीं होगा. ये अलग बात है कि धार्मिक कट्टरपंथी इसको सीधे धर्म पर हमले की तरह पेश करते रहे हैं.

संविधान में जिक्र है

संविधान बनाते वक्त समान नागरिक संहिता पर काफी चर्चा हुई. लेकिन तब की परिस्थितियों में इसे लागू न करना ही बेहतर समझा गया. इसे अनुच्छेद 44 में नीति निदेशक तत्वों की श्रेणी में जगह दी गई. नीति निदेशक तत्व संविधान का वो हिस्सा है जिनके आधार पर काम करने की सरकार से उम्मीद की जाती है.

सिर्फ हिंदुओं के लिए बना कानून 

1954-55 में भारी विरोध के बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू हिन्दू कोड बिल लाए. इसके आधार पर हिन्दू विवाह कानून और उत्तराधिकार कानून बने. मतलब हिन्दू, बौद्ध, जैन और सिख समुदायों के लिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार जैसे नियम संसद ने तय कर दिए. मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदायों को अपने-अपने धार्मिक कानून यानी पर्सनल लॉ के आधार पर चलने की छूट दी गई. ऐसी छूट नगा समेत कई आदिवासी समुदायों को भी हासिल है. वो अपनी परंपरा के हिसाब से चलते हैं.

लॉ कमीशन ने सीधे लागू करने से मना किया

इससे पहले भी केंद्र सरकार ने लॉ कमीशन को मामले पर रिपोर्ट देने के लिए कहा था. 31 अगस्त 2018 को लॉ कमीशन ने मसले पर अपने सुझाव दिए. अलग-अलग लोगों से विस्तृत चर्चा और कानूनी, सामाजिक स्थितियों की समीक्षा के आधार पर लॉ कमीशन ने कहा, "अभी समान नागरिक संहिता लाना मुमकिन नहीं है. इसकी बजाय मौजूदा पर्सनल लॉ में सुधार किया जाए. मौलिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता में संतुलन बनाया जाए. पारिवारिक मसलों से जुड़े पर्सनल लॉ को संसद कोडिफाई करने (लिखित रूप देने) पर विचार करे. सभी समुदायों में समानता लाने से पहले एक समुदाय के भीतर स्त्री-पुरुष के अधिकारों में समानता लाने की कोशिश हो."

कई याचिकाएं लंबित हैं

यूनिफॉर्म सिविल कोड की मांग करने वाली कई याचिकाएं दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित हैं. यह याचिकाएं अश्विनी उपाध्याय, फ़िरोज़ बख्त अहमद, अंबर ज़ैदी, निगहत अब्बास और दानिश इकबाल जैसे कई लोगों की की हैं. इन सभी याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह मामला अपने पास ट्रांसफर ले ले. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में सभी धर्म की महिलाओं के लिए एक समान गुज़ारा भत्ता, शादी की एक समान उम्र की मांग, गोद लेने के लिए एक जैसा कानून, मुस्लिम पुरुषों को बहुविवाह की अनुमति जैसे मसलों पर याचिकाएं लंबित हैं. यह सभी विषय नागरिकों के लिए एक जैसे सिविल कानून की ही मांग करते हैं.

क्या राज्यों का इसे लागू करना व्यवहारिक होगा?

विवाह, तलाक, वसीयत जैसे तमाम विषयों पर केंद्रीय कानून हैं. हिंदुओं के लिए हिन्दू विवाह अधिनियम, उत्तराधिकार कानून जैसे एक्ट हैं, तो मुसलमानों के सिविल मामले एप्लिकेशन ऑफ शरीयत एक्ट, 1937 से संचालित होते हैं. केंद्रीय कानूनों के रहते राज्यों का यूनिफॉर्म सिविल कोड लाना बहुत प्रभावी नहीं होगा. अगर राज्य ऐसा करते हैं तो उसकी वैधता को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है.

यह भी पढ़ें.

करीब 2 दशक से सुप्रीम कोर्ट के गलियारों का एक जाना-पहचाना चेहरा. पत्रकारिता में बिताया समय उससे भी अधिक. कानूनी ख़बरों की जटिलता को सरलता में बदलने का कौशल. खाली समय में सिनेमा, संगीत और इतिहास में रुचि.
Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Hydrogen Fuel Train: PM मोदी ने दिखाई भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी! जानिए इसकी खासियतें
PM मोदी ने दिखाई भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी! जानिए इसकी खासियतें
राष्ट्रगान की तरह 'वंदे मातरम' को देना होगा सम्मान, नहीं तो... राष्ट्रगीत को लेकर सरकार ला रही नया विधेयक, जानें क्या है ये
राष्ट्रगान की तरह 'वंदे मातरम' को देना होगा सम्मान, नहीं तो... राष्ट्रगीत को लेकर सरकार ला रही नया विधेयक, जानें क्या है ये
सोनम वांगचुक का नया वीडियो आया सामने- 'मैं 20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, उसके बाद भूत बनकर...'
सोनम वांगचुक का नया वीडियो आया सामने- 'मैं 20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, उसके बाद भूत बनकर...'
सहारनपुर से कोलकाता एयरपोर्ट तक... मस्जिद विवाद पर फिरंगी महली का बड़ा बयान, कहा- 'मुसलमान की शिनाख्त मिटाने की कोशिश'
मस्जिद विवाद पर फिरंगी महली का बड़ा बयान, कहा- 'मुसलमान की शिनाख्त मिटाने की कोशिश'

वीडियोज

Lionel Messi: 39 साल की फुटबॉल मशीन! ABPLIVE
Kiku Sharda ने खोला Kapil Sharma Show का बड़ा राज
Jennifer Winget की दूसरी शादी की खबरों ने बढ़ाई फैंस की खुशी
अफवाह या सच? Kiara Advani की दूसरी प्रेग्नेंसी की चर्चा तेज
'The Odyssey' Review: Christopher Nolan का विजुअल मास्टरपीस, IMAX में मिलेगा असली रोमांच

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
राष्ट्रगान की तरह 'वंदे मातरम' को देना होगा सम्मान, नहीं तो... राष्ट्रगीत को लेकर सरकार ला रही नया विधेयक, जानें क्या है ये
राष्ट्रगान की तरह 'वंदे मातरम' को देना होगा सम्मान, नहीं तो... राष्ट्रगीत को लेकर सरकार ला रही नया विधेयक, जानें क्या है ये
Exclusive: दो मस्जिद...विंटेज कारों का शोकेस और PWD का गेस्ट हाउस, जौहर यूनिवर्सिटी के अंदर क्या-क्या है?
दो मस्जिद...विंटेज कारों का शोकेस और PWD का गेस्ट हाउस, जौहर यूनिवर्सिटी के अंदर क्या-क्या है?
आप और सपा के बाद सोनम वांगचुक को मिला कांग्रेस का साथ, पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पहुंचकर की मुलाकात
आप-सपा के बाद सोनम वांगचुक को मिला कांग्रेस का साथ, पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पहुंचकर की मुलाकात
स्पेन या अर्जेंटीना, किसके सिर सजेगा ताज? जानिए कब, कहां और कैसे देखें FIFA World Cup 2026 का महामुकाबला
स्पेन या अर्जेंटीना, किसके सिर सजेगा ताज? जानिए कब, कहां और कैसे देखें FIFA World Cup 2026 का महामुकाबला
'OMG 2 का आइडिया मेरा था, अक्षय कुमार ने स्क्रिप्ट ली और क्रेडिट तक नहीं दिया', परेश रावल का खुलासा
‘OMG 2 मेरा आइडिया थी लेकिन अक्षय ने नहीं दिया कोई क्रेडिट’, परेश रावल का खुलासा
Strait of Hormuz: 'जब तक अगला आदेश न दें...', होर्मुज में खतरा, भारतीयों के लिए DGMA ने जारी की एडवाइजरी, जानें क्या कहा
'जब तक अगला आदेश न दें...', होर्मुज में खतरा, भारतीयों के लिए DGMA ने जारी की एडवाइजरी, जानें क्या कहा
बिगड़ती तबीयत, खतरे में जान... सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 20वां दिन, डॉक्टरों ने दी ऑर्गन फेलियर की चेतावनी
खतरे में जान... सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 20वां दिन, डॉक्टरों ने दी ऑर्गन फेलियर की चेतावनी
Sonam Wangchuk Hunger Strike: लंबे वक्त तक भूख हड़ताल से कौन-से अंग सबसे पहले होते हैं खराब, कब फेल होने लगता है सिस्टम?
लंबे वक्त तक भूख हड़ताल से कौन-से अंग सबसे पहले होते हैं खराब, कब फेल होने लगता है सिस्टम?
Embed widget