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Indian Army: भारतीय सेना के पास अब कौन-कौन से स्वदेशी हथियार? देख लें पूरी लिस्ट

Indian Army: भारत अब अपने कई सारे हथियार आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी रूप से बना रहा है. आइए जानते हैं कि भारत के पास कितने स्वदेशी हथियार हैं.

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  • आत्मनिर्भर भारत से सैन्य आधुनिकीकरण, स्वदेशी हथियारों पर जोर बढ़ा।
  • आकाश, नाग, ब्रह्मोस मिसाइलें, अग्नि श्रृंखला भारत की शक्ति बनी।
  • पिनाका रॉकेट, धनुष, ATAGS तोपों ने तोपखाने क्षमता बढ़ाई।
  • अर्जुन टैंक, जोरावर लाइट टैंक, प्रचंड हेलीकॉप्टर सेना की मारक क्षमता।
  • AK-203 राइफल का उत्पादन, पैदल सेना के हथियारों का आधुनिकीकरण।

Indian Army: आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत भारत के सैन्य आधुनिकीकरण में तेजी आई है. देश अब स्वदेशी हथियारों और रक्षा प्रणालियों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है. बीते कुछ सालों में भारतीय सेना ने अपने जखीरे में कई एडवांस्ड स्वदेशी मिसाइल, तोप, टैंक, हेलीकॉप्टर और राइफल शामिल की हैं. रक्षा मंत्रालय की पॉजिटिव इंडिजनाइजेशन लिस्ट के जरिए अब 3000 से ज्यादा रक्षा उपकरणों को घरेलू उत्पादन के लिए चिन्हित किया गया है. 

स्वदेशी मिसाइल प्रणाली 

भारत के रक्षा क्षेत्र की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक एडवांस्ड मिसाइल प्रणालियों का विकास है. आकाश मिसाइल प्रणाली एक शानदार वायु रक्षा हथियार बन गई है. यह कम दूरी पर दुश्मनों के विमान, ड्रोन और मिसाइल को रोकने में सक्षम है. इसी तरह नाग मिसाइल तीसरी पीढ़ी की फायर एंड फॉरगेट श्रेणी की टैंक रोधी मिसाइल है. यह दुश्मन के भारी बख्तरबंद टैंकों को नष्ट करने के लिए डिजाइन की गई है.

भारत ब्रह्मोस मिसाइल का भी संचालन करता है. इसे दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल में से एक माना जाता है. भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित इस मिसाइल के लैंड अटैक संस्करण का इस्तेमाल सेना द्वारा सटीक हमले के लिए किया जाता है. इसी के साथ परमाणु क्षमता से लैस अग्नि श्रृंखला भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता की रीढ़ है.

तोपखाने और रॉकेट 

भारत में स्वदेशी तोपखाने प्रणाली के क्षेत्र में भी बड़ा विकास किया है. पिनाका रॉकेट प्रणाली अब सेना की सबसे जरूरी रॉकेट प्रणालियों में से एक है.  यह सिर्फ 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकती है. इससे बड़े इलाके में दुश्मन के ठिकानों को तबाह किया जा सकता है. एक और बड़ी स्वदेशी उपलब्धि है धनुष. इसे अक्सर देसी बोफोर्स भी कहा जाता है. यह 155 एमएम की एक तोप है जिसे भारतीय तकनीक का इस्तेमाल करके विकसित किया गया है.  इसी के साथ ATAGS अपनी श्रेणी की सबसे शक्तिशाली स्वदेशी ‌तोपखाने प्रणालियों के रूप में उभरी है. सेना ने शारंग जैसी परियोजनाओं के जरिए पुरानी तोपखाने प्रणालियों को भी एडवांस किया है. 

स्वदेशी टैंक 

अर्जुन MBT अपनी भारी बख्तरबंद सुरक्षा और एडवांस्ड मारक क्षमता प्रणाली के लिए जाना जाता है. इस टैंक को खास तौर से भारतीय युद्ध क्षेत्र की स्थिति के मुताबिक ही डिजाइन किया गया है. हालांकि T-90S भीष्म मूल रूप से रूसी टेक्नोलॉजी पर आधारित है लेकिन अब इसका बड़े पैमाने पर भारत में ही निर्माण किया जा रहा है. इतना ही नहीं बल्कि भारत लद्दाख जैसे ऊंचे इलाकों और पहाड़ी सीमावर्ती क्षेत्र में तैनात करने के लिए स्वदेशी हल्के टैंक जोरावर को भी विकसित कर रहा है.

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स्वदेशी हेलीकॉप्टर 

भारत के एविएशन सेक्टर ने भी सेना को कई एडवांस्ड विदेशी प्लेटफार्म उपलब्ध कराए हैं. HAL प्रचंड को दुनिया का एकमात्र ऐसा अटैक हेलीकॉप्टर माना जाता है जो लगभग 5000 मीटर की ऊंचाई पर भी काम करने में सक्षम है. इसी तरह HAL रुद्र एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव का ही एक हथियारबंद संस्करण है. यह टोही अभियान, सैनिकों को सहायता देने और युद्ध अभियानों के लिए पूरी तरह से सुसज्जित है.

स्वदेशी छोटे हथियार 

भारत ने स्थानीय स्तर पर बनी राइफल और मशीन पिस्तौलों के साथ पैदल सेना के हथियारों को भी एडवांस करना शुरू कर दिया है. आधुनिकीकरण के प्रयास में तेजी आने से पहले INSAS राइफल कई सालों तक भारतीय सेना की मानक राइफल के रूप में अपनी सेवा देती रही हैं.

अब भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से अमेठी में नई AK-203 राइफल का उत्पादन किया जा रहा है. उम्मीद है कि यह सेना की कई टुकड़ियों में इस्तेमाल हो रही पुरानी राइफल की जगह ले लेगी.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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