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'SIR में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी पर फैसला नहीं', SC बोला, जानें कहा कितनों को मिला नोटिस

SIR में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी पर SC ने कहा कि अंतिम फैसला बाकी है. जानें अभिषेक बनर्जी की मांग पश्चिम बंगाल में 1.40 करोड़ नोटिस और 4 राज्यों व दिल्ली में 1.76 करोड़ नोटिस से जुड़ी जानकारी.

सुप्रीम कोर्ट SIR को लेकर सुनवाई कर रहा है. इस बीच उसने SIR में इस्तेमाल की जा रही लॉजिकल डिसक्रिपेंसी को लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि इस पर फैसला आना बाकी है. कोर्ट ने आगे कहा कि उसने पश्चिम बंगाल में इस कैटेगरी के इस्तेमाल को एक अंतरिम व्यवस्था के तौर पर अनुमति दी थी.

SC की तरफ से लॉजिकल डिसक्रिपेंसी पर दिए गए बयान पर TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने एक्स पर ट्वीट कर लिखा कि कितना सुविधाजनक लोकतंत्र है. अगर हेरफेर किए गए जनादेश से एक पूर्ण सरकार बन सकती है तो फिर चुनावी वैधता का क्या मतलब रह जाता है? इस तर्क के हिसाब से मौजूदा राज्य सरकार को एक अस्थायी सरकार माना जाना चाहिए.

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि SC को पश्चिम बंगाल में पिछली चुनी हुई सरकार को बहाल करना चाहिए और 6 महीने के भीतर नए चुनाव कराने का निर्देश देना चाहिए. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए हर पात्र मतदाता को वापस शामिल किया जाए. वरना, इस तर्क में अगर कुछ तार्किक है तो वह बस यही है कि यह कितनी आसानी से तमाम गड़बड़ियों को अनदेखा कर देता है.

लॉजिकल डिसक्रिपेंसी के आधार पर नोटिस

ECI  की तरफ से SIR के जरिए मतदाताओं को लॉजिकल डिसक्रिपेंसी के आधार पर नोटिस भेजा है. इस बीच SC ने दर्ज किया कि वेस्ट बंगाल में लगभग 1.40 करोड़ लोगों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए नोटिस मिले थे. इनमें से लगभग 1.36 करोड़ लोगों को लॉजिकल डिसक्रिपेंसी की कैटेगरी में रखा गया था. इन डिसक्रिपेंसी में पिता के नाम में अंतर, माता-पिता की उम्र में डिसक्रिपेंसी, माता-पिता की उम्र में 50 साल से अधिक का अंतर, दादा-दादी की उम्र में 40 साल से कम का अंतर और ऐसे रिकॉर्ड शामिल थे, जिनमें 6 से अधिक बच्चों का जिक्र था.

4 राज्यों और दिल्ली में लगभग 1.76 करोड़ नोटिस

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली में लगभग 1.76 करोड़ मतदाताओं को'लॉजिकल डिसक्रिपेंसी  की कैटेगरी  के तहत नोटिस मिले थे. रिपोर्ट में इरोनेट की भूमिका पर जोर दिया गया. यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर है, जिसका इस्तेमाल वोटर लिस्ट की जानकारी को प्रोसेस करने और मौजूदा वोटरों के जानकारी का पुराने रिकॉर्ड से मिलान करने के लिए किया जाता है. ERONET अब निर्वाचन आयोग के व्यापक ECINET सिस्टम के अंतर्गत काम करता है.

राज्यों के बीच मानदंडों में अंतर

रिपोर्ट के मुताबिक लॉजिकल डिसक्रिपेंसी से जुड़े नोटिसों का इस्तेमाल और दायरा अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग था. दिल्ली, तेलंगाना और उत्तराखंड में संबंधित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के लगभग एक-तिहाई हिस्से को नोटिस जारी किए गए थे. कर्नाटक में यह अनुपात 10 फीसदी से कम था. दिल्ली में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का लगभग 19 फीसदी और उत्तराखंड में 27 फीसदी हिस्सा लॉजिकल डिसक्रिपेंसी से प्रभावित था. कर्नाटक में इस श्रेणी का अनुपात काफी कम था.

About the author सौरव कुमार

4 सालों से डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं. साल 2022 से एबीपी न्यूज़ से जुड़े हुए हैं. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय डेस्क की भी जिम्मेदारी संभालते हैं. सेंट्रल यूनिर्वसिटी ऑफ साउथ बिहार से 2022 में पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल की. राजनीति, चुनाव, सामाजिक विषयों और साहित्य में रुचि है. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर जोर देते हैं. राजनीति से जुड़ी खबरों पर लगातार लिख रहे हैं

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