SC ने कहा, 'बिहार SIR के दौरान नए फॉर्म-6 पर कोई फैसला नहीं दिया'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने सिर्फ यही कहा था कि हमने फॉर्म 6 में किसी बदलाव को न तो मंजूर किया है, न नामंजूर किया है. बिहार SIR पर फैसला देते समय यह विषय हमारे सामने नहीं था.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (12 अक्टूबर) को कहा कि उसने बिहार में एसआईआर से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान नए फॉर्म-6 पर कोई फैसला नहीं दिया था. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ एसआईआर से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि उसने फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी थी. जस्टिस जोयमाल्या बागची ने उन्हें रोकते हुए कहा कि हमने सिर्फ यही कहा था कि हमने फॉर्म 6 में किसी बदलाव को न तो मंजूर किया है, न नामंजूर किया है. बिहार SIR पर फैसला देते समय यह विषय हमारे सामने नहीं था.
चीफ जस्टिस ने क्या कहा?
इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा, "हम अनुरोध करते हैं कि कृपया खबर बनाने के लिए हमारे कुछ शब्दों को मत उठाइए." सुप्रीम कोर्ट ने पांच अक्टूबर को एक अलग याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि उसने विभिन्न राज्यों में मतदाता सूचियों के एसआईआर के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म-6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है.
इससे पहले चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी, जिसमें संकेत दिया गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में एसआईआर से संबंधित मई 2026 के फैसले में फॉर्म-6 के घोषणा-पत्र को बरकरार रखा था.
चुनाव आयोग पर विवाद
बता दें कि फॉर्म-6 वह आवेदन है, जिसके जरिये कोई व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने का अनुरोध करता है.
विपक्षी दलों का आरोप है कि कई योग्य मतदाताओं को चुनाव आयोग ने वोटर नहीं बनने दिया. फॉर्म 6 में ऐसी शर्त लगाई गई, जिससे परेशानी हुई. विपक्षी पार्टियां इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आक्रामक है. आज भी इंडिया गठबंधन के नेता मार्च निकाल रहे हैं. ये मार्च दिल्ली के बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा.






















