'चेक के मामले एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर किए जा सकते हैं'- सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, इस सेक्शन का किया जिक्र
Supreme Court ने योगेश उपाध्याय बनाम अटलांटा लिमिटेड केस की सुनवाई करते हुए अहम बात कही है. कोर्ट ने कहा है कि चेक के मामलों में पेमेंट चुकाने वाले शख्स के बैंक का क्षेत्राधिकार अधिक महत्वपूर्ण है.

Supreme Court On Cheque Cases: सुप्रीम कोर्ट ने चेक से संबंधित आपराधिक मामलों को एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर करने को लेकर अहम टिप्पणी दी है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि सीआरपीसी के सेक्शन 406 के तहत उसके पास चेक मामलों को एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने की शक्ति है. कोर्ट ने योगेश उपाध्याय बनाम अटलांटा लिमिटेड केस में ट्रांसफर याचिका को अनुमति दे दी है.
बता दें कि इस मामले में छह में से चार केस एक ही कंपनी ने नई दिल्ली के द्वारका कोर्ट में दायर किए थे. वहीं दो मामले नागपुर (महाराष्ट्र) की अदालतों में पेंडिंग हैं. याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि नागपुर के दोनों मामलों को भी द्वारका कोर्ट में ही ट्रांसफर कर दिया जाए. कोर्ट ने याचिका को मंजूर कर लिया है.
कोर्ट ने किया धारा 406 और धारा 138 का जिक्र
जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और संजय कुमार की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि एनआई अधिनियम की धारा 142(1) में गैर-अस्थिर खंड के बावजूद, सीआरपीसी की धारा 406 के तहत आपराधिक मामलों को ट्रांसफर करने की इस अदालत की शक्ति अधिनियम 1881 की धारा 138 के तहत अपराधों के संबंध में बरकरार है. हालांकि, शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि कोर्ट को सेक्शन 406 को अवोइड करना चाहिए और मामले को ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए.
इस केस का दिया हवाला
अदालत ने दशरथ रूपसिंह राठौड़ बनाम महाराष्ट्र केस का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में जिस शख्स को पैसा चुकाना है उसका क्षेत्राधिकार महत्वपूर्ण है, न कि शिकायतकर्ता के बैंक पर जहां वह चेक पेश किया गया था. ये कहते हुए पीठ ने ट्रांसफर याचिका को अनुमति दे दी.
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