'700 रुपये की कॉफी, 100 का पानी...', मल्टीप्लेक्स में बिकने वाली महंगी चीजों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर सहमति जताते हुए कहा कि 200 रुपये की सीमा ठीक है, लेकिन कोर्ट ने टिकटों का रिकॉर्ड रखने के आदेश पर रोक लगा दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (3 नवंबर, 2025) को मल्टीप्लेक्स में मिलने वाली महंगी पानी की बोतल और कॉफी को लेकर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने मल्टीप्लेक्स ऑपरेटर्स से कहा है कि इस पर ध्यान देने की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट मल्टीप्लेक्स ऑपरेटर्स की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जो कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई थीं.
कर्नाटक सरकार ने हाल ही में मूवी टिकट की कीमत 200 रुपये तक सीमित करने का फैसला किया है, जिस पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने मल्टीप्लेक्स ऑपरेटर्स को निर्देश दिया कि जब तक यह मामला कोर्ट में चल रहा है, टिकट बिक्री का ऑडिट योग्य रिकॉर्ड रखा जाए, जिसमें बुकिंग और भुगतान का तरीका भी शामिल हो. साथ ही डिजिटल रसीदें जारी की जाएं और डेली कैश रजिस्टर पर मैनेजर के हस्ताक्षर हों.
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर राज्य सरकार का टिकट कैप (200 रुपये की सीमा) आदेश बाद में सही पाया गया तो मुकदमे की अवधि में इलेकॉट्रॉनिक्स माध्यम से लिए गए अतिरिक्त शुल्क उपभोक्ताओं को लौटाने होंगे.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने मल्टीप्लेक्स ऑपरेटर्स के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि हर टिकट का रिकॉर्ड रख पाना मुश्किल है क्योंकि सिर्फ काउंटर से ही नहीं बुक माय शो से भी टिकट बुक होती हैं. मुकुल रोहतगी ने यह भी तर्क दिया कि राज्य सरकार को टिकट की कीमत तय करने का अधिकार नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर सहमति जताते हुए कहा कि 200 रुपये की सीमा ठीक है. हालांकि, कोर्ट ने टिकटों का रिकॉर्ड रखने के आदेश पर रोक लगा दी है. जस्टिस विक्रम नाथ ने सिनेमा हॉल्स में बिकने वाली चीजों की ऊंची कीमतों पर तीखी टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा, 'आप लोग पानी की बोतल 100 रुपये में बेचते हैं, कॉफी 700 रुपये में.... अगर ऐसे ही चलता रहा तो हॉल खाली रह जाएंगे.'
एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कोर्ट की टिप्पणी पर कहा कि यह उपभोक्ता की पसंद का मामला है. इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, 'सिनेमा पहले ही गिरावट में हैं, इन्हें लोगों के लिए किफायती बनाइए, नहीं तो दर्शक ही नहीं आएंगे.' मुकुल रोहतगी ने जवाब में कहा, 'खाली रहने दीजिए, जो सामान्य सिनेमा देखना चाहते हैं, वे वहं जाएं... ये तो मल्टीप्लेक्स के लिए हैं.' जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि अब तो सामान्य सिनेमा बचे ही नहीं हैं.
एक और याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट श्याम दिवान ने कहा कि संबंधित कानून राज्य सरकार को टिकट दर तय करने की शक्ति नहीं देता है. उन्होंने कहा कि यह फैसला कानूनी दायरे से बाहर है. अब यह मामला 25 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा.
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