'मौत देने का कम दर्दनाक तरीका तय करे केंद्र...' फांसी के विकल्प पर SC
फांसी की जगह दूसरे तरीके अपनाने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. कोर्ट ने ये मामला केंद्र सरकार पर छोड़ दिया है.

मौत की सजा देने के लिए फांसी की जगह दूसरे तरीके अपनाने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. कोर्ट ने मामला केंद्र सरकार पर छोड़ते हुए कहा है कि वह विशेषज्ञों की मदद से मौत की सजा देने के किसी कम पीड़ादायक और ज्यादा सम्मानजनक तरीके पर विचार कर सकती है.
याचिका खारिज की
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मृत्युदंड को लागू करने के लिए फांसी से कम पीड़ादायक वैकल्पिक तरीके की मांग की याचिका खारिज कर दी है. याचिकाकर्ता ने इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ के पास भेजने की मांग की थी. पीठ ने कहा कि इस तरह के फैसलों को बड़ी पीठ के पास भेजकर च सामंजस्य स्थापित करने का पर्याप्त आधार नहीं बनता.
मृत्युदंड की प्रक्रिया बदलने की अपील
ये याचिका वकील ऋषि मल्होत्रा ने दाखिल की थी. उन्होंने अपनी याचिका में फांसी को मौत की सजा देने का एक क्रू और अमानवीय तरीका बताया था. याचिकाकर्ता ने फांसी की बजाय जहर का इंजेक्शन देने का सुझाव किया गया था. केंद्र की तरफ से कोर्ट में बताया गया कि इस मुद्दे पर विचार के लिए सरकार ने एक कमेठी बनाई है. जिसके बाद कोर्ट ने सरकार और याचिकाकर्ता से तीन हफ्ते में अपनी दलीले लिखित में जमा कराने के लिए कहा था.
दिया था ये सुझाव
याचिकाकर्ता ने याचिका में फांसी की जगह जहर का इंजेक्शन, शूटिंग, इलेक्ट्रोक्यूशन या गैस चैंबर जैसे विकल्प सुझाए थे. जिससे मौत कुछ ही मिनटों में हो सकती है. याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में फांसी को पीड़ादायक, अमानवीय और क्रूर बताया था.
याचिका में कहा गया है कि किसी अपराधी को गर्दन से लटकाकर फांसी देना (CrPC की धारा 354(5) के तहत) बहुत ही क्रूर और अमानवीय तरीका है, इसलिए कानून के इस नियम को रद्द (असंवैधानिक) घोषित किया जाना चाहिए. संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है.
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