असम में 667 मकानों को गिराने को याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट की अवमानना बताया, अधिकारियों को जारी हुआ नोटिस
सीजेआई भूषण रामकृष्ण गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने याचिकाकर्ता के लिए पेश वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े को थोड़ी देर सुनने के बाद असम सरकार के अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिया.

असम के गोआलपाड़ा में 667 घर गिराए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. याचिका में असम के अधिकारियों पर अवमानना का मुकदमा चलाने की मांग की गई है. कहा गया है कि कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल आए आदेश के खिलाफ है. बिना उचित तरीके से नोटिस दिए या अपना पक्ष रखने का मौका दिए बुलडोजर चला दिया गया.
वकील अदील अहमद के जरिए दाखिल याचिका में नूर नबी समेत 8 याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई सिर्फ एक समुदाय विशेष के लोगों के खिलाफ की गई है. सभी भूमिहीन लोग हैं. वह 50-60 साल से गोआलपाड़ा के हसिला बील गांव में रह रहे थे. इस साल 13 जून को भू-राजस्व विभाग के अंचल अधिकारी ने इसे मत्स्य पालन विभाग को आवंटित जमीन बताया.
याचिका में कहा गया है कि अंचल अधिकारी ने जमीन खाली करने का नोटिस जारी कर दिया. लाउडस्पीकर से इसका ऐलान भी किया गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल आए फैसले के मुताबिक मकान मालिकों को व्यक्तिगत नोटिस नहीं दिया गया. लोगों को अपना पक्ष रखने या कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करने का मौका दिए बिना विध्वंस की कार्रवाई कर दी गई.
याचिका में असम के चीफ सेक्रेट्री और गोआलपाड़ा के जिलाधिकारी समेत 6 अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है. चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई और के विनोद चंद्रन की बेंच ने याचिकाकर्ता के लिए पेश वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े को थोड़ी देर सुनने के बाद नोटिस जारी कर दिया. कोर्ट ने प्रतिवादियों को 2 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है.
मामले में अगली सुनवाई 12 अगस्त को होने की संभावना है. गुरुवार, 24 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा, 'राज्य सरकार का जवाब आने दीजिए. अगर वह ज़मीन सरकारी है, तो स्थिति अलग होगी. जिस फैसले के उल्लंघन की दलील आप दे रहे हैं, उसी में हम साफ कर चुके हैं कि सड़क, तालाब या सार्वजनिक भूमि के अतिक्रमण को हटाने पर यह फैसला लागू नहीं होता.'
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Source: IOCL






















