चंबल में अवैध खनन रोकने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश, कहा- अब भी नहीं रुका तो तैनात करेंगे अर्धसैनिक बल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्देशों के पालन में लापरवाही होने पर अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा. उनके खिलाफ कार्यवाही शुरू की जाएगी.

चंबल नदी में अवैध रेत खनन रोकने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त आदेश दिया है. कोर्ट ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार से चंबल अभयारण्य क्षेत्र में वाईफाई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनकी लगातार निगरानी को कहा है. साथ ही, रेत ढोने वाले ट्रकों में जीपीएस सिस्टम लगाकर उनकी गतिविधियों की निगरानी का भी दिया आदेश दिया है.
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में जारी अवैध रेत खनन से पर्यावरण और वन्य जीवों को हो रहे खतरे पर सुप्रीम कोर्ट खुद संज्ञान लेकर यह सुनवाई कर रहा है, शुक्रवार, 17 अप्रैल को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि अगर राज्य सरकारें खनन माफिया पर लगाम लगाने में असफल रहेंगी, तो वह चंबल क्षेत्र में रेत खनन पर पूरी तरह रोक लगा देगा और वहां पर सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों की तैनाती का आदेश देगा.
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनन रोकने को लेकर यह निर्देश जारी किए हैं:
- अवैध खनन के दौरान इस्तेमाल होने वाले रास्तों और नदी के किनारों पर वाई-फाई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं. इन कैमरों को ऊंचे खंभों पर लगाया जाए.
- सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड की निगरानी जिले के एसपी और डीएफओ के दफ्तर में हो
- मुरैना और ग्वालियर में खनन के काम में लगे सभी ट्रैक्टरों, ड्रेजर और मशीनों पर जीपीएस सिस्टम लगाया जाए और उनके लोकेशन की लगातार निगरानी हो. बिना जीपीएस वाले वाहनों को तुरंत जब्त किया जाए.
- पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों का विशेष गश्ती दल बनाया जाए. इन टीमों को माफियाओं का मुकाबला करने के लिए आधुनिक संचार उपकरण, सुरक्षा गियर और हथियार दिए जाएं.
- खनन माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो. उनकी संपत्ति कुर्क की जाए.
- अवैध खनन से पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन कर दोषियों से भारी हर्जाना वसूला जाए.
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इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को व्यक्तिगत चेतावनी भी दी है. कोर्ट ने कहा कि इन निर्देशों के पालन में लापरवाही होने पर अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा. उनके खिलाफ कार्यवाही शुरू की जाएगी. मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी. इस सुनवाई में तीनों राज्यों को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट देनी होगी.
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Source: IOCL


























