पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से एक और झटका, जज की ये बात सुनते ही दुखी होकर बोले- क्या मैं ऐसा शातिर अपराधी हूं कि...
15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगा दी थी जिसमें पवन खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट बेल दी गई थी.

असम सीएम हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी पर आरोप लगाने के मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. शुक्रवार (17 अप्रैल, 2026) को गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया है. कोर्ट ने उनसे कहा है कि वह अग्रिम जमानत के लिए असम की गुवाहाटी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करें.
पवन खेड़ा ने अपनी गिरफ्तारी का अंदेशा जताते हुए मंगलवार तक गिरफ्तारी पर रोक की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया. 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगा दी थी जिसमें पवन खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट बेल दी गई थी.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने पवन खेडा की याचिका खारिज करते हुए उन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट में अपील करने का निर्देश दिया है. इस पर पवन खेड़ा की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने उदास होकर कहा, 'क्या मुझे मंगलवार तक के लिए सुरक्षा नहीं दी जा सकती है... क्या मैं अपराधी हूं?'
पवन खेड़ा ने मंगलवार तक ट्रांजिट बेल की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है, ताकि वह सोमवार को गुवाहाटी हाईकोर्ट में अपील कर सकें. सिंघवी ने पवन खेड़ा की तरफ से कोर्ट में यह भी कहा, 'आज शुक्रवार है, मैं सोमवार को हाईकोर्ट में आवेदन दूंगा. क्या मैं इतना शातिर अपराधी हूं कि मुझे इतनी भी राहत नहीं मिल सकती?'
उनकी इस दलील पर जस्टिस महेश्वरी ने कहा कि पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि कैसे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट से ट्रांजिट बेल ली थी. उन्होंने कहा कि खुद को तेलंगाना का निवासी बताने के लिए पवन खेड़ा ने अपने आधार का फ्रंट साइज का फोटो दिया और बैक साइड का फोटो उनकी पत्नी के आधार कार्ड का था.
पवन खेड़ा के वकील सिंघवी ने इस पर कहा कि उन्होंने बहुत जल्दबाजी में याचिका दाखिल की थी, जिसकी वजह से दस्तावेज मिक्स हो गए. उन्होंने कहा कि बाद में पवन खेड़ा ने पत्नी के दस्तावेज भी दाखिल किए थे, जिनसे ये साबित होता है कि वह तेलंगाना की नागरिक हैं. उन्होंने यह भी कहा कि आधार कार्ड को लेकर इन दलीलों की वजह से ही 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की ट्रांजिट जमानत पर रोक लगा दी थी.
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सिंघवी की दलीलों पर जस्टिस महेश्वरी ने उनसे पूछा कि उनको सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या गलत लगता है. सिंघवी ने इस पर कहा कि कोर्ट को गुमराह करके यह आदेश प्राप्त किया गया था. हालांकि, जस्टिस महेश्वरी उनकी दलीलों से सहमत नहीं हुए और उन्होंने इस बात पर बार-बार जोर दिया कि पवन खेड़ा ने गलत दस्तावेज प्रस्तुत करके जमानत ली है.
क्या है मामला?
यह मामला असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां पर आरोपों से जुड़ा है. पवन खेड़ा ने गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाए थे कि रिंकी भुइयां के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं. इस पर रिंकी भुइयां ने पुलिस में शिकायत कर दी और मामला दर्ज हुआ. इसके बाद असम पुलिस दिल्ली में पवन खेड़ा के घर पहुंची, लेकिन वह वहां नहीं मिले और बाद में उन्होंने तेलंगाना हाईकोर्ट से एक हफ्ते की अग्रिम जमानत हासिल कर ली. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है.
(निपुण सहगल के इनपुट के साथ)
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