आपातकाल: असंवैधानिक घोषित करने की मांग पर SC में सुनवाई, सरकार ने क्या कहा?
इंदिरा गांधी सरकार की तरफ से लगाए गए आपातकाल को असंवैधानिक घोषित करने की मांग पर केंद्र सरकार ने जवाब दिया है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अधिसूचना जारी की जा चुकी है.

1975 में इंदिरा गांधी सरकार की तरफ से लगाए गए आपातकाल को असंवैधानिक घोषित करने की मांग पर केंद्र सरकार ने जवाब दिया है. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 11 जुलाई 2024 को इस बारे में अधिसूचना जारी की जा चुकी है. उस अधिसूचना के तहत 25 जून की तारीख को 'संविधान हत्या दिवस' घोषित किया गया है. इसके बाद जजों ने अधिसूचना की कॉपी याचिकाकर्ता की वकील को उपलब्ध करवाने के लिए कहते हुए सुनवाई टाल दी.
कोर्ट में जिस याचिका पर सुनवाई हो रही थी, उसे 2020 में देहरादून की रहने वाली वीरा सरीन नाम की महिला ने दाखिल किया था. याचिका दाखिल करते समय उनकी आयु 94 वर्ष थी. याचिकाकर्ता ने इमरजेंसी के दौरान अपने पति और परिवार पर हुए अत्याचारों का हवाला दिया था. उस समय कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने को लेकर कहा, "हमें देखना होगा कि इतने सालों के बाद इमरजेंसी को असंवैधानिक घोषित करना व्यवहारिक होगा या नहीं."
याचिका में क्या कहा गया?
याचिका में वीरा सरीन ने कहा था कि उनके पति की दिल्ली में ज्वेलरी और कीमती रत्नों की दो दुकानें थीं. इमरजेंसी के दौरान अचानक उन दुकानों पर छापा मारा गया और पति को गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें स्मगलिंग से जुड़ी धाराओं में फंसाने की धमकी दी गई. इसके अलावा उन्हें देश छोड़कर जाने के लिए मजबूर किया गया. दुकान से जो कीमती चीजें छापे के दौरान उठाई गईं थीं, उन्हें कभी भी वापस नहीं किया गया. सरकारी लोगों ने उन्हें हड़प लिया.
25 करोड़ का मुआवजा मांगा
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया था कि सरकारी कार्रवाई के चलते उनके पति जीवन भर सदमे में रहे. आखिरकार साल 2000 में उनकी मौत हो गई. पूरे परिवार ने मामले का परिणाम 4 दशक तक झेला. दिल्ली हाई कोर्ट भी सरकार की पूरी कार्रवाई को गलत करार दे चुका है. महिला ने अपने परिवार को 25 करोड़ रुपए का मुआवजा देने और आपातकाल को असंवैधानिक घोषित करने की मांग कोर्ट में रखी थी.
कोर्ट ने जताई हैरानी
14 दिसंबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल, दिनेश माहेश्वरी और ऋषिकेश रॉय की बेंच ने आपातकाल के इतने साल बाद याचिका दाखिल होने पर हैरानी जताई थी. हालांकि, याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे की जोरदार दलीलों के बाद कोर्ट ने मामले पर नोटिस जारी कर दिया था. हालांकि कोर्ट ने साफ किया था कि वह आपातकाल को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की व्यवहारिकता की पड़ताल करेगा. मुआवजा समेत दूसरी मांगों पर वह विचार नहीं करेगा.
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